Wa qaalar kaboo feehaa bismil laahi majraihaa wa mursaahaa; inna Rabbee la Ghafoorur Raheem
📖 अनुवाद (हिंदी अर्थ)
📖 हिंदी अर्थ
और नूह ने (अपने साथियों से) कहा बिस्मिल्ला मज़रीहा मुरसाहा (ख़ुदा ही के नाम से उसका बहाओ और ठहराओ है) कश्ती में सवार हो जाओ बेशक मेरा परवरदिगार बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
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(نوح نے) کہا کہ خدا کا نام لے کر (کہ اسی کے ہاتھ میں اس کا) چلنا اور ٹھہرنا (ہے) اس میں سوار ہوجاؤ۔ بےشک میرا پروردگار بخشنے والا مہربان ہے
जब पानी का सैलाब आ गया और धरती पर हर ओर पानी ही पानी हो गया, तो नूह (अलैहिस्सलाम) ने अपने ईमानवाले साथियों से कहा: "इस नाव में सवार हो जाओ।" उन्होंने उन्हें यह भी सिखाया कि इस सवारी का आरंभ और अंत, दोनों अल्लाह ही के नाम से होगा। अर्थात् जब नाव चलेगी तो अल्लाह के नाम से चलेगी, और जब रुकेगी तो भी अल्लाह ही के नाम से रुकेगी। यह सिखाना इसलिए था कि वे अपने दिलों में अल्लाह का भरोसा रखें और उसी से मदद माँगें, क्योंकि नाव को चलाने और रोकने वाला वास्तव में अल्लाह ही है। फिर नूह (अलैहिस्सलाम) ने अपने साथियों को यह खुशखबरी दी कि उनका रब बहुत क्षमाशील और अत्यंत दयावान है। उसकी क्षमा उन लोगों के लिए है जो अपने गुनाहों से तौबा करके उसकी ओर लौटते हैं, और उसकी दया का यह प्रत्यक्ष प्रमाण है कि उसने अपने ईमानवाले बंदों को इस भयानक तूफान से बचाकर नाव में सवार होने का मार्ग दिखाया।
फ़ायदे (शिक्षाएँ):
हर काम की शुरुआत "बिस्मिल्लाह" से करनी चाहिए, चाहे वह छोटा हो या बड़ा। इससे काम में बरकत होती है और अल्लाह की मदद मिलती है।
मुसीबत के समय अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए और उसी से मदद माँगनी चाहिए। नूह (अलैहिस्सलाम) ने सिखाया कि सबसे बड़ी मुसीबत में भी अल्लाह का नाम लेना ही सुरक्षा का ज़रिया है।
अल्लाह की क्षमा और दया बहुत व्यापक है। जो भी सच्चे दिल से तौबा करके उसकी ओर लौटता है, अल्लाह उसे माफ कर देता है और अपनी रहमत से नवाज़ता है।
मुसीबत से निजात पाने के बाद अल्लाह की नेमतों को याद करना और उसका शुक्र अदा करना चाहिए, जैसा कि नूह (अलैहिस्सलाम) ने अपने साथियों को अल्लाह की रहमत की याद दिलाई।
यह आयत हमें सिखाती है कि सफर हो या कोई और काम, उसकी शुरुआत और अंत दोनों अल्लाह के नाम से होने चाहिए, ताकि हर काम में अल्लाह की रक्षा और सहायता हासिल हो।
और नूह ने (अपने साथियों से) कहा बिस्मिल्ला मज़रीहा मुरसाहा (ख़ुदा ही के नाम से उसका बहाओ और ठहराओ है) कश्ती में सवार हो जाओ बेशक मेरा परवरदिगार बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
यहाँ तक कि जब हमारा हुक्म (अज़ाब) आ पहुँचा और तन्नूर से जोश मारने लगा तो हमने हुक्म दिया (ऐ नूह) हर किस्म के जानदारों में से (नर मादा का) जोड़ा (यानि) दो दो ले लो और जिस (की) हलाकत (तबाही) का हुक्म पहले ही हो चुका हो उसके सिवा अपने सब घर वाले और जो लोग ईमान ला चुके उन सबको कश्ती (नाँव) में बैठा लो और उनके साथ ईमान भी थोड़े ही लोग लाए थे
और नूह ने (अपने साथियों से) कहा बिस्मिल्ला मज़रीहा मुरसाहा (ख़ुदा ही के नाम से उसका बहाओ और ठहराओ है) कश्ती में सवार हो जाओ बेशक मेरा परवरदिगार बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
और कश्ती है कि पहाड़ों की सी (ऊँची) लहरों में उन लोगों को लिए हुए चली जा रही है और नूह ने अपने बेटे को जो उनसे अलग थलग एक गोशे (कोने) में था आवाज़ दी ऐ मेरे फरज़न्द हमारी कश्ती में सवार हो लो और काफिरों के साथ न रह
(मुझे माफ कीजिए) मै तो अभी किसी पहाड़ का सहारा पकड़ता हूँ जो मुझे पानी (में डूबने) से बचा लेगा नूह ने (उससे) कहा (अरे कम्बख्त) आज ख़ुदा के अज़ाब से कोई बचाने वाला नहीं मगर ख़ुदा ही जिस पर रहम फरमाएगा और (ये बात हो रही थी कि) यकायक दोनो बाप बेटे के दरमियान एक मौज हाएल हो गई और वह डूब कर रह गया
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