Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- لَن يُؤْمِنَ – कभी ईमान नहीं लाएगा।
- فَلَا تَبْتَئِسْ – अतः तुम उदास/दुखी मत होओ।
- بِمَا كَانُوا يَفْعَلُونَ – उन कर्मों के कारण जो वे कर रहे थे (झुठलाना और उपहास)।
व्याख्या:
जब नूह (अलैहिस्सलाम) की क़ौम पर अल्लाह का अज़ाब (यातना) का फ़ैसला नाज़िल हुआ, तो अल्लाह ने अपने नबी की ओर वह़्य (प्रकाशना) भेजी कि हे नूह! तुम्हारी क़ौम में से जो लोग अब तक ईमान ला चुके हैं, उनके अलावा अब कोई और ईमान नहीं लाएगा। यह उनके लिए निराशा और उनके कुफ़्र पर स्थिर रहने की घोषणा थी, ताकि अल्लाह का वादा किया गया अज़ाब उन पर पूरा हो। अल्लाह ने नूह (अलैहिस्सलाम) को सांत्वना दी कि वे उन लोगों के कृत्यों पर दुखी न हों, जो लंबी अवधि तक उन्हें झुठलाते रहे और उनका मज़ाक उड़ाते रहे। यह इस बात का संकेत था कि अल्लाह उन्हें विनष्ट करने वाला है, और इसी के बाद नूह (अलैहिस्सलाम) ने उनके विरुद्ध दुआ की: "हे मेरे रब! धरती पर काफ़िरों में से किसी को जीवित न छोड़।" (सूरह नूह: 26)
लाभ एवं शिक्षाएँ:
- ईमान अल्लाह की ओर से एक उपहार है – यह केवल उसी को मिलता है जिसके लिए अल्लाह ने भलाई का इरादा किया हो। इसलिए हमें अपने ईमान की हिफ़ाज़त के लिए लगातार दुआ करनी चाहिए और अल्लाह से स्थिरता माँगनी चाहिए।
- नबियों का धैर्य और अल्लाह पर भरोसा – नूह (अलैहिस्सलाम) ने सैकड़ों वर्षों तक दावत दी, पर जब अल्लाह ने फ़ैसला सुना दिया, तो उन्होंने दुखी न होकर अल्लाह के फ़ैसले पर संतोष किया। यह हमें सिखाता है कि जब अल्लाह का फ़ैसला आ जाए, तो हमें उस पर रज़ामंद रहना चाहिए।
- अल्लाह की सज़ा का डर – जब कोई क़ौम हद से आगे बढ़ जाती है और नबियों को झुठलाती है, तो अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त होती है। यह हमें चेतावनी देता है कि हम अपने जीवन में नबियों की शिक्षाओं का अनुसरण करें और उनका मज़ाक उड़ाने से बचें।
- दुआ की ताकत – नूह (अलैहिस्सलाम) की दुआ से पूरी काफ़िर क़ौम विनष्ट हो गई। यह दिखाता है कि नेक लोगों की दुआ में कितनी बरकत होती है, और हमें अपने जीवन में दुआ को कभी कमज़ोर नहीं समझना चाहिए।
- सच्चे मोमिन की पहचान – जो लोग सच्चे दिल से ईमान लाते हैं, अल्लाह उन्हें बचा लेता है, चाहे पूरी दुनिया उनके खिलाफ क्यों न हो। यह हमें सिखाता है कि सच्चाई और ईमान पर अडिग रहना ही सफलता की कुंजी है।
📜 आयत 34-38 — सूरा हूद
अनुवाद — हूद 36
सूरा हूद आयत 36 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और नूह के पास ये 'वही' भेज दी गई कि…सूरा आयत 36/123 — सूरा हूद هود (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा हूद सुनें, सूरा हूद अनुवाद, सूरा हूद mp3, सूरा हूद pdf. आयत 34–38. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा हूद
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


