हूद · 38/123
अनुवाद उच्चारण — सूरा हूद
وَيَصْنَعُ الْفُلْكَ وَكُلَّمَا مَرَّ عَلَيْهِ مَلَأٌ مِّن قَوْمِهِ سَخِرُوا مِنْهُ ۚ قَالَ إِن تَسْخَرُوا مِنَّا فَإِنَّا نَسْخَرُ مِنكُمْ كَمَا تَسْخَرُونَ ۝٣٨
Wa yasn`ul fulka wa kullamaa marra `alaihi malaum min qawmihee sakhiroo minh; qaala in taskharoo minnaa fa innaa naskharu minkum kamaa taskharoon
📖 हिंदी अर्थ
और नूह कश्ती बनाने लगे और जब कभी उनकी क़ौम के सरबर आवुरदा लोग उनके पास से गुज़रते थे तो उनसे मसख़रापन करते नूह (जवाब में) कहते कि अगर इस वक्त तुम हमसे मसखरापन करते हो तो जिस तरह तुम हम पर हँसते हो हम तुम पर एक वक्त हँसेगें

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • الْفُلْكَ: नौका (जहाज़)।
  • مَلَأٌ: क़ौम के बड़े लोग, सरदार और रईस।
  • سَخِرُوا: उपहास किया, मज़ाक उड़ाया।

तफ़सीर (व्याख्या):

हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) ने अल्लाह के हुक्म की पूरी तरह पालना करते हुए नौका बनाना शुरू कर दिया। जब भी उनकी क़ौम के बड़े लोग और सरदार उनके पास से गुज़रते, तो वे उनका मज़ाक उड़ाते और उन पर हँसते थे। उन्हें यह अजीब लगता था कि नूह (अलैहिस्सलाम) ऐसी जगह नौका बना रहे हैं जहाँ न पानी है और न कोई नदी। उनका यह उपहास इसलिए था क्योंकि उन्हें अल्लाह के वादे पर विश्वास नहीं था और वे उस आज़ाब को नहीं समझ पा रहे थे जो आने वाला था।

जब यह उपहास बार-बार दोहराया गया, तो हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) ने उन्हें जवाब दिया: "अगर तुम आज हमारा मज़ाक उड़ाते हो, तो हम भी तुम्हारा मज़ाक उड़ाएँगे, ठीक उसी तरह जैसे तुम हमारा उड़ा रहे हो।" उनका यह जवाब बदले की भावना से नहीं था, बल्कि यह अल्लाह की ओर से एक सच्ची ख़बर थी कि जब तूफ़ान आएगा और ये लोग डूबते हुए दिखेंगे, तब उनका उपहास और उनकी हँसी ख़त्म हो जाएगी और सच्चाई सामने आ जाएगी। यह उनके लिए एक चेतावनी भी थी कि उनका यह मज़ाक उड़ाना उन्हें अल्लाह के आज़ाब से नहीं बचा सकेगा।

फ़ायदे (सबक़):

  1. अल्लाह के हुक्म पर अमल करने में डटे रहना चाहिए, चाहे लोग कितना भी उपहास क्यों न करें। हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) ने लोगों के मज़ाक के बावजूद नौका बनाना जारी रखा, क्योंकि उन्हें अल्लाह के वादे पर पूरा यक़ीन था।
  2. मोमिन को अपने ईमान और अमल पर भरोसा होना चाहिए और उसे किसी के उपहास से विचलित नहीं होना चाहिए। सच्चाई की राह पर चलने वालों का मज़ाक उड़ाना काफ़िरों की पुरानी आदत है, लेकिन अंजाम सिर्फ़ सच्चाई वालों के लिए होता है।
  3. उपहास करने वालों का अंजाम बुरा होता है। जो लोग नबियों और नेक लोगों का मज़ाक उड़ाते हैं, वे अक्सर उसी चीज़ में पकड़े जाते हैं जिसका वे मज़ाक उड़ा रहे होते हैं। यह अल्लाह की सुन्नत (क़ानून) है।
  4. इस आयत में सब्र और दृढ़ता की सीख है। नुक़सान और तकलीफ़ के समय में भी मोमिन को अपने काम पर क़ायम रहना चाहिए और अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए, क्योंकि अल्लाह हमेशा अपने नेक बंदों की मदद करता है।
  5. यह आयत हमें सिखाती है कि दुनिया की हँसी और मज़ाक अस्थायी है, जबकि अल्लाह का फ़ैसला और उसका आज़ाब हक़ीक़त है। इसलिए इंसान को चाहिए कि वह लोगों की राय से ज़्यादा अल्लाह की रज़ा को महत्व दे।


📜 आयत 36-40 — सूरा हूद

36وَأُوحِيَ إِلَىٰ نُوحٍ أَنَّهُ لَن يُؤْمِنَ مِن قَوْمِكَ إِلَّا مَن قَدْ آمَنَ فَلَا تَبْتَئِسْ بِمَا كَانُوا يَفْعَلُونَ
और नूह के पास ये 'वही' भेज दी गई कि जो ईमान ला चुका उनके सिवा अब कोई शख़्श तुम्हारी क़ौम से हरगिज़ ईमान न लाएगा तो तुम ख्वाहमा ख्वाह उनकी कारस्तानियों का (कुछ) ग़म न खाओ
37وَاصْنَعِ الْفُلْكَ بِأَعْيُنِنَا وَوَحْيِنَا وَلَا تُخَاطِبْنِي فِي الَّذِينَ ظَلَمُوا ۚ إِنَّهُم مُّغْرَقُونَ
और (बिस्मिल्लाह करके) हमारे रुबरु और हमारे हुक्म से कश्ती बना डालो और जिन लोगों ने ज़ुल्म किया है उनके बारे में मुझसे सिफारिश न करना क्योंकि ये लोग ज़रुर डुबा दिए जाएँगें
38وَيَصْنَعُ الْفُلْكَ وَكُلَّمَا مَرَّ عَلَيْهِ مَلَأٌ مِّن قَوْمِهِ سَخِرُوا مِنْهُ ۚ قَالَ إِن تَسْخَرُوا مِنَّا فَإِنَّا نَسْخَرُ مِنكُمْ كَمَا تَسْخَرُونَ
और नूह कश्ती बनाने लगे और जब कभी उनकी क़ौम के सरबर आवुरदा लोग उनके पास से गुज़रते थे तो उनसे मसख़रापन करते नूह (जवाब में) कहते कि अगर इस वक्त तुम हमसे मसखरापन करते हो तो जिस तरह तुम हम पर हँसते हो हम तुम पर एक वक्त हँसेगें
39فَسَوْفَ تَعْلَمُونَ مَن يَأْتِيهِ عَذَابٌ يُخْزِيهِ وَيَحِلُّ عَلَيْهِ عَذَابٌ مُّقِيمٌ
और तुम्हें अनक़रीब ही मालूम हो जाएगा कि किस पर अज़ाब नाज़िल होता है कि (दुनिया में) उसे रुसवा कर दे और किस पर (क़यामत में) दाइमी अज़ाब नाज़िल होता है
40حَتَّىٰ إِذَا جَاءَ أَمْرُنَا وَفَارَ التَّنُّورُ قُلْنَا احْمِلْ فِيهَا مِن كُلٍّ زَوْجَيْنِ اثْنَيْنِ وَأَهْلَكَ إِلَّا مَن سَبَقَ عَلَيْهِ الْقَوْلُ وَمَنْ آمَنَ ۚ وَمَا آمَنَ مَعَهُ إِلَّا قَلِيلٌ
यहाँ तक कि जब हमारा हुक्म (अज़ाब) आ पहुँचा और तन्नूर से जोश मारने लगा तो हमने हुक्म दिया (ऐ नूह) हर किस्म के जानदारों में से (नर मादा का) जोड़ा (यानि) दो दो ले लो और जिस (की) हलाकत (तबाही) का हुक्म पहले ही हो चुका हो उसके सिवा अपने सब घर वाले और जो लोग ईमान ला चुके उन सबको कश्ती (नाँव) में बैठा लो और उनके साथ ईमान भी थोड़े ही लोग लाए थे
हूदकुरान सूची
123आयत
मक्कीअवतरण स्थान
38आयत

अनुवाद — हूद 38

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Friday, October 2, 2026

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