अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- مَكْرِهِنَّ: उन (औरतों) की चालाकी, चुगली और बुराई।
- أَعْتَدَتْ: तैयार किया, इंतज़ाम किया।
- مُتَّكَأً: वह चीज़ जिस पर टेक लगाकर बैठा जाए, जैसे गद्दे, तकिये और खाने का सामान।
- سِكِّينًا: चाकू (खाना काटने के लिए)।
- أَكْبَرْنَهُ: उसे बहुत बड़ा और अज़ीम समझा, उसकी हैसियत को बहुत ऊँचा पाया।
- قَطَّعْنَ أَيْدِيَهُنَّ: अपने हाथ काट लिए (चाकू से ज़ख़्मी कर लिए)।
- حَاشَ لِلَّهِ: अल्लाह की पाकी है, अल्लाह की पनाह।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब मिस्र के अज़ीज़ (प्रधानमंत्री) की पत्नी (ज़ुलेखा) को उन औरतों की चुगली और मक्कारी का पता चला, जो उस पर इल्ज़ाम लगा रही थीं कि उसने यूसुफ (अलैहिस्सलाम) को बहकाने की कोशिश की है, तो उसने उन्हें बुलाने का फ़ैसला किया। उसने उनके लिए एक शानदार महफ़िल तैयार की, जिसमें टेक लगाने के लिए गद्दे और तकिये रखे, और खाने का सामान रखा। हर एक औरत को एक चाकू दिया ताकि वे खाना काटें। फिर उसने यूसुफ (अलैहिस्सलाम) से कहा: "इनके सामने निकलो।"
जब उन औरतों ने यूसुफ (अलैहिस्सलाम) को देखा, तो उन पर उनका जलवा और हुस्न इस क़दर छा गया कि वे दंग रह गईं। उन्होंने उसे बहुत बड़ा और अज़ीम समझा, और हैरत और दहशत की हालत में वे अपने हाथों को चाकू से काटती चली गईं — उन्हें दर्द का एहसास तक नहीं हुआ। फिर वे बोल उठीं: "अल्लाह की पाकी है! यह कोई इंसान नहीं है। यह तो कोई बड़ा फ़रिश्ता है, जो बहुत ही करीम (मान-सम्मान वाला) है।"
उन्होंने यह इसलिए कहा क्योंकि उन्हें यक़ीन था कि इंसानों में इतना हुस्न और कमाल नहीं हो सकता। वे जानती थीं कि यूसुफ़ इंसान ही हैं, लेकिन उनके जमाल ने उन्हें इस क़दर मुतास्सिर किया कि उन्होंने उसे फ़रिश्ता कह दिया।
फ़ायदे (सबक):
- हुस्न और खूबसूरती अल्लाह की निशानी है, लेकिन यह इम्तिहान भी है। यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) का हुस्न उनके लिए आज़माइश बना, और उन्होंने सब्र और पाकदामनी से उसे पार किया। हमें अपनी खूबसूरती या किसी और की खूबसूरती को गुनाह का ज़रिया नहीं बनाना चाहिए।
- सच्चाई और पाकदामनी की ताक़त: यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) ने जिस तरह बुराई से बचने के लिए अल्लाह की पनाह माँगी, उसका नतीजा यह हुआ कि अल्लाह ने उन्हें इज़्ज़त दी और उनके हुस्न को भी लोगों के लिए हैरत का सबब बनाया, लेकिन वे पाक और बेगुनाह रहे।
- औरतों की चालाकी और मक्कारी से बचना: यह क़िस्सा हमें सिखाता है कि बुरी नीयत और चुगली करने वालों का अंजाम बुरा होता है। जो लोग दूसरों पर इल्ज़ाम लगाते हैं, वे खुद रुसवा होते हैं।
- अल्लाह की पाकी का एहसास: जब इंसान किसी अज़ीम चीज़ को देखता है, तो उसे अल्लाह की क़ुदरत और पाकी याद आती है। हमें हर हाल में अल्लाह की तारीफ़ और तस्बीह करनी चाहिए।
- हुस्न का असर और उससे बचाव: यह आयत बताती है कि हुस्न और जमाल का असर इंसान पर बहुत गहरा होता है, इसलिए हमें अपनी निगाहें नीची रखनी चाहिए और दिल को अल्लाह की याद से जोड़े रखना चाहिए, ताकि हम गुनाह में न पड़ें।
📜 आयत 29-33 — यूसुफ
अनुवाद — यूसुफ 31
सूरा यूसुफ आयत 31 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो जब ज़ुलेख़ा ने उनके ताने सुने तो उस ने…सूरा आयत 31/111 — यूसुफ يوسف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: यूसुफ सुनें, यूसुफ अनुवाद, यूसुफ mp3, यूसुफ pdf. आयत 29–33. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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