Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- निस्वतुन (نسوة): औरतें, महिलाएँ।
- अल-अज़ीज़ (العزيز): मिस्र के शासक का प्रधानमंत्री या कोषाध्यक्ष, जिसके घर में यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) रहते थे।
- तुराविदु (تراود): अपनी ओर बुलाना, बुरे इरादे से फुसलाना।
- फ़ताहा (فتاها): उसका युवा ग़ुलाम (यूसुफ़ अलैहिस्सलाम)।
- शग़फ़हा (شغفها): उसके दिल के ग़िलाफ़ (आवरण) तक पहुँच गया, यानी उसके दिल की गहराई में समा गया।
- ज़लालिन मुबीन (ضلال مبين): स्पष्ट गुमराही और खुली भटकन।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) की पाकदामनी और अज़ीज़ की पत्नी (ज़ुलैख़ा) के बुरे इरादे की बात शहर में फैली, तो शहर की कुछ औरतों ने आपस में इस पर चर्चा की और हैरानी व निंदा के साथ कहने लगीं: "अज़ीज़ की पत्नी अपने युवा ग़ुलाम को अपनी तरफ़ बुला रही है और उसे बुरे काम के लिए उकसा रही है। उसका दिल उस युवक की मुहब्बत में इस कदर डूब गया है कि उसका प्यार उसके दिल के सबसे अंदरूनी हिस्से तक पहुँच गया है।" यानी उसका हुस्न और अदा उसके दिल पर इस तरह छा गया कि उसे कुछ समझ नहीं आ रहा। फिर वे औरतें यह कहकर उसकी मज़म्मत करने लगीं: "हम तो उसे इस काम में खुली गुमराही पर देख रही हैं, क्योंकि वह अपने ग़ुलाम की तरफ़ इस तरह खिंची चली जा रही है जो उसके रुतबे और इज़्ज़त के लिए बिल्कुल मुनासिब नहीं।"
यह बात उन्होंने इसलिए कही क्योंकि उन्हें यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) के हुस्न का अंदाज़ा नहीं था और वे ज़ुलैख़ा के इस काम को महज़ उसकी कमज़ोरी और बेवक़ूफ़ी समझ रही थीं, जबकि आगे चलकर जब उन्होंने यूसुफ़ को देखा तो उनकी समझ में आ गया कि यह कोई आम इंसान नहीं बल्कि एक बेहद खूबसूरत और पाक फ़रिश्ता जैसा इंसान है।
फ़ायदे (सबक):
- बुराई की शुरुआत शर्म और निंदा से होती है: जब कोई बुरा काम लोगों में फैलता है तो पहले लोग उस पर निंदा करते हैं, लेकिन अगर उसे रोका न जाए तो धीरे-धीरे वह आम बन जाता है। इसलिए बुराई को शुरू में ही रोकना चाहिए।
- पाकदामनी की अज़मत: यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) की पाकदामनी और अल्लाह के डर ने उन्हें उस मुश्किल घड़ी में महफ़ूज़ रखा। यह हमें सिखाता है कि गुनाह के माहौल में भी अल्लाह की पनाह लेने वाला कभी रुसवा नहीं होता।
- मुहब्बत में इंसान अंधा हो जाता है: जब इंसान किसी चीज़ या इंसान से बेइंतहा मुहब्बत करता है तो वह सही-ग़लत की पहचान खो देता है। इसलिए मुहब्बत में भी हद और अक़्ल का दामन नहीं छोड़ना चाहिए।
- अल्लाह की क़ुदरत: इस घटना से पता चलता है कि अल्लाह किस तरह अपने नेक बंदों को मुसीबत में भी महफ़ूज़ रखता है और उनकी इज़्ज़त बढ़ाता है। यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) की सब्र और तक़्वा ही उनकी कामयाबी का ज़रिया बना।
📜 आयत 28-32 — सूरा यूसुफ
अनुवाद — यूसुफ 30
सूरा यूसुफ आयत 30 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और शहर (मिस्र) में औरतें चर्चा करने लगी कि अज़ीज़…सूरा आयत 30/111 — सूरा यूसुफ يوسف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा यूसुफ सुनें, सूरा यूसुफ अनुवाद, सूरा यूसुफ mp3, सूरा यूसुफ pdf. आयत 28–32. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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