हूद · 37/123
अनुवाद उच्चारण — सूरा हूद
وَاصْنَعِ الْفُلْكَ بِأَعْيُنِنَا وَوَحْيِنَا وَلَا تُخَاطِبْنِي فِي الَّذِينَ ظَلَمُوا ۚ إِنَّهُم مُّغْرَقُونَ ۝٣٧
Wasna`il fulka bi-a`yuninaa wa wahyinaa wa laa tukhaa tibnee fil lazeena zalamoo; innahum mughraqoon
📖 हिंदी अर्थ
और (बिस्मिल्लाह करके) हमारे रुबरु और हमारे हुक्म से कश्ती बना डालो और जिन लोगों ने ज़ुल्म किया है उनके बारे में मुझसे सिफारिश न करना क्योंकि ये लोग ज़रुर डुबा दिए जाएँगें

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • الفُلْك (अल-फुल्क): नाव या जहाज़।
  • بِأَعْيُنِنَا (बिआ'युनिना): हमारी देख-रेख और निगरानी में, हमारी सुरक्षा में।
  • وَوَحْيِنَا (ववह्यिना): हमारे आदेश और हमारी प्रेरणा से, यानी हमारे बताए तरीके पर।
  • لَا تُخَاطِبْنِي (ला तुख़ातिबनी): मुझसे बात मत करो, मुझसे सिफ़ारिश मत करो।
  • مُغْرَقُونَ (मुग़रक़ून): डूबने वाले, डुबोए जाने वाले।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने अपने नबी नूह (अलैहिस्सलाम) को आदेश दिया कि वे एक बड़ी नाव (जहाज़) बनाएं। यह नाव बनाने का काम अल्लाह की देख-रेख, निगरानी और सुरक्षा में होना था, और अल्लाह की ओर से बताए गए तरीके और प्रेरणा के अनुसार होना था। इसका मतलब यह था कि अल्लाह उन्हें हर नुक़्सान से बचाएगा और उन्हें सिखाएगा कि नाव कैसे बनानी है। साथ ही, अल्लाह ने नूह (अलैहिस्सलाम) को साफ़ तौर पर मना किया कि वे उन ज़ालिमों के बारे में अल्लाह से कोई सिफ़ारिश या दरख़्वास्त न करें, जिन्होंने कुफ़्र और ज़ुल्म किया था — चाहे वे उनके बेटे कन'आन हों या उनकी बीवी। अल्लाह ने स्पष्ट कर दिया कि उन लोगों का अंजाम पहले से तय हो चुका है: वे तूफ़ान में डूबकर हलाक होंगे, क्योंकि उन्होंने अपने कुफ़्र और ज़ुल्म पर अड़े रहने की सज़ा पानी है। यह आदेश अल्लाह की क़ुदरत और उसके फ़ैसले की पूर्णता को दर्शाता है।

फ़ायदे (सबक़ और नसीहतें):

  1. अल्लाह पर भरोसा: नूह (अलैहिस्सलाम) ने अल्लाह के आदेश पर जहाज़ बनाया, जो उनके लिए अजीब बात थी, लेकिन उन्होंने बिना किसी हिचकिचाहट के अल्लाह का हुक्म माना। इससे हमें सबक़ मिलता है कि अल्लाह के हर आदेश पर भरोसा करना चाहिए, भले ही वह हमारी समझ में न आए।
  2. अल्लाह की सुरक्षा: जो लोग अल्लाह के काम में लगे रहते हैं, अल्लाह उनकी हिफ़ाज़त करता है। नूह (अलैहिस्सलाम) को अल्लाह ने अपनी आँखों (देख-रेख) के तहत सुरक्षित रखा।
  3. ज़ालिमों से बेज़ारी: यह आयत सिखाती है कि ज़ुल्म और कुफ़्र पर अड़े रहने वालों के लिए अल्लाह की यात्रा अटल है। रिश्तेदारी या मोहब्बत किसी को अल्लाह की सज़ा से नहीं बचा सकती।
  4. दुआ और सिफ़ारिश की अहमियत: अल्लाह ने नूह (अलैहिस्सलाम) को सिफ़ारिश से रोका, क्योंकि उन ज़ालिमों का फ़ैसला पहले से तय था। इससे पता चलता है कि जब अल्लाह का फ़ैसला आ जाए, तो उसे बदलने की कोशिश नहीं करनी चाहिए, बल्कि अल्लाह के हुक्म के आगे सर झुकाना चाहिए।
  5. इस्लाम में इंसाफ़: इस्लाम सिखाता है कि सच्चाई और इंसाफ़ सबसे ऊपर है, चाहे मामला अपने ही बेटे या बीवी का क्यों न हो। यही अल्लाह की राह है।


📜 आयत 35-39 — सूरा हूद

35أَمْ يَقُولُونَ افْتَرَاهُ ۖ قُلْ إِنِ افْتَرَيْتُهُ فَعَلَيَّ إِجْرَامِي وَأَنَا بَرِيءٌ مِّمَّا تُجْرِمُونَ
(ऐ रसूल) क्या (कुफ्फ़ारे मक्का भी) कहते हैं कि क़ुरान को उस (तुम) ने गढ़ लिया है तुम कह दो कि अगर मैने उसको गढ़ा है तो मेरे गुनाह का वबाल मुझ पर होगा और तुम लोग जो (गुनाह करके) मुजरिम होते हो उससे मै बरीउल ज़िम्मा (अलग) हूँ
36وَأُوحِيَ إِلَىٰ نُوحٍ أَنَّهُ لَن يُؤْمِنَ مِن قَوْمِكَ إِلَّا مَن قَدْ آمَنَ فَلَا تَبْتَئِسْ بِمَا كَانُوا يَفْعَلُونَ
और नूह के पास ये 'वही' भेज दी गई कि जो ईमान ला चुका उनके सिवा अब कोई शख़्श तुम्हारी क़ौम से हरगिज़ ईमान न लाएगा तो तुम ख्वाहमा ख्वाह उनकी कारस्तानियों का (कुछ) ग़म न खाओ
37وَاصْنَعِ الْفُلْكَ بِأَعْيُنِنَا وَوَحْيِنَا وَلَا تُخَاطِبْنِي فِي الَّذِينَ ظَلَمُوا ۚ إِنَّهُم مُّغْرَقُونَ
और (बिस्मिल्लाह करके) हमारे रुबरु और हमारे हुक्म से कश्ती बना डालो और जिन लोगों ने ज़ुल्म किया है उनके बारे में मुझसे सिफारिश न करना क्योंकि ये लोग ज़रुर डुबा दिए जाएँगें
38وَيَصْنَعُ الْفُلْكَ وَكُلَّمَا مَرَّ عَلَيْهِ مَلَأٌ مِّن قَوْمِهِ سَخِرُوا مِنْهُ ۚ قَالَ إِن تَسْخَرُوا مِنَّا فَإِنَّا نَسْخَرُ مِنكُمْ كَمَا تَسْخَرُونَ
और नूह कश्ती बनाने लगे और जब कभी उनकी क़ौम के सरबर आवुरदा लोग उनके पास से गुज़रते थे तो उनसे मसख़रापन करते नूह (जवाब में) कहते कि अगर इस वक्त तुम हमसे मसखरापन करते हो तो जिस तरह तुम हम पर हँसते हो हम तुम पर एक वक्त हँसेगें
39فَسَوْفَ تَعْلَمُونَ مَن يَأْتِيهِ عَذَابٌ يُخْزِيهِ وَيَحِلُّ عَلَيْهِ عَذَابٌ مُّقِيمٌ
और तुम्हें अनक़रीब ही मालूम हो जाएगा कि किस पर अज़ाब नाज़िल होता है कि (दुनिया में) उसे रुसवा कर दे और किस पर (क़यामत में) दाइमी अज़ाब नाज़िल होता है
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अनुवाद — हूद 37

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Tuesday, September 8, 2026

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