हूद · 43/123
अनुवाद उच्चारण — हूद
قَالَ سَآوِي إِلَىٰ جَبَلٍ يَعْصِمُنِي مِنَ الْمَاءِ ۚ قَالَ لَا عَاصِمَ الْيَوْمَ مِنْ أَمْرِ اللَّهِ إِلَّا مَن رَّحِمَ ۚ وَحَالَ بَيْنَهُمَا الْمَوْجُ فَكَانَ مِنَ الْمُغْرَقِينَ ۝٤٣
Qaala sa aaweee ilaa jabaliny ya`simunee minal maaa`; qaala laa `aasimal yawma min amril laahi illaa mar rahim; wa haala bainahumal mawju fakaana minal mughraqeen
📖 हिंदी अर्थ
(मुझे माफ कीजिए) मै तो अभी किसी पहाड़ का सहारा पकड़ता हूँ जो मुझे पानी (में डूबने) से बचा लेगा नूह ने (उससे) कहा (अरे कम्बख्त) आज ख़ुदा के अज़ाब से कोई बचाने वाला नहीं मगर ख़ुदा ही जिस पर रहम फरमाएगा और (ये बात हो रही थी कि) यकायक दोनो बाप बेटे के दरमियान एक मौज हाएल हो गई और वह डूब कर रह गया
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • سَآوِي: मैं शरण लूँगा, मैं जाऊँगा और ठहरूँगा।
  • يَعْصِمُنِي: मुझे बचाएगा, मुझे सुरक्षा देगा।
  • عَاصِمَ: बचाने वाला, रक्षा करने वाला।
  • حَالَ: आड़ बन गया, बीच में आ गया।
  • الْمَوْجُ: ऊँची लहर, पानी का तूफ़ानी उफान।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब नूह (अलैहिस्सलाम) ने अपने बेटे को सवार होने का आग्रह किया, तो उसने अहंकार और झूठे भरोसे के साथ उत्तर दिया: "मैं किसी ऊँचे पहाड़ की ओर शरण ले जाऊँगा, जो मुझे पानी से बचा लेगा।" उसे अपनी बुद्धि और सांसारिक साधनों पर घमंड था, और उसने यह नहीं सोचा कि अल्लाह का आदेश सभी साधनों से ऊपर है।

नूह (अलैहिस्सलाम) ने उसे सचेत करते हुए कहा: "आज अल्लाह के आदेश (उसकी यातना) से कोई बचाने वाला नहीं है, सिवाय उसके जिस पर अल्लाह स्वयं रहम करे।" यानी आज न कोई पहाड़, न कोई किला, न कोई ताकत — कुछ भी अल्लाह की पकड़ से नहीं बचा सकता। बचाव केवल अल्लाह की रहमत से है, जो वह जिसे चाहे प्रदान करे। यह नूह (अलैहिस्सलाम) की ओर से अपने बेटे के लिए आख़िरी दावत थी, लेकिन उसने इसे नहीं माना।

फिर अल्लाह की क़ुदरत का मंज़र सामने आया — एक ऊँची और भयानक लहर उठी और नूह (अलैहिस्सलाम) और उसके बेटे के बीच आड़ बन गई। वह पहाड़ की ओर भागा, लेकिन पहाड़ उसे न बचा सका, और वह डूबने वालों में शामिल हो गया। उसका झूठा भरोसा और अहंकार उसके काम न आया।

फ़ायदे (सबक़ और नसीहतें):

  1. अल्लाह के आदेश के आगे हर साधन बेकार है — चाहे पहाड़ जैसी ठोस चीज़ ही क्यों न हो। सच्ची पनाह केवल अल्लाह की रहमत में है।
  2. अहंकार और अपनी बुद्धि पर भरोसा इंसान को हलाकत की ओर ले जाता है — नूह के बेटे ने अपनी समझ को नबी की नसीहत पर तरजीह दी, और यही उसकी तबाही का कारण बना।
  3. नबियों की दावत में नरमी और हिदायत का पैग़ाम होता है — नूह (अलैहिस्सलाम) ने अपने बेटे को आख़िरी लम्हे तक समझाने की कोशिश की, जो दावत के अंदाज़ की मिसाल है।
  4. अल्लाह की रहमत ही सबसे बड़ी नेमत है — जिसे अल्लाह रहम कर दे, उसे कोई तबाह नहीं कर सकता, और जिस पर रहम न हो, उसे कोई नहीं बचा सकता।
  5. रिश्तेदारी और नस्ल अल्लाह के हुक्म के सामने कोई वज़न नहीं रखती — नूह का बेटा नबी का बेटा होते हुए भी कुफ़्र की वजह से हलाक हुआ। यह बताता है कि नजात का ज़रिया ईमान है, न कि ख़ानदान।
  6. इंसान को अपने साधनों पर नहीं, बल्कि अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए — साधन अल्लाह के हुक्म से ही काम करते हैं, और जब अल्लाह चाहता है, वे नाकाम हो जाते हैं।
🎧 सुनें

📜 आयत 41-45 — हूद

41۞ وَقَالَ ارْكَبُوا فِيهَا بِسْمِ اللَّهِ مَجْرَاهَا وَمُرْسَاهَا ۚ إِنَّ رَبِّي لَغَفُورٌ رَّحِيمٌ
और नूह ने (अपने साथियों से) कहा बिस्मिल्ला मज़रीहा मुरसाहा (ख़ुदा ही के नाम से उसका बहाओ और ठहराओ है) कश्ती में सवार हो जाओ बेशक मेरा परवरदिगार बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
42وَهِيَ تَجْرِي بِهِمْ فِي مَوْجٍ كَالْجِبَالِ وَنَادَىٰ نُوحٌ ابْنَهُ وَكَانَ فِي مَعْزِلٍ يَا بُنَيَّ ارْكَب مَّعَنَا وَلَا تَكُن مَّعَ الْكَافِرِينَ
और कश्ती है कि पहाड़ों की सी (ऊँची) लहरों में उन लोगों को लिए हुए चली जा रही है और नूह ने अपने बेटे को जो उनसे अलग थलग एक गोशे (कोने) में था आवाज़ दी ऐ मेरे फरज़न्द हमारी कश्ती में सवार हो लो और काफिरों के साथ न रह
43قَالَ سَآوِي إِلَىٰ جَبَلٍ يَعْصِمُنِي مِنَ الْمَاءِ ۚ قَالَ لَا عَاصِمَ الْيَوْمَ مِنْ أَمْرِ اللَّهِ إِلَّا مَن رَّحِمَ ۚ وَحَالَ بَيْنَهُمَا الْمَوْجُ فَكَانَ مِنَ الْمُغْرَقِينَ
(मुझे माफ कीजिए) मै तो अभी किसी पहाड़ का सहारा पकड़ता हूँ जो मुझे पानी (में डूबने) से बचा लेगा नूह ने (उससे) कहा (अरे कम्बख्त) आज ख़ुदा के अज़ाब से कोई बचाने वाला नहीं मगर ख़ुदा ही जिस पर रहम फरमाएगा और (ये बात हो रही थी कि) यकायक दोनो बाप बेटे के दरमियान एक मौज हाएल हो गई और वह डूब कर रह गया
44وَقِيلَ يَا أَرْضُ ابْلَعِي مَاءَكِ وَيَا سَمَاءُ أَقْلِعِي وَغِيضَ الْمَاءُ وَقُضِيَ الْأَمْرُ وَاسْتَوَتْ عَلَى الْجُودِيِّ ۖ وَقِيلَ بُعْدًا لِّلْقَوْمِ الظَّالِمِينَ
और (ग़ैब ख़ुदा की तरफ से) हुक्म दिया गया कि ऐ ज़मीन अपना पानी जज्ब (शोख) करे और ऐ आसमान (बरसने से) थम जा और पानी घट गया और (लोगों का) काम तमाम कर दिया गया और कश्ती जो वही (पहाड़) पर जा ठहरी और (चारो तरफ) पुकार दिया गया कि ज़ालिम लोगों को (ख़ुदा की रहमत से) दूरी हो
45وَنَادَىٰ نُوحٌ رَّبَّهُ فَقَالَ رَبِّ إِنَّ ابْنِي مِنْ أَهْلِي وَإِنَّ وَعْدَكَ الْحَقُّ وَأَنتَ أَحْكَمُ الْحَاكِمِينَ
और (जिस वक्त नूह का बेटा ग़रक (डूब) हो रहा था तो नूह ने अपने परवरदिगार को पुकारा और अर्ज़ की ऐ मेरे परवरदिगार इसमें तो शक़ नहीं कि मेरा बेटा मेरे अहल (घर वालों) में शामिल है और तूने वायदा किया था कि तेरे अहल को बचा लूँगा) और इसमें शक़ नहीं कि तेरा वायदा सच्चा है और तू सारे (जहान) के हाकिमों से बड़ा हाकिम है
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अनुवाद — हूद 43

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सूरा आयत 43/123 — हूद هود (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: हूद सुनें, हूद अनुवाद, हूद mp3, हूद pdf. आयत 41–45. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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