यूसुफ · 34/111
अनुवाद उच्चारण — सूरा यूसुफ
فَاسْتَجَابَ لَهُ رَبُّهُ فَصَرَفَ عَنْهُ كَيْدَهُنَّ ۚ إِنَّهُ هُوَ السَّمِيعُ الْعَلِيمُ ۝٣٤
Fastajaaba lahoo rabbuhoo fasarafa `anhu kaidahunn; innahoo Huswas_Samee`ul `Aleem
📖 हिंदी अर्थ
तो उनके परवरदिगार ने उनकी सुन ली और उन औरतों के मकर को दफा कर दिया इसमें शक़ नहीं कि वह बड़ा सुनने वाला वाक़िफकार है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَاسْتَجَابَ لَهُ رَبُّهُ: उसके रब ने उसकी प्रार्थना स्वीकार कर ली।
  • فَصَرَفَ عَنْهُ كَيْدَهُنَّ: उन (स्त्रियों) की चालाकी/साजिश को उससे दूर कर दिया।
  • السَّمِيعُ: सब कुछ सुनने वाला।
  • العَلِيمُ: सब कुछ जानने वाला।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब हज़रत यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) ने अपने रब से प्रार्थना की कि वह उन्हें उन स्त्रियों के जाल से बचाए और उनकी चालाकी का शिकार न होने दे, तो अल्लाह ने उनकी यह प्रार्थना स्वीकार कर ली। अल्लाह ने उन स्त्रियों की साजिश और चाल को यूसुफ़ से दूर कर दिया, और उन्हें उस गुनाह से बचा लिया जिसकी ओर वे उन्हें खींच रही थीं। यह अल्लाह की विशेष कृपा और सुरक्षा थी जो उसने अपने नेक बंदे पर की।

निस्संदेह अल्लाह ही है जो सब कुछ सुनने वाला है — वह यूसुफ़ की दुआ को सुनता है और हर उस बंदे की दुआ को सुनता है जो उससे माँगता है। वह सब कुछ जानने वाला है — वह यूसुफ़ की हालत, उनकी ज़रूरत और उनके दिल की पाकीज़गी को जानता है, और वह हर बंदे की हालत और उसके लिए जो बेहतर है उसे भी जानता है। इसलिए उसने यूसुफ़ को उस मुसीबत से निकाला और उन्हें इज़्ज़त और सफलता प्रदान की।

फ़ायदे (सबक):

  1. दुआ की ताक़त: यह आयत हमें सिखाती है कि जब बंदा सच्चे दिल से अल्लाह से दुआ करता है, तो अल्लाह उसकी दुआ ज़रूर सुनता है और उसे मुसीबतों से निकालता है। यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) की दुआ ने उन्हें बड़ी आज़माइश से बचाया।
  2. अल्लाह पर भरोसा: मुसीबत के समय अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए और उसी से मदद माँगनी चाहिए, क्योंकि वही सब कुछ सुनने और जानने वाला है।
  3. गुनाह से बचाव: यह आयत बताती है कि अल्लाह अपने नेक बंदों को गुनाह से बचाता है, बशर्ते वे उसकी ओर रुजू करें और उससे पनाह माँगें।
  4. अल्लाह की कृपा: अल्लाह अपने बंदों पर बहुत मेहरबान है; जब वे उसकी ओर मुड़ते हैं, तो वह उनके लिए रास्ते खोलता है और उन्हें सफलता देता है।
  5. पाकीज़गी का इनाम: जो व्यक्ति अपनी पाकीज़गी और ईमान की हिफ़ाज़त के लिए अल्लाह से दुआ करता है, अल्लाह उसे दुनिया और आख़िरत दोनों में इज़्ज़त देता है।


📜 आयत 32-36 — सूरा यूसुफ

32قَالَتْ فَذَٰلِكُنَّ الَّذِي لُمْتُنَّنِي فِيهِ ۖ وَلَقَدْ رَاوَدتُّهُ عَن نَّفْسِهِ فَاسْتَعْصَمَ ۖ وَلَئِن لَّمْ يَفْعَلْ مَا آمُرُهُ لَيُسْجَنَنَّ وَلَيَكُونًا مِّنَ الصَّاغِرِينَ
(तब ज़ुलेख़ा उन औरतों से) बोली कि बस ये वही तो है जिसकी बदौलत तुम सब मुझे मलामत (बुरा भला) करती थीं और हाँ बेशक मैं उससे अपना मतलब हासिल करने की खुद उससे आरज़ू मन्द थी मगर ये बचा रहा और जिस काम का मैं हुक्म देती हूँ अगर ये न करेगा तो ज़रुर क़ैद भी किया जाएगा और ज़लील भी होगा (ये सब बातें यूसुफ ने मेरी बारगाह में) अर्ज़ की
33قَالَ رَبِّ السِّجْنُ أَحَبُّ إِلَيَّ مِمَّا يَدْعُونَنِي إِلَيْهِ ۖ وَإِلَّا تَصْرِفْ عَنِّي كَيْدَهُنَّ أَصْبُ إِلَيْهِنَّ وَأَكُن مِّنَ الْجَاهِلِينَ
ऐ मेरे पालने वाले जिस बात की ये औरते मुझ से ख्वाहिश रखती हैं उसकी निस्वत (बदले में) मुझे क़ैद ख़ानों ज्यादा पसन्द है और अगर तू इन औरतों के फ़रेब मुझसे दफा न फरमाएगा तो (शायद) मै उनकी तरफ माएल (झुक) हो जाँऊ ले तो जाओ और जाहिलों से शुमार किया जाऊँ
34فَاسْتَجَابَ لَهُ رَبُّهُ فَصَرَفَ عَنْهُ كَيْدَهُنَّ ۚ إِنَّهُ هُوَ السَّمِيعُ الْعَلِيمُ
तो उनके परवरदिगार ने उनकी सुन ली और उन औरतों के मकर को दफा कर दिया इसमें शक़ नहीं कि वह बड़ा सुनने वाला वाक़िफकार है
35ثُمَّ بَدَا لَهُم مِّن بَعْدِ مَا رَأَوُا الْآيَاتِ لَيَسْجُنُنَّهُ حَتَّىٰ حِينٍ
फिर (अज़ीज़ मिस्र और उसके लोगों ने) बावजूद के (यूसुफ की पाक दामिनी की) निशानियाँ देख ली थी उसके बाद भी उनको यही मुनासिब मालूम हुआ
36وَدَخَلَ مَعَهُ السِّجْنَ فَتَيَانِ ۖ قَالَ أَحَدُهُمَا إِنِّي أَرَانِي أَعْصِرُ خَمْرًا ۖ وَقَالَ الْآخَرُ إِنِّي أَرَانِي أَحْمِلُ فَوْقَ رَأْسِي خُبْزًا تَأْكُلُ الطَّيْرُ مِنْهُ ۖ نَبِّئْنَا بِتَأْوِيلِهِ ۖ إِنَّا نَرَاكَ مِنَ الْمُحْسِنِينَ
कि कुछ मियाद के लिए उनको क़ैद ही करे दें और यूसुफ के साथ और भी दो जवान आदमी (क़ैद ख़ाने) में दाख़िल हुए (चन्द दिन के बाद) उनमें से एक ने कहा कि मैने ख्वाब में देखा है कि मै (शराब बनाने के वास्ते अंगूर) निचोड़ रहा हूँ और दूसरे ने कहा (मै ने भी ख्वाब में) अपने को देखा कि मै अपने सर पर रोटिया उठाए हुए हूँ और चिड़ियाँ उसे खा रही हैं (यूसुफ) हमको उसकी ताबीर (मतलब) बताओ क्योंकि हम तुमको यक़ीनन नेकी कारों से समझते हैं
यूसुफकुरान सूची
111आयत
मक्कीअवतरण स्थान
34आयत

अनुवाद — यूसुफ 34

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Friday, October 2, 2026

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