अन-नस्र · 2/3
अनुवाद उच्चारण — अन-नस्र
وَرَأَيْتَ النَّاسَ يَدْخُلُونَ فِي دِينِ اللَّهِ أَفْوَاجًا ۝٢
Wa ra-aitan naasa yadkhuloona fee deenil laahi afwajah
📖 हिंदी अर्थ
और फतेह (मक्का) हो जाएगी और तुम लोगों को देखोगे कि गोल के गोल ख़ुदा के दीन में दाख़िल हो रहे हैं
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَدْخُلُونَ فِي دِينِ اللهِ: अल्लाह के दीन (इस्लाम) में प्रवेश करना।
  • أَفْوَاجًا: समूहों के रूप में, जत्थे-दर-जत्थे, एक के बाद एक।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ को वह दृश्य दिखा रहा है जो फ़तह-ए-मक्का (मक्का की विजय) के बाद सामने आया। जब मक्का फ़तह हुआ और कुरैश के सरदारों ने इस्लाम क़बूल किया, तो आस-पास के क़बीलों और दूर-दूर के लोगों पर इसका गहरा असर पड़ा। लोगों ने देखा कि जिस दीन (धर्म) को ये लोग सालों से रोक रहे थे, वह अब खुलेआम फैल रहा है। नतीजा यह हुआ कि लोग अकेले-अकेले नहीं, बल्कि पूरे क़बीले, पूरे समूह, और जत्थे-दर-जत्थे इस्लाम में दाख़िल होने लगे। यह वह मंज़र था जिसे अल्लाह ने अपने रसूल ﷺ को दिखाया—लोगों के दिल खुल गए, और वे फ़ौज दर फ़ौज अल्लाह के दीन में शामिल होने लगे।

यह आयत हमें सिखाती है कि जब सच्चाई सामने आती है और लोग उसे देख लेते हैं, तो उसे रोकना नामुमकिन हो जाता है। इस्लाम का नूर (प्रकाश) फैलता ही गया, और यह अल्लाह की मदद का नतीजा था। यह भी बताती है कि दीन की फ़तह (विजय) अल्लाह की तरफ़ से होती है, और जब वह फ़तह आती है तो लोगों के दिल बदल जाते हैं।

दावती पहलू (प्रचारात्मक संदेश):

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि इस्लाम की तरक़्क़ी किसी इंसानी ताक़त से नहीं, बल्कि अल्लाह की मदद से होती है। जब हम सच्चे दिल से अल्लाह के दीन पर चलते हैं, तो अल्लाह खुद उसके फैलाव का ज़रिया बनता है। यह आयत हमें बताती है कि इस्लाम वह दीन है जो दिलों को जोड़ता है, और जब लोग इसकी सच्चाई देख लेते हैं, तो वे खुद खिंचे-चले आते हैं। आज भी जब हम अपने अच्छे अख़लाक़ (चरित्र), सच्चाई, और अल्लाह के हुक्मों पर अमल करते हैं, तो लोग अपने आप हमारी तरफ़ रुख करते हैं। यही इस्लाम की असली ताक़त है—कि यह दिलों पर राज करता है, और इसकी रौशनी कभी मद्धम नहीं पड़ती। हमें चाहिए कि हम इस दीन को अपनी ज़िंदगी में उतारें, ताकि दूसरे लोग भी इसकी खूबसूरती देखकर इसकी तरफ़ आएँ, जैसे उस ज़माने में लोग जत्थे-दर-जत्थे आए थे।

🎧 सुनें

📜 आयत 1-3 — अन-नस्र

1إِذَا جَاءَ نَصْرُ اللَّهِ وَالْفَتْحُ
ऐ रसूल जब ख़ुदा की मदद आ पहँचेगी
2وَرَأَيْتَ النَّاسَ يَدْخُلُونَ فِي دِينِ اللَّهِ أَفْوَاجًا
और फतेह (मक्का) हो जाएगी और तुम लोगों को देखोगे कि गोल के गोल ख़ुदा के दीन में दाख़िल हो रहे हैं
3فَسَبِّحْ بِحَمْدِ رَبِّكَ وَاسْتَغْفِرْهُ ۚ إِنَّهُ كَانَ تَوَّابًا
तो तुम अपने परवरदिगार की तारीफ़ के साथ तसबीह करना और उसी से मग़फेरत की दुआ माँगना वह बेशक बड़ा माफ़ करने वाला है
अन-नस्रकुरान सूची
3आयत
मदनीRevelation
2आयत

अनुवाद — अन-नस्र 2

सूरा अन-नस्र आयत 2 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और फतेह (मक्का) हो जाएगी और तुम लोगों को देखोगे…

सूरा आयत 2/3 — अन-नस्र النصر (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-नस्र सुनें, अन-नस्र अनुवाद, अन-नस्र mp3, अन-नस्र pdf. आयत 1–3. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए