अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- أَعْرِضْ عَنْ هَذَا: इस बात को छोड़ दो, इसका ज़िक्र मत करो।
- وَاسْتَغْفِرِي: अपने गुनाह की माफ़ी माँगो।
- الْخَاطِئِينَ: गुनाहगारों में से, जानबूझकर पाप करने वालों में से।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब यह सच्चाई सामने आ गई कि यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) बेगुनाह हैं और उनकी पत्नी ने ही उन्हें बहकाने की कोशिश की थी, तो उस समय अज़ीज़ (मिस्र के शासक) ने यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) से कहा: "ऐ यूसुफ़! इस मामले को छोड़ दो, इसे किसी के सामने मत लाओ, और इसे भूल जाओ।" फिर वह अपनी पत्नी की ओर मुखातिब हुआ और उससे कहा: "और तू अपने इस गुनाह की माफ़ी माँग, क्योंकि तूने यूसुफ़ को अपनी तरफ़ बुलाकर और उस पर झूठा इल्ज़ाम लगाकर जानबूझकर गुनाह किया है। तू उन लोगों में से है जिन्होंने जानबूझकर पाप किया है।"
इस तरह अज़ीज़ ने इस मामले को दबाने की कोशिश की ताकि उसकी इज़्ज़त पर दाग़ न लगे, और उसने यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) को भी इस बात को फैलाने से रोका और अपनी पत्नी को तौबा करने का हुक्म दिया। यह भी कहा गया है कि यह बात उस गवाह (शाहिद) ने कही थी जो उस समय मौजूद था, और उसने यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) को इस मामले से दूर रहने की सलाह दी और औरत को माफ़ी माँगने को कहा।
फ़ायदे (सीख):
- इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि जब कोई इंसान गुनाह कर बैठे तो उसे तुरंत तौबा और इस्तिग़फ़ार करना चाहिए, क्योंकि अल्लाह तआला माफ़ करने वाला है।
- यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) की पाकदामनी और बेगुनाही का यहाँ ज़िक्र है, जो हमें सिखाती है कि गुनाह से बचने के लिए अल्लाह का ख़ौफ़ दिल में होना चाहिए, चाहे हालात कितने भी मुश्किल क्यों न हों।
- इस आयत में इस बात की तरफ़ इशारा है कि इंसान को अपनी इज़्ज़त की ख़ातिर सच को छिपाना नहीं चाहिए, बल्कि सच्चाई को सामने रखना चाहिए, लेकिन अगर मामला दबाने से फ़साद ख़त्म होता हो तो उसे दबाना भी जायज़ है।
- यहाँ से यह भी सबक़ मिलता है कि जब कोई गुनाह हो जाए तो उसे छिपाने की कोशिश करने के बजाय उससे तौबा करना चाहिए, क्योंकि अल्लाह तआला तौबा करने वालों को बहुत प्यार करता है।
- यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) की सब्र और अल्लाह पर भरोसे की वजह से अल्लाह ने उन्हें बड़ा मक़ाम अता किया, जो हमें सिखाता है कि मुसीबत में सब्र और अल्लाह पर भरोसा ही कामयाबी की कुंजी है।
📜 आयत 27-31 — यूसुफ
अनुवाद — यूसुफ 29
सूरा यूसुफ आयत 29 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (और यूसुफ से कहा) ऐ यूसुफ इसको जाने दो और…सूरा आयत 29/111 — यूसुफ يوسف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: यूसुफ सुनें, यूसुफ अनुवाद, यूसुफ mp3, यूसुफ pdf. आयत 27–31. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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