यूसुफ · 32/111
अनुवाद उच्चारण — यूसुफ
قَالَتْ فَذَٰلِكُنَّ الَّذِي لُمْتُنَّنِي فِيهِ ۖ وَلَقَدْ رَاوَدتُّهُ عَن نَّفْسِهِ فَاسْتَعْصَمَ ۖ وَلَئِن لَّمْ يَفْعَلْ مَا آمُرُهُ لَيُسْجَنَنَّ وَلَيَكُونًا مِّنَ الصَّاغِرِينَ ۝٣٢
Qaalat fazaalikunnal lazee lumtunnanee feeh; wa laqad raawattuhoo `an nafsihee fasta`sam; wa la`il lam yaf`al maaa aamuruhoo la yusjananna wa la yakoonam minas saaghireen
📖 हिंदी अर्थ
(तब ज़ुलेख़ा उन औरतों से) बोली कि बस ये वही तो है जिसकी बदौलत तुम सब मुझे मलामत (बुरा भला) करती थीं और हाँ बेशक मैं उससे अपना मतलब हासिल करने की खुद उससे आरज़ू मन्द थी मगर ये बचा रहा और जिस काम का मैं हुक्म देती हूँ अगर ये न करेगा तो ज़रुर क़ैद भी किया जाएगा और ज़लील भी होगा (ये सब बातें यूसुफ ने मेरी बारगाह में) अर्ज़ की

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • رَاوَدتّهُ عَن نَّفْسِهِ: उससे दुराचार का प्रस्ताव किया, उसे अपनी इच्छा पूरी करने के लिए बहकाने की कोशिश की।
  • فَاسْتَعْصَمَ: उसने अपने आपको रोक लिया, पवित्र रहा और उस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया।
  • لَيُسْجَنَنَّ: उसे अवश्य जेल में डाला जाएगा।
  • الصَّاغِرِينَ: अपमानित, तिरस्कृत और ज़लील लोग।

तफ़सीर:

जब उन महिलाओं ने यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) का रूप-सौंदर्य देखा और उसकी प्रशंसा में अपने हाथ काट लिए, तो उस समय ज़ुलैख़ा (अज़ीज़ की पत्नी) ने उनसे कहा: "यही वह व्यक्ति है जिसके मोह में पड़ने पर तुम मुझे दोष दे रही थीं। अब तुमने स्वयं उसे देख लिया और तुम पर भी वही बीत गई जो मुझ पर बीता। मैंने उसे अपनी ओर बुलाया और उससे दुराचार का प्रस्ताव किया, लेकिन उसने अपने आपको रोक लिया और साफ़ इनकार कर दिया। उसने पवित्रता और संयम का रास्ता चुना।"

फिर उसने धमकी देते हुए कहा: "यदि उसने वह नहीं किया जो मैं उसे आदेश देती हूँ, तो उसे अवश्य जेल में डाल दिया जाएगा और वह अपमानित और तिरस्कृत लोगों में से हो जाएगा।"

यह कथन उसकी निराशा और क्रोध को दर्शाता है, क्योंकि उसने यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) की पवित्रता और सच्चाई को देख लिया था, फिर भी वह अपनी इच्छा पर अड़ी रही और उसे धमकी दी।

फ़ायदे:

  1. पवित्रता और संयम की महानता: यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) का क़िस्सा हमें सिखाता है कि गुनाह के मौके पर भी अल्लाह का डर और पवित्रता बनाए रखना सबसे बड़ी फ़ज़ीलत है। अल्लाह उन्हें दुनिया और आख़िरत में इज़्ज़त देता है।
  2. बुराई की ओर बुलाने वालों का अंजाम: जो लोग दूसरों को गुनाह की ओर बुलाते हैं और अपनी इच्छाओं को पूरा करने के लिए धमकियाँ देते हैं, उनका अंजाम निराशा और अपमान होता है, जबकि सच्चाई और पवित्रता पर क़ायम रहने वालों को अल्लाह की मदद मिलती है।
  3. धमकी के बावजूद सच्चाई पर डटे रहना: यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) ने जेल की धमकी के बावजूद गुनाह नहीं किया। यह हमें सिखाता है कि दुनिया की किसी भी सज़ा या मुश्किल से डरकर अल्लाह की नाराज़गी को नहीं खरीदना चाहिए।
  4. अल्लाह की मदद का वादा: जो लोग अल्लाह की ख़ातिर अपनी इच्छाओं को दबाते हैं, अल्लाह उन्हें बेहतर बदला देता है और उनकी इज़्ज़त बढ़ाता है। यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) को जेल के बाद मिस्र का ख़ज़ाना मिला, यह अल्लाह की मदद का प्रमाण है।
  5. स्त्री-पुरुष दोनों के लिए नसीहत: यह क़िस्सा स्त्री और पुरुष दोनों के लिए है कि वे अपनी नज़रें नीची रखें, अपने दिल को पाक रखें और अल्लाह की नाराज़गी से बचें। पवित्रता ही सबसे बड़ी सुंदरता है।


📜 आयत 30-34 — यूसुफ

30۞ وَقَالَ نِسْوَةٌ فِي الْمَدِينَةِ امْرَأَتُ الْعَزِيزِ تُرَاوِدُ فَتَاهَا عَن نَّفْسِهِ ۖ قَدْ شَغَفَهَا حُبًّا ۖ إِنَّا لَنَرَاهَا فِي ضَلَالٍ مُّبِينٍ
और शहर (मिस्र) में औरतें चर्चा करने लगी कि अज़ीज़ (मिस्र) की बीबी अपने ग़ुलाम से (नाजायज़) मतलब हासिल करने की आरज़ू मन्द है बेशक गुलाम ने उसे उलफत में लुभाया है हम लोग तो यक़ीनन उसे सरीही ग़लती में मुब्तिला देखते हैं
31فَلَمَّا سَمِعَتْ بِمَكْرِهِنَّ أَرْسَلَتْ إِلَيْهِنَّ وَأَعْتَدَتْ لَهُنَّ مُتَّكَأً وَآتَتْ كُلَّ وَاحِدَةٍ مِّنْهُنَّ سِكِّينًا وَقَالَتِ اخْرُجْ عَلَيْهِنَّ ۖ فَلَمَّا رَأَيْنَهُ أَكْبَرْنَهُ وَقَطَّعْنَ أَيْدِيَهُنَّ وَقُلْنَ حَاشَ لِلَّهِ مَا هَٰذَا بَشَرًا إِنْ هَٰذَا إِلَّا مَلَكٌ كَرِيمٌ
तो जब ज़ुलेख़ा ने उनके ताने सुने तो उस ने उन औरतों को बुला भेजा और उनके लिए एक मजलिस आरास्ता की और उसमें से हर एक के हाथ में एक छुरी और एक (नारंगी) दी (और कह दिया कि जब तुम्हारे सामने आए तो काट के एक फ़ाक उसको दे देना) और यूसुफ़ से कहा कि अब इनके सामने से निकल तो जाओ तो जब उन औरतों ने उसे देखा तो उसके बड़ा हसीन पाया तो सब के सब ने (बे खुदी में) अपने अपने हाथ काट डाले और कहने लगी हाय अल्लाह ये आदमी नहीं है ये तो हो न हो बस एक मुअज़िज़ (इज्ज़त वाला) फ़रिश्ता है
32قَالَتْ فَذَٰلِكُنَّ الَّذِي لُمْتُنَّنِي فِيهِ ۖ وَلَقَدْ رَاوَدتُّهُ عَن نَّفْسِهِ فَاسْتَعْصَمَ ۖ وَلَئِن لَّمْ يَفْعَلْ مَا آمُرُهُ لَيُسْجَنَنَّ وَلَيَكُونًا مِّنَ الصَّاغِرِينَ
(तब ज़ुलेख़ा उन औरतों से) बोली कि बस ये वही तो है जिसकी बदौलत तुम सब मुझे मलामत (बुरा भला) करती थीं और हाँ बेशक मैं उससे अपना मतलब हासिल करने की खुद उससे आरज़ू मन्द थी मगर ये बचा रहा और जिस काम का मैं हुक्म देती हूँ अगर ये न करेगा तो ज़रुर क़ैद भी किया जाएगा और ज़लील भी होगा (ये सब बातें यूसुफ ने मेरी बारगाह में) अर्ज़ की
33قَالَ رَبِّ السِّجْنُ أَحَبُّ إِلَيَّ مِمَّا يَدْعُونَنِي إِلَيْهِ ۖ وَإِلَّا تَصْرِفْ عَنِّي كَيْدَهُنَّ أَصْبُ إِلَيْهِنَّ وَأَكُن مِّنَ الْجَاهِلِينَ
ऐ मेरे पालने वाले जिस बात की ये औरते मुझ से ख्वाहिश रखती हैं उसकी निस्वत (बदले में) मुझे क़ैद ख़ानों ज्यादा पसन्द है और अगर तू इन औरतों के फ़रेब मुझसे दफा न फरमाएगा तो (शायद) मै उनकी तरफ माएल (झुक) हो जाँऊ ले तो जाओ और जाहिलों से शुमार किया जाऊँ
34فَاسْتَجَابَ لَهُ رَبُّهُ فَصَرَفَ عَنْهُ كَيْدَهُنَّ ۚ إِنَّهُ هُوَ السَّمِيعُ الْعَلِيمُ
तो उनके परवरदिगार ने उनकी सुन ली और उन औरतों के मकर को दफा कर दिया इसमें शक़ नहीं कि वह बड़ा सुनने वाला वाक़िफकार है
यूसुफकुरान सूची
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अनुवाद — यूसुफ 32

सूरा यूसुफ आयत 32 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (तब ज़ुलेख़ा उन औरतों से) बोली कि बस ये वही…

सूरा आयत 32/111 — यूसुफ يوسف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: यूसुफ सुनें, यूसुफ अनुवाद, यूसुफ mp3, यूसुफ pdf. आयत 30–34. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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