अन-नस्र · 3/3
अनुवाद उच्चारण — अन-नस्र
فَسَبِّحْ بِحَمْدِ رَبِّكَ وَاسْتَغْفِرْهُ ۚ إِنَّهُ كَانَ تَوَّابًا ۝٣
Fa sab bih bihamdi rabbika was taghfir, innahu kaana tawwaaba
📖 हिंदी अर्थ
तो तुम अपने परवरदिगार की तारीफ़ के साथ तसबीह करना और उसी से मग़फेरत की दुआ माँगना वह बेशक बड़ा माफ़ करने वाला है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَسَبِّحْ: तस्बीह करो, यानी अल्लाह की पाकी बयान करो।
  • بِحَمْدِ رَبِّكَ: अपने रब की हम्द (प्रशंसा) के साथ।
  • وَاسْتَغْفِرْهُ: और उससे माफ़ी माँगो।
  • تَوَّابًا: बहुत अधिक तौबा क़बूल करने वाला।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब अल्लाह तआला ने अपने नबी ﷺ को फ़तह (विजय) और नुसरत (मदद) अता की, और लोगों को दीन-ए-इस्लाम में दस्ता-दर-दस्ता (समूहों में) शामिल होते देखा, तो यह उस बड़ी कामयाबी की निशानी थी जिसका वादा अल्लाह ने किया था। इसी मौके पर अल्लाह तआला ने अपने हबीब ﷺ को हिदायत दी कि इस नेअमत (अनुग्रह) का शुक्रिया अदा करने के लिए अपने रब की तस्बीह करो, उसकी हम्द और प्रशंसा बयान करो, और उससे माफ़ी की दरख्वास्त करते रहो।

यह आदेश दरअसल एक इशारा था कि अब आपकी दुनियावी ज़िंदगी का सफ़र पूरा होने वाला है, और आपको अपने रब से मुलाक़ात के लिए तैयारी करनी है। जिस तरह नमाज़ और हज जैसी इबादतों को इसतिग़फ़ार (माफ़ी माँगने) पर ख़त्म किया जाता है, उसी तरह आपकी ज़िंदगी का आख़िरी दौर भी तस्बीह, हम्द और इसतिग़फ़ार से मुकम्मल होना चाहिए।

अल्लाह तआला फ़रमाता है कि वह तो تَوَّابًا है — यानी बहुत ज़्यादा तौबा क़बूल करने वाला है। वह अपने बंदों की तौबा को क़बूल करता है, उनकी ग़लतियों को माफ़ करता है, और उन पर रहमत की नज़र डालता है। जो बंदा उसकी तरफ़ रुजू करता है, अल्लाह उससे मुहब्बत करता है और उसे माफ़ कर देता है।


दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):

इस आयत से हमें एक बहुत बड़ा सबक मिलता है — कामयाबी और फ़तह के वक़्त भी हमें अल्लाह का शुक्रिया अदा करना चाहिए और उससे माफ़ी माँगनी चाहिए। इंसान जब कामयाब होता है तो अक्सर घमंड में आ जाता है, लेकिन इस आयत में हमें सिखाया गया है कि हर नेअमत के बाद अल्लाह का शुक्र अदा करो और अपनी कमियों की माफ़ी माँगो। अल्लाह तआला बहुत मेहरबान है — वह चाहता है कि उसके बंदे उसकी तरफ़ रुजू करें, और वह उनकी तौबा को क़बूल करके उन्हें अपनी रहमत से नवाज़े। यह अल्लाह की सबसे बड़ी मेहरबानी है कि उसने तौबा का दरवाज़ा हमेशा खुला रखा है — चाहे हम कितनी ही ग़लतियाँ कर लें, बशर्ते हम सच्चे दिल से तौबा करें, अल्लाह हमें माफ़ कर देता है और हमारी ग़लतियों को नेकियों में बदल देता है।



📜 आयत 1-3 — अन-नस्र

1إِذَا جَاءَ نَصْرُ اللَّهِ وَالْفَتْحُ
ऐ रसूल जब ख़ुदा की मदद आ पहँचेगी
2وَرَأَيْتَ النَّاسَ يَدْخُلُونَ فِي دِينِ اللَّهِ أَفْوَاجًا
और फतेह (मक्का) हो जाएगी और तुम लोगों को देखोगे कि गोल के गोल ख़ुदा के दीन में दाख़िल हो रहे हैं
3فَسَبِّحْ بِحَمْدِ رَبِّكَ وَاسْتَغْفِرْهُ ۚ إِنَّهُ كَانَ تَوَّابًا
तो तुम अपने परवरदिगार की तारीफ़ के साथ तसबीह करना और उसी से मग़फेरत की दुआ माँगना वह बेशक बड़ा माफ़ करने वाला है
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अनुवाद — अन-नस्र 3

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Tuesday, August 18, 2026

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