इब्राहीम · 7/52
अनुवाद उच्चारण — इब्राहीम
وَإِذْ تَأَذَّنَ رَبُّكُمْ لَئِن شَكَرْتُمْ لَأَزِيدَنَّكُمْ ۖ وَلَئِن كَفَرْتُمْ إِنَّ عَذَابِي لَشَدِيدٌ ۝٧
Wa iz ta azzana Rabbukum la`in shakartum la azeedannakum wa la`in kafartum inn`azaabee lashadeed
📖 हिंदी अर्थ
और (वह वक्त याद दिलाओ) जब तुम्हारे परवरदिगार ने तुम्हें जता दिया कि अगर (मेरा) शुक्र करोगें तो मै यक़ीनन तुम पर (नेअमत की) ज्यादती करुँगा और अगर कहीं तुमने नाशुक्री की तो (याद रखो कि) यक़ीनन मेरा अज़ाब सख्त है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • تَأَذَّنَ: अर्थात अल्लाह ने स्पष्ट रूप से घोषणा की और अपनी ओर से पक्का वादा बताया।
  • لَأَزِيدَنَّكُمْ: मैं तुम्हें निश्चित रूप से और अधिक दूँगा।
  • كَفَرْتُمْ: अर्थात नेमतों का इनकार किया, उन्हें न पहचाना और अल्लाह की नेमतों के बजाय उसकी नाफ़रमानी की।
  • عَذَابِي لَشَدِيدٌ: मेरी यातना अत्यंत कठोर और भयंकर है।

तफ़सीर:

यह आयत हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) की उस नसीहत का हिस्सा है जो उन्होंने अपनी क़ौम बनी इसराईल को की थी। अल्लाह तआला ने उन्हें फ़िरऔन की ग़ुलामी से आज़ाद किया, समुद्र को चीरकर उन्हें रास्ता दिया, आसमान से मन्न-ओ-सलवा (खाने की चीज़ें) उतारीं, और प्यासे होने पर पत्थर से पानी जारी किया। ये सब अल्लाह की बड़ी नेमतें थीं। इसी सिलसिले में अल्लाह ने उन्हें बताया कि उसने अपनी ओर से एक पक्का और स्पष्ट वादा किया है।

अल्लाह तआला का फ़रमान है: "अगर तुम मेरा शुक्र अदा करोगे, मेरी नेमतों को पहचानोगे और उन्हें मेरी राह में इस्तेमाल करोगे, तो मैं तुम्हें और ज़्यादा दूँगा।" यह अल्लाह का वह अटल नियम है जो उसने अपने बंदों के लिए तय कर रखा है—शुक्र नेमत को बढ़ाता है। शुक्र का मतलब सिर्फ़ ज़बान से "शुक्र" कहना नहीं है, बल्कि यह है कि बंदा अल्लाह की नेमत को उसी की इबादत और उसकी फ़रमाबरदारी में खर्च करे, और उसका दिल अल्लाह की मोहब्बत और एहसानमंदी से भरा रहे।

और अगर तुम कुफ़्र करो—यानी अल्लाह की नेमतों से मुँह मोड़ो, उन्हें भूल जाओ, या उनका इस्तेमाल नाफ़रमानी में करो—तो जान लो कि अल्लाह का अज़ाब बहुत सख्त है। वह नेमतें छीन लेता है, और उसकी पकड़ ऐसी होती है जिससे कोई बच नहीं सकता।

यह आयत हम सबके लिए एक बहुत बड़ी शिक्षा है। हमें चाहिए कि हर वक़्त अल्लाह का शुक्र अदा करें—चाहे नेमत छोटी हो या बड़ी। जब हम शुक्र करते हैं, तो अल्लाह हमें और देता है, और जब हम नाशुक्री करते हैं, तो हम ख़ुद अपने ऊपर अज़ाब का दरवाज़ा खोल लेते हैं। याद रखिए, अल्लाह की नेमतें उसके बंदों पर बरसती रहती हैं, लेकिन शुक्र ही वह चाबी है जो इन नेमतों को बढ़ाती है और उन्हें हमारे लिए बरकत वाला बनाती है। अल्लाह हमें शुक्रगुज़ार बंदे बनाए और हमें नाशुक्री से बचाए। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 5-9 — इब्राहीम

5وَلَقَدْ أَرْسَلْنَا مُوسَىٰ بِآيَاتِنَا أَنْ أَخْرِجْ قَوْمَكَ مِنَ الظُّلُمَاتِ إِلَى النُّورِ وَذَكِّرْهُم بِأَيَّامِ اللَّهِ ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ لِّكُلِّ صَبَّارٍ شَكُورٍ
और हमने मूसा को अपनी निशानियाँ देकर भेजा (और ये हुक्म दिया) कि अपनी क़ौम को (कुफ्र की) तारिकियों से (ईमान की) रौशनी में निकाल लाओ और उन्हें ख़ुदा के (वह) दिन याद दिलाओ (जिनमें ख़ुदा की बड़ी बड़ी कुदरतें ज़ाहिर हुई) इसमें शक़ नहीं इसमें तमाम सब्र शुक्र करने वालों के वास्ते (कुदरते ख़ुदा की) बहुत सी निशानियाँ हैं
6وَإِذْ قَالَ مُوسَىٰ لِقَوْمِهِ اذْكُرُوا نِعْمَةَ اللَّهِ عَلَيْكُمْ إِذْ أَنجَاكُم مِّنْ آلِ فِرْعَوْنَ يَسُومُونَكُمْ سُوءَ الْعَذَابِ وَيُذَبِّحُونَ أَبْنَاءَكُمْ وَيَسْتَحْيُونَ نِسَاءَكُمْ ۚ وَفِي ذَٰلِكُم بَلَاءٌ مِّن رَّبِّكُمْ عَظِيمٌ
और वह (वक्त याद दिलाओ) जब मूसा ने अपनी क़ौम से कहा कि ख़ुदा ने जो एहसान तुम पर किए हैं उनको याद करो जब अकेले तुमको फिरऔन के लोगों (के ज़ुल्म) से नजात दी कि वह तुम को बहुत बड़े बड़े दुख दे के सताते थे तुम्हारा लड़कों को जबाह कर डालते थे और तुम्हारी औरतों को (अपनी ख़िदमत के वास्ते) जिन्दा रहने देते थे और इसमें तुम्हारा परवरदिगार की तरफ से (तुम्हारा सब्र की) बड़ी (सख्त) आज़माइश थी
7وَإِذْ تَأَذَّنَ رَبُّكُمْ لَئِن شَكَرْتُمْ لَأَزِيدَنَّكُمْ ۖ وَلَئِن كَفَرْتُمْ إِنَّ عَذَابِي لَشَدِيدٌ
और (वह वक्त याद दिलाओ) जब तुम्हारे परवरदिगार ने तुम्हें जता दिया कि अगर (मेरा) शुक्र करोगें तो मै यक़ीनन तुम पर (नेअमत की) ज्यादती करुँगा और अगर कहीं तुमने नाशुक्री की तो (याद रखो कि) यक़ीनन मेरा अज़ाब सख्त है
8وَقَالَ مُوسَىٰ إِن تَكْفُرُوا أَنتُمْ وَمَن فِي الْأَرْضِ جَمِيعًا فَإِنَّ اللَّهَ لَغَنِيٌّ حَمِيدٌ
और मूसा ने (अपनी क़ौम से) कह दिया कि अगर और (तुम्हारे साथ) जितने रुए ज़मीन पर हैं सब के सब (मिलकर भी ख़ुदा की) नाशुक्री करो तो ख़ुदा (को ज़रा भी परवाह नहीं क्योंकि वह तो बिल्कुल) बे नियाज़ है
9أَلَمْ يَأْتِكُمْ نَبَأُ الَّذِينَ مِن قَبْلِكُمْ قَوْمِ نُوحٍ وَعَادٍ وَثَمُودَ ۛ وَالَّذِينَ مِن بَعْدِهِمْ ۛ لَا يَعْلَمُهُمْ إِلَّا اللَّهُ ۚ جَاءَتْهُمْ رُسُلُهُم بِالْبَيِّنَاتِ فَرَدُّوا أَيْدِيَهُمْ فِي أَفْوَاهِهِمْ وَقَالُوا إِنَّا كَفَرْنَا بِمَا أُرْسِلْتُم بِهِ وَإِنَّا لَفِي شَكٍّ مِّمَّا تَدْعُونَنَا إِلَيْهِ مُرِيبٍ
और हम्द है क्या तुम्हारे पास उन लोगों की ख़बर नहीं पहुँची जो तुमसे पहले थे (जैसे) नूह की क़ौम और आद व समूद और (दूसरे लोग) जो उनके बाद हुए (क्योकर ख़बर होती) उनको ख़ुदा के सिवा कोई जानता ही नहीं उनके पास उनके (वक्त क़े) पैग़म्बर मौजिज़े लेकर आए (और समझाने लगे) तो उन लोगों ने उन पैग़म्बरों के हाथों को उनके मुँह पर उलटा मार दिया और कहने लगे कि जो (हुक्म लेकर) तुम ख़ुदा की तरफ से भेजे गए हो हम तो उसको नहीं मानते और जिस (दीन) की तरफ तुम हमको बुलाते हो बड़े गहरे शक़ में पड़े है
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अनुवाद — इब्राहीम 7

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Tuesday, August 18, 2026

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