इब्राहीम · 6/52
अनुवाद उच्चारण — इब्राहीम
وَإِذْ قَالَ مُوسَىٰ لِقَوْمِهِ اذْكُرُوا نِعْمَةَ اللَّهِ عَلَيْكُمْ إِذْ أَنجَاكُم مِّنْ آلِ فِرْعَوْنَ يَسُومُونَكُمْ سُوءَ الْعَذَابِ وَيُذَبِّحُونَ أَبْنَاءَكُمْ وَيَسْتَحْيُونَ نِسَاءَكُمْ ۚ وَفِي ذَٰلِكُم بَلَاءٌ مِّن رَّبِّكُمْ عَظِيمٌ ۝٦
Wa iz qaala Moosaa liqawmihiz kuroo ni`matal laahi `alaikum iz anjaakum min Aali Fir`awna yasoomoo nakum sooo`al `azaabi wa yuzabbihoona abnaaa`akum wa yastahyoona nisaaa`akum; wa fee zaalikum balaaa`um mir Rabbikum `azeem
📖 हिंदी अर्थ
और वह (वक्त याद दिलाओ) जब मूसा ने अपनी क़ौम से कहा कि ख़ुदा ने जो एहसान तुम पर किए हैं उनको याद करो जब अकेले तुमको फिरऔन के लोगों (के ज़ुल्म) से नजात दी कि वह तुम को बहुत बड़े बड़े दुख दे के सताते थे तुम्हारा लड़कों को जबाह कर डालते थे और तुम्हारी औरतों को (अपनी ख़िदमत के वास्ते) जिन्दा रहने देते थे और इसमें तुम्हारा परवरदिगार की तरफ से (तुम्हारा सब्र की) बड़ी (सख्त) आज़माइश थी
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَسُومُونَكُمْ سُوءَ الْعَذَابِ: तुम्हें सबसे बुरा और कठोर अज़ाब चखाते थे।
  • وَيَسْتَحْيُونَ نِسَاءَكُمْ: तुम्हारी स्त्रियों को ज़िंदा छोड़ देते थे (उन्हें मारते नहीं थे)।
  • بَلَاءٌ: परीक्षण, आज़माइश और इम्तिहान।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! आप अपनी क़ौम को उस समय की याद दिलाइए जब मूसा (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम बनी इस्राईल से कहा: "अल्लाह की उस नेमत को याद करो जो उसने तुम पर की, जब उसने तुम्हें फ़िरऔन और उसके साथियों के चंगुल से नजात दी। वे तुम्हें सबसे बुरा अज़ाब चखाते थे—तुम्हारे बेटों को ज़िब्ह कर देते थे ताकि तुममें कोई ऐसा बेटा पैदा न हो जो फ़िरऔन की सल्तनत पर क़ाबिज़ हो जाए, और तुम्हारी औरतों को ज़िंदा रखते थे ताकि उन्हें रुसवा करें और उनकी इज़्ज़तें लूटें। यानी वे तुम्हें तरह-तरह की सख्त सज़ाएँ देते थे और तुम्हारी बेइज़्ज़ती करते थे। और इस अज़ाब व नजात में तुम्हारे रब की तरफ से तुम्हारे लिए बड़ी आज़माइश थी—इसलिए कि तुम सब्र करो और अल्लाह की नेमतों का शुक्र अदा करो। अल्लाह ने तुम्हें इस सख्त मुसीबत से निकालकर अपनी बड़ी नेमत से नवाज़ा, और यह सब कुछ तुम्हारे इम्तिहान के लिए था।"

फ़ायदे (सबक):

  1. अल्लाह की नेमतों को याद करना और उनका ज़िक्र करना शुक्र का ज़रिया है और दिल में अल्लाह की मुहब्बत पैदा करता है।
  2. मुसीबतों और आज़माइशों में अल्लाह की रहमत और मदद का राज़ छिपा होता है—जो सब्र करता है, अल्लाह उसे बड़ी नजात देता है।
  3. अल्लाह अपने बंदों को उनकी हैसियत के मुताबिक आज़माता है, और जो उसकी राह में सब्र करते हैं, उन्हें वह ज़ुल्म और सितम से निकालकर इज़्ज़त और आज़ादी देता है।
  4. यह क़िस्सा हमें सिखाता है कि ज़ुल्म करने वाली ताकतें चाहे कितनी भी ताकतवर हों, अल्लाह की क़ुदरत के आगे बेबस हैं—वह अपने मोमिन बंदों को हमेशा राहत देता है।
  5. नेमतों की क़द्र करना और उन्हें अल्लाह की तरफ मंसूब करना ईमान की निशानी है, और इससे अल्लाह की मुहब्बत और बंदगी में इख़लास बढ़ता है।
🎧 सुनें

📜 आयत 4-8 — इब्राहीम

4وَمَا أَرْسَلْنَا مِن رَّسُولٍ إِلَّا بِلِسَانِ قَوْمِهِ لِيُبَيِّنَ لَهُمْ ۖ فَيُضِلُّ اللَّهُ مَن يَشَاءُ وَيَهْدِي مَن يَشَاءُ ۚ وَهُوَ الْعَزِيزُ الْحَكِيمُ
और हमने जब कभी कोई पैग़म्बर भेजा तो उसकी क़ौम की ज़बान में बातें करता हुआ (ताकि उसके सामने (हमारे एहक़ाम) बयान कर सके तो यही ख़ुदा जिसे चाहता है गुमराही में छोड़ देता है और जिस की चाहता है हिदायत करता है वही सब पर ग़ालिब हिकमत वाला है
5وَلَقَدْ أَرْسَلْنَا مُوسَىٰ بِآيَاتِنَا أَنْ أَخْرِجْ قَوْمَكَ مِنَ الظُّلُمَاتِ إِلَى النُّورِ وَذَكِّرْهُم بِأَيَّامِ اللَّهِ ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ لِّكُلِّ صَبَّارٍ شَكُورٍ
और हमने मूसा को अपनी निशानियाँ देकर भेजा (और ये हुक्म दिया) कि अपनी क़ौम को (कुफ्र की) तारिकियों से (ईमान की) रौशनी में निकाल लाओ और उन्हें ख़ुदा के (वह) दिन याद दिलाओ (जिनमें ख़ुदा की बड़ी बड़ी कुदरतें ज़ाहिर हुई) इसमें शक़ नहीं इसमें तमाम सब्र शुक्र करने वालों के वास्ते (कुदरते ख़ुदा की) बहुत सी निशानियाँ हैं
6وَإِذْ قَالَ مُوسَىٰ لِقَوْمِهِ اذْكُرُوا نِعْمَةَ اللَّهِ عَلَيْكُمْ إِذْ أَنجَاكُم مِّنْ آلِ فِرْعَوْنَ يَسُومُونَكُمْ سُوءَ الْعَذَابِ وَيُذَبِّحُونَ أَبْنَاءَكُمْ وَيَسْتَحْيُونَ نِسَاءَكُمْ ۚ وَفِي ذَٰلِكُم بَلَاءٌ مِّن رَّبِّكُمْ عَظِيمٌ
और वह (वक्त याद दिलाओ) जब मूसा ने अपनी क़ौम से कहा कि ख़ुदा ने जो एहसान तुम पर किए हैं उनको याद करो जब अकेले तुमको फिरऔन के लोगों (के ज़ुल्म) से नजात दी कि वह तुम को बहुत बड़े बड़े दुख दे के सताते थे तुम्हारा लड़कों को जबाह कर डालते थे और तुम्हारी औरतों को (अपनी ख़िदमत के वास्ते) जिन्दा रहने देते थे और इसमें तुम्हारा परवरदिगार की तरफ से (तुम्हारा सब्र की) बड़ी (सख्त) आज़माइश थी
7وَإِذْ تَأَذَّنَ رَبُّكُمْ لَئِن شَكَرْتُمْ لَأَزِيدَنَّكُمْ ۖ وَلَئِن كَفَرْتُمْ إِنَّ عَذَابِي لَشَدِيدٌ
और (वह वक्त याद दिलाओ) जब तुम्हारे परवरदिगार ने तुम्हें जता दिया कि अगर (मेरा) शुक्र करोगें तो मै यक़ीनन तुम पर (नेअमत की) ज्यादती करुँगा और अगर कहीं तुमने नाशुक्री की तो (याद रखो कि) यक़ीनन मेरा अज़ाब सख्त है
8وَقَالَ مُوسَىٰ إِن تَكْفُرُوا أَنتُمْ وَمَن فِي الْأَرْضِ جَمِيعًا فَإِنَّ اللَّهَ لَغَنِيٌّ حَمِيدٌ
और मूसा ने (अपनी क़ौम से) कह दिया कि अगर और (तुम्हारे साथ) जितने रुए ज़मीन पर हैं सब के सब (मिलकर भी ख़ुदा की) नाशुक्री करो तो ख़ुदा (को ज़रा भी परवाह नहीं क्योंकि वह तो बिल्कुल) बे नियाज़ है
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अनुवाद — इब्राहीम 6

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Tuesday, August 18, 2026

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