Wa in ta`jab fa`ajabun qawluhm `a-izaa kunna turaaban `a-inna lafee khalqin jadeed; ulaaa `ikal lazeena kafaroo bi Rabbihim wa ulaaa`ikal aghlaalu feee a`naaqihim wa ulaa`ika Ashaabun Naari hum feehaa khaalidoon
📖 अनुवाद (हिंदी अर्थ)
📖 हिंदी अर्थ
और अगर तुम्हें (किसी बात पर) ताज्जुब होता है तो उन कुफ्फारों को ये क़ौल ताज्जुब की बात है कि जब हम (सड़गल कर) मिट्टी हो जाएंगें तो क्या हम (फिर दोबारा) एक नई जहन्नुम में आंऎंगें ये वही लोग हैं जिन्होंने अपने परवरदिगार के साथ कुफ्र किया और यही वह लोग हैं जिनकी गर्दनों में (क़यामत के दिन) तौक़ पड़े होगें और यही लोग जहन्नुमी हैं कि ये इसमें हमेशा रहेगें
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اگر تم عجیب بات سننی چاہو تو کافروں کا یہ کہنا عجیب ہے کہ جب ہم (مر کر) مٹی ہو جائیں گے تو کیا ازسرنو پیدا ہوں گے؟ یہی لوگ ہیں جو اپنے پروردگار سے منکر ہوئے ہیں۔ اور یہی ہیں جن کی گردنوں میں طوق ہوں گے اور یہی اہل دوزخ ہیں کہ ہمیشہ اس میں (جلتے) رہیں گے
خَلْقٍ جَدِيدٍ: नई सृष्टि (दोबारा जीवित किया जाना)।
الْأَغْلَالُ: गले में डाली जाने वाली बेड़ियाँ/तौक (जंजीरें)।
أَصْحَابُ النَّارِ: आग में रहने वाले।
خَالِدُونَ: हमेशा रहने वाले (अमर)।
तफ़सीर (व्याख्या):
हे नबी! यदि आप इनकार करने वालों के किसी कथन पर आश्चर्यचकित होते हैं, तो सबसे अधिक आश्चर्य की बात उनका यह कहना है कि "क्या जब हम मरकर मिट्टी बन जाएँगे, तो क्या हम सचमुच नई सृष्टि में दोबारा जीवित किए जाएँगे?" वे अपनी इस बात से पुनरुत्थान (आख़िरत में दोबारा उठाए जाने) का मज़ाक उड़ाते हैं और इसे असंभव समझते हैं, जबकि यही वे लोग हैं जिन्होंने अपने रब को नकार दिया — उस रब को जिसने उन्हें पहली बार शून्य से पैदा किया। यदि पहली बार पैदा करना संभव था, तो दोबारा पैदा करना उसके लिए और भी आसान है।
ये लोग क़ियामत के दिन ऐसी हालत में उठेंगे कि उनके गले में आग की बेड़ियाँ (ज़ंजीरें) डाली जाएँगी। वे जहन्नम (नरक) में जाने वाले लोग हैं और उसमें हमेशा-हमेशा रहेंगे — कभी बाहर नहीं निकलेंगे और न ही उनकी पीड़ा कम होगी। उनका अंजाम यही है, क्योंकि उन्होंने अल्लाह की क़ुदरत (शक्ति) को नहीं पहचाना और उसकी निशानियों को झुठलाया।
फ़ायदे (शिक्षाएँ):
अल्लाह की क़ुदरत पर विश्वास: यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह के लिए कुछ भी असंभव नहीं है। जिसने पहली बार हमें पैदा किया, वही हमें दोबारा ज़िंदा करेगा। यह विश्वास मुसलमान को जीवन में हिम्मत और उम्मीद देता है।
आख़िरत की याद: पुनरुत्थान पर ईमान इंसान को अच्छे कर्म करने की प्रेरणा देता है और बुराई से रोकता है। जो व्यक्ति यह मानता है कि उसे हिसाब देना है, वह अपनी ज़िंदगी को संभालकर चलता है।
कुफ़्र का अंजाम: यह आयत स्पष्ट करती है कि जो लोग अल्लाह की क़ुदरत और आख़िरत को नकारते हैं, उनका ठिकाना नरक है, जहाँ वे हमेशा रहेंगे। यह डरावनी चेतावनी है, लेकिन साथ ही यह भी बताती है कि अल्लाह ने इंसान को आगाह कर दिया है ताकि वह सही रास्ता चुने।
अच्छाई की ओर बुलावा: इस आयत में अल्लाह ने इंसान को सोचने का मौक़ा दिया है — अगर वह अपनी पैदाइश पर ग़ौर करे, तो उसे यक़ीन हो जाएगा कि दोबारा ज़िंदा होना कोई मुश्किल काम नहीं। यही सोच इंसान को ईमान और अच्छे आचरण की ओर ले जाती है।
नबी ﷺ के साथ हमदर्दी: यह आयत हमें सिखाती है कि नबी ﷺ को जब लोग झुठलाते थे, तो वे दुखी होते थे। हमें भी अपने पैग़ंबर की सुन्नत पर चलते हुए सच्चाई की तबलीग़ (प्रचार) करनी चाहिए, चाहे लोग मानें या न मानें।
और अगर तुम्हें (किसी बात पर) ताज्जुब होता है तो उन कुफ्फारों को ये क़ौल ताज्जुब की बात है कि जब हम (सड़गल कर) मिट्टी हो जाएंगें तो क्या हम (फिर दोबारा) एक नई जहन्नुम में आंऎंगें ये वही लोग हैं जिन्होंने अपने परवरदिगार के साथ कुफ्र किया और यही वह लोग हैं जिनकी गर्दनों में (क़यामत के दिन) तौक़ पड़े होगें और यही लोग जहन्नुमी हैं कि ये इसमें हमेशा रहेगें
(अपनी) आयतें तफसीलदार बयान करता है और वह वही है जिसने ज़मीन को बिछाया और उसमें (बड़े बड़े) अटल पहाड़ और दरिया बनाए और उसने हर तरह के मेवों की दो दो किस्में पैदा की (जैसे खट्टे मीठे) वही रात (के परदे) से दिन को ढाक देता है इसमें शक़ नहीं कि जो लोग और ग़ौर व फिक्र करते हैं उनके लिए इसमें (कुदरत खुदा की) बहुतेरी निशानियाँ हैं
और खुरमों (खजूर) के दरख्त की एक जड़ और दो याखें और बाज़ अकेला (एक ही याख़ का) हालॉकि सब एक ही पानी से सीचे जाते हैं और फलों में बाज़ को बाज़ पर हम तरजीह देते हैं बेशक जो लोग अक़ल वाले हैं उनके लिए इसमें (कुदरत खुदा की) बहुतेरी निशानियाँ हैं
और अगर तुम्हें (किसी बात पर) ताज्जुब होता है तो उन कुफ्फारों को ये क़ौल ताज्जुब की बात है कि जब हम (सड़गल कर) मिट्टी हो जाएंगें तो क्या हम (फिर दोबारा) एक नई जहन्नुम में आंऎंगें ये वही लोग हैं जिन्होंने अपने परवरदिगार के साथ कुफ्र किया और यही वह लोग हैं जिनकी गर्दनों में (क़यामत के दिन) तौक़ पड़े होगें और यही लोग जहन्नुमी हैं कि ये इसमें हमेशा रहेगें
और (ऐ रसूल) ये लोग तुम से भलाई के क़ब्ल ही बुराई (अज़ाब) की जल्दी मचा रहे हैं हालॉकि उनके पहले (बहुत से लोगों की) सज़ाएं हो चुकी हैं और इसमें शक़ नहीं की तुम्हारा परवरदिगार बावजूद उनकी शरारत के लोगों पर बड़ा बख़शिश (करम) वाला है और इसमें भी शक़ नहीं कि तुम्हारा परवरदिगार यक़ीनन सख्त अज़ाब वाला है
और वो लोग काफिर हैं कहते हैं कि इस शख़्श (मोहम्मद) पर उसके परवरदिगार की तरफ से कोई निशानी (हमारी मर्ज़ी के मुताबिक़) क्यों नहीं नाज़िल की जाती ऐ रसूल तुम तो सिर्फ (ख़ौफे ख़ुदा से) डराने वाले हो
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