Mishary Rashid Alafasy
✓
Mahmoud Khalil Al-Husary
✓
Abdurrahman As-Sudais
✓
Mohamed Siddiq Al-Minshawi
✓
Abdul Basit Abdul Samad
✓
Ali Al-Hudhaify
✓
Ahmed ibn Ali al-Ajamy
✓
Abu Bakr Ash-Shaatree
✓
Muhammad Ayyoub
✓
Abdullah Basfar
✓
Abdullah Al-Juhani
✓
Maher Al Muaiqly
✓
अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- مَوْجٍ: पानी की ऊँची लहरें जो उठती और गिरती हैं।
- كَالْجِبَالِ: पहाड़ों जैसी ऊँची और विशाल।
- مَعْزِلٍ: अलग हुआ स्थान, जहाँ वह अपने पिता और ईमानवालों से दूर खड़ा था।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब अल्लाह का आदेश आया और पानी ज़मीन से उबलने लगा, तो नूह (अलैहिस्सलाम) की कश्ती उन्हें लेकर चल पड़ी। वह कश्ती समुद्र की उन विशाल लहरों के बीच चल रही थी जो पहाड़ों जैसी ऊँची थीं। यह दृश्य अत्यंत भयावह था, और हर ओर तबाही का साम्राज्य था।
इसी भयानक स्थिति में नूह (अलैहिस्सलाम) ने अपने बेटे को पुकारा, जो उनसे अलग एक जगह खड़ा था और काफ़िरों के साथ था। पिता का दिल बेटे के लिए धड़क उठा, और उन्होंने पुकारकर कहा: "मेरे प्यारे बेटे! हमारे साथ कश्ती में सवार हो जाओ, ताकि तुम इस तूफ़ान से बच जाओ। काफ़िरों के साथ मत रहो, वरना तुम भी उन्हीं की तरह डूबकर हलाक हो जाओगे।"
यह पुकार नूह (अलैहिस्सलाम) की ओर से पुत्र के प्रति प्रेम और दया का प्रतीक थी, क्योंकि वे नहीं चाहते थे कि उनका बेटा अल्लाह के अज़ाब में गिरकर नष्ट हो जाए। उन्होंने उसे नेक रास्ता दिखाया और उसे ईमानवालों के साथ जुड़ने की सलाह दी, ताकि वह सुरक्षित रह सके।
फ़ायदे और सबक:
- पैग़म्बरों की शफ़्क़त और रहमत: नूह (अलैहिस्सलाम) ने अपने बेटे को, जो काफ़िर था, फिर भी प्यार और दया से पुकारा और उसे बचाने की कोशिश की। यह सिखाता है कि हमें अपने रिश्तेदारों और अज़ीज़ों को, चाहे वे गलत रास्ते पर हों, प्यार और नसीहत के साथ सही रास्ते की ओर बुलाना चाहिए।
- ईमान ही नजात का ज़रिया है: कश्ती में सवार होना ईमान और नेक अमल की मिसाल है। जो लोग अल्लाह पर ईमान लाए और अपने नबी के साथ जुड़े, वे बच गए; जो काफ़िर रहे, वे डूब गए। यह बताता है कि दुनिया और आख़िरत की कामयाबी सिर्फ़ ईमान और अल्लाह की इताअत में है।
- ख़तरे से बचने का ज़रिया: जब अल्लाह का अज़ाब आता है, तो कोई रिश्ता, दौलत या मक़ाम काम नहीं आता। सिर्फ़ अल्लाह की रहमत और उसके हुक्म की पैरवी ही नजात दिलाती है। इसलिए हमें हमेशा अल्लाह के हुक्मों को मानना चाहिए और गुनाहों से बचना चाहिए।
- पैग़म्बरों की दावत का अंदाज़: नूह (अलैहिस्सलाम) ने अपने बेटे को "يَا بُنَيَّ" (मेरे बेटे) कहकर पुकारा, जो मुहब्बत और नर्मी का अंदाज़ है। यह सिखाता है कि नसीहत और दावत में नर्मी और प्यार होना चाहिए, ताकि लोग क़बूल करें।
- अल्लाह की क़ुदरत: पहाड़ जैसी लहरों का वर्णन अल्लाह की अज़ीम क़ुदरत को दिखाता है। यह हमें याद दिलाता है कि अल्लाह हर चीज़ पर क़ादिर है, और उसके आगे हमें झुकना चाहिए और उसी पर भरोसा करना चाहिए।
📜 आयत 40-44 — सूरा हूद
अनुवाद — हूद 42
सूरा हूद आयत 42 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और कश्ती है कि पहाड़ों की सी (ऊँची) लहरों में…सूरा आयत 42/123 — सूरा हूद هود (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा हूद सुनें, सूरा हूद अनुवाद, सूरा हूद mp3, सूरा हूद pdf. आयत 40–44. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा हूद
पवित्र क़ुरआन
Sunday, October 4, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


