हूद · 42/123
अनुवाद उच्चारण — हूद
وَهِيَ تَجْرِي بِهِمْ فِي مَوْجٍ كَالْجِبَالِ وَنَادَىٰ نُوحٌ ابْنَهُ وَكَانَ فِي مَعْزِلٍ يَا بُنَيَّ ارْكَب مَّعَنَا وَلَا تَكُن مَّعَ الْكَافِرِينَ ۝٤٢
Wa hiya tajree bihim fee mawjin kaljibaali wa naadaa Noohunib nahoo wa kaana fee ma`ziliny yaa bunai yarkam ma`anaa wa laa takum ma`al kaafireen
📖 हिंदी अर्थ
और कश्ती है कि पहाड़ों की सी (ऊँची) लहरों में उन लोगों को लिए हुए चली जा रही है और नूह ने अपने बेटे को जो उनसे अलग थलग एक गोशे (कोने) में था आवाज़ दी ऐ मेरे फरज़न्द हमारी कश्ती में सवार हो लो और काफिरों के साथ न रह
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مَوْجٍ: पानी की ऊँची लहरें जो उठती और गिरती हैं।
  • كَالْجِبَالِ: पहाड़ों जैसी ऊँची और विशाल।
  • مَعْزِلٍ: अलग हुआ स्थान, जहाँ वह अपने पिता और ईमानवालों से दूर खड़ा था।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब अल्लाह का आदेश आया और पानी ज़मीन से उबलने लगा, तो नूह (अलैहिस्सलाम) की कश्ती उन्हें लेकर चल पड़ी। वह कश्ती समुद्र की उन विशाल लहरों के बीच चल रही थी जो पहाड़ों जैसी ऊँची थीं। यह दृश्य अत्यंत भयावह था, और हर ओर तबाही का साम्राज्य था।

इसी भयानक स्थिति में नूह (अलैहिस्सलाम) ने अपने बेटे को पुकारा, जो उनसे अलग एक जगह खड़ा था और काफ़िरों के साथ था। पिता का दिल बेटे के लिए धड़क उठा, और उन्होंने पुकारकर कहा: "मेरे प्यारे बेटे! हमारे साथ कश्ती में सवार हो जाओ, ताकि तुम इस तूफ़ान से बच जाओ। काफ़िरों के साथ मत रहो, वरना तुम भी उन्हीं की तरह डूबकर हलाक हो जाओगे।"

यह पुकार नूह (अलैहिस्सलाम) की ओर से पुत्र के प्रति प्रेम और दया का प्रतीक थी, क्योंकि वे नहीं चाहते थे कि उनका बेटा अल्लाह के अज़ाब में गिरकर नष्ट हो जाए। उन्होंने उसे नेक रास्ता दिखाया और उसे ईमानवालों के साथ जुड़ने की सलाह दी, ताकि वह सुरक्षित रह सके।

फ़ायदे और सबक:

  1. पैग़म्बरों की शफ़्क़त और रहमत: नूह (अलैहिस्सलाम) ने अपने बेटे को, जो काफ़िर था, फिर भी प्यार और दया से पुकारा और उसे बचाने की कोशिश की। यह सिखाता है कि हमें अपने रिश्तेदारों और अज़ीज़ों को, चाहे वे गलत रास्ते पर हों, प्यार और नसीहत के साथ सही रास्ते की ओर बुलाना चाहिए।
  2. ईमान ही नजात का ज़रिया है: कश्ती में सवार होना ईमान और नेक अमल की मिसाल है। जो लोग अल्लाह पर ईमान लाए और अपने नबी के साथ जुड़े, वे बच गए; जो काफ़िर रहे, वे डूब गए। यह बताता है कि दुनिया और आख़िरत की कामयाबी सिर्फ़ ईमान और अल्लाह की इताअत में है।
  3. ख़तरे से बचने का ज़रिया: जब अल्लाह का अज़ाब आता है, तो कोई रिश्ता, दौलत या मक़ाम काम नहीं आता। सिर्फ़ अल्लाह की रहमत और उसके हुक्म की पैरवी ही नजात दिलाती है। इसलिए हमें हमेशा अल्लाह के हुक्मों को मानना चाहिए और गुनाहों से बचना चाहिए।
  4. पैग़म्बरों की दावत का अंदाज़: नूह (अलैहिस्सलाम) ने अपने बेटे को "يَا بُنَيَّ" (मेरे बेटे) कहकर पुकारा, जो मुहब्बत और नर्मी का अंदाज़ है। यह सिखाता है कि नसीहत और दावत में नर्मी और प्यार होना चाहिए, ताकि लोग क़बूल करें।
  5. अल्लाह की क़ुदरत: पहाड़ जैसी लहरों का वर्णन अल्लाह की अज़ीम क़ुदरत को दिखाता है। यह हमें याद दिलाता है कि अल्लाह हर चीज़ पर क़ादिर है, और उसके आगे हमें झुकना चाहिए और उसी पर भरोसा करना चाहिए।
🎧 सुनें

📜 आयत 40-44 — हूद

40حَتَّىٰ إِذَا جَاءَ أَمْرُنَا وَفَارَ التَّنُّورُ قُلْنَا احْمِلْ فِيهَا مِن كُلٍّ زَوْجَيْنِ اثْنَيْنِ وَأَهْلَكَ إِلَّا مَن سَبَقَ عَلَيْهِ الْقَوْلُ وَمَنْ آمَنَ ۚ وَمَا آمَنَ مَعَهُ إِلَّا قَلِيلٌ
यहाँ तक कि जब हमारा हुक्म (अज़ाब) आ पहुँचा और तन्नूर से जोश मारने लगा तो हमने हुक्म दिया (ऐ नूह) हर किस्म के जानदारों में से (नर मादा का) जोड़ा (यानि) दो दो ले लो और जिस (की) हलाकत (तबाही) का हुक्म पहले ही हो चुका हो उसके सिवा अपने सब घर वाले और जो लोग ईमान ला चुके उन सबको कश्ती (नाँव) में बैठा लो और उनके साथ ईमान भी थोड़े ही लोग लाए थे
41۞ وَقَالَ ارْكَبُوا فِيهَا بِسْمِ اللَّهِ مَجْرَاهَا وَمُرْسَاهَا ۚ إِنَّ رَبِّي لَغَفُورٌ رَّحِيمٌ
और नूह ने (अपने साथियों से) कहा बिस्मिल्ला मज़रीहा मुरसाहा (ख़ुदा ही के नाम से उसका बहाओ और ठहराओ है) कश्ती में सवार हो जाओ बेशक मेरा परवरदिगार बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
42وَهِيَ تَجْرِي بِهِمْ فِي مَوْجٍ كَالْجِبَالِ وَنَادَىٰ نُوحٌ ابْنَهُ وَكَانَ فِي مَعْزِلٍ يَا بُنَيَّ ارْكَب مَّعَنَا وَلَا تَكُن مَّعَ الْكَافِرِينَ
और कश्ती है कि पहाड़ों की सी (ऊँची) लहरों में उन लोगों को लिए हुए चली जा रही है और नूह ने अपने बेटे को जो उनसे अलग थलग एक गोशे (कोने) में था आवाज़ दी ऐ मेरे फरज़न्द हमारी कश्ती में सवार हो लो और काफिरों के साथ न रह
43قَالَ سَآوِي إِلَىٰ جَبَلٍ يَعْصِمُنِي مِنَ الْمَاءِ ۚ قَالَ لَا عَاصِمَ الْيَوْمَ مِنْ أَمْرِ اللَّهِ إِلَّا مَن رَّحِمَ ۚ وَحَالَ بَيْنَهُمَا الْمَوْجُ فَكَانَ مِنَ الْمُغْرَقِينَ
(मुझे माफ कीजिए) मै तो अभी किसी पहाड़ का सहारा पकड़ता हूँ जो मुझे पानी (में डूबने) से बचा लेगा नूह ने (उससे) कहा (अरे कम्बख्त) आज ख़ुदा के अज़ाब से कोई बचाने वाला नहीं मगर ख़ुदा ही जिस पर रहम फरमाएगा और (ये बात हो रही थी कि) यकायक दोनो बाप बेटे के दरमियान एक मौज हाएल हो गई और वह डूब कर रह गया
44وَقِيلَ يَا أَرْضُ ابْلَعِي مَاءَكِ وَيَا سَمَاءُ أَقْلِعِي وَغِيضَ الْمَاءُ وَقُضِيَ الْأَمْرُ وَاسْتَوَتْ عَلَى الْجُودِيِّ ۖ وَقِيلَ بُعْدًا لِّلْقَوْمِ الظَّالِمِينَ
और (ग़ैब ख़ुदा की तरफ से) हुक्म दिया गया कि ऐ ज़मीन अपना पानी जज्ब (शोख) करे और ऐ आसमान (बरसने से) थम जा और पानी घट गया और (लोगों का) काम तमाम कर दिया गया और कश्ती जो वही (पहाड़) पर जा ठहरी और (चारो तरफ) पुकार दिया गया कि ज़ालिम लोगों को (ख़ुदा की रहमत से) दूरी हो
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अनुवाद — हूद 42

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सूरा आयत 42/123 — हूद هود (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: हूद सुनें, हूद अनुवाद, हूद mp3, हूद pdf. आयत 40–44. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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