Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- الْفُلْكَ: नौका (जहाज़)।
- مَلَأٌ: क़ौम के बड़े लोग, सरदार और रईस।
- سَخِرُوا: उपहास किया, मज़ाक उड़ाया।
तफ़सीर (व्याख्या):
हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) ने अल्लाह के हुक्म की पूरी तरह पालना करते हुए नौका बनाना शुरू कर दिया। जब भी उनकी क़ौम के बड़े लोग और सरदार उनके पास से गुज़रते, तो वे उनका मज़ाक उड़ाते और उन पर हँसते थे। उन्हें यह अजीब लगता था कि नूह (अलैहिस्सलाम) ऐसी जगह नौका बना रहे हैं जहाँ न पानी है और न कोई नदी। उनका यह उपहास इसलिए था क्योंकि उन्हें अल्लाह के वादे पर विश्वास नहीं था और वे उस आज़ाब को नहीं समझ पा रहे थे जो आने वाला था।
जब यह उपहास बार-बार दोहराया गया, तो हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) ने उन्हें जवाब दिया: "अगर तुम आज हमारा मज़ाक उड़ाते हो, तो हम भी तुम्हारा मज़ाक उड़ाएँगे, ठीक उसी तरह जैसे तुम हमारा उड़ा रहे हो।" उनका यह जवाब बदले की भावना से नहीं था, बल्कि यह अल्लाह की ओर से एक सच्ची ख़बर थी कि जब तूफ़ान आएगा और ये लोग डूबते हुए दिखेंगे, तब उनका उपहास और उनकी हँसी ख़त्म हो जाएगी और सच्चाई सामने आ जाएगी। यह उनके लिए एक चेतावनी भी थी कि उनका यह मज़ाक उड़ाना उन्हें अल्लाह के आज़ाब से नहीं बचा सकेगा।
फ़ायदे (सबक़):
- अल्लाह के हुक्म पर अमल करने में डटे रहना चाहिए, चाहे लोग कितना भी उपहास क्यों न करें। हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) ने लोगों के मज़ाक के बावजूद नौका बनाना जारी रखा, क्योंकि उन्हें अल्लाह के वादे पर पूरा यक़ीन था।
- मोमिन को अपने ईमान और अमल पर भरोसा होना चाहिए और उसे किसी के उपहास से विचलित नहीं होना चाहिए। सच्चाई की राह पर चलने वालों का मज़ाक उड़ाना काफ़िरों की पुरानी आदत है, लेकिन अंजाम सिर्फ़ सच्चाई वालों के लिए होता है।
- उपहास करने वालों का अंजाम बुरा होता है। जो लोग नबियों और नेक लोगों का मज़ाक उड़ाते हैं, वे अक्सर उसी चीज़ में पकड़े जाते हैं जिसका वे मज़ाक उड़ा रहे होते हैं। यह अल्लाह की सुन्नत (क़ानून) है।
- इस आयत में सब्र और दृढ़ता की सीख है। नुक़सान और तकलीफ़ के समय में भी मोमिन को अपने काम पर क़ायम रहना चाहिए और अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए, क्योंकि अल्लाह हमेशा अपने नेक बंदों की मदद करता है।
- यह आयत हमें सिखाती है कि दुनिया की हँसी और मज़ाक अस्थायी है, जबकि अल्लाह का फ़ैसला और उसका आज़ाब हक़ीक़त है। इसलिए इंसान को चाहिए कि वह लोगों की राय से ज़्यादा अल्लाह की रज़ा को महत्व दे।
📜 आयत 36-40 — सूरा हूद
अनुवाद — हूद 38
सूरा हूद आयत 38 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और नूह कश्ती बनाने लगे और जब कभी उनकी क़ौम…सूरा आयत 38/123 — सूरा हूद هود (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा हूद सुनें, सूरा हूद अनुवाद, सूरा हूद mp3, सूरा हूद pdf. आयत 36–40. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा हूद
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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