Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- آيَاتِ اللَّهِ: अल्लाह की निशानियाँ और उसकी ओर से उतारी गई आयतें (कुरआन)।
- لَا يَهْدِيهِمُ اللَّهُ: अल्लाह उन्हें सत्य का मार्ग नहीं दिखाता (अर्थात् उन्हें हिदायत की तौफ़ीक़ नहीं देता)।
- عَذَابٌ أَلِيمٌ: दर्दनाक और बहुत सख्त अज़ाब।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत उन लोगों के बारे में है जो अल्लाह की आयतों (कुरआन और उसकी निशानियों) पर ईमान नहीं लाते और उन्हें जानबूझकर झुठलाते हैं। ऐसे लोगों को अल्लाह तआला हिदायत की तौफ़ीक़ नहीं देता, क्योंकि उन्होंने खुद सत्य को स्वीकार करने से इनकार कर दिया और अपनी ज़िद व हठ पर अड़े रहे। जब इंसान सत्य को पहचानने के बाद भी उसे नहीं मानता, तो अल्लाह उसके दिल को बंद कर देता है और वह हिदायत से महरूम रहता है। यह उनकी अपनी हठधर्मिता का स्वाभाविक परिणाम है, क्योंकि अल्लाह किसी पर ज़ुल्म नहीं करता, बल्कि लोग स्वयं अपने ऊपर ज़ुल्म करते हैं। आख़िरत में उनके लिए दर्दनाक अज़ाब तैयार है, जो उनके कुफ़्र और झुठलाने की सज़ा होगी। यह अज़ाब उनके लिए इसलिए है क्योंकि उन्होंने अल्लाह की रहमत और हिदायत के दरवाज़े खुद बंद कर लिए।
फ़ायदे (सीख):
- हिदायत अल्लाह के हाथ में है, लेकिन वह उन्हीं को देता है जो सत्य के लिए अपना दिल खोलते हैं और उसे क़बूल करने की नीयत रखते हैं।
- अल्लाह की आयतों को झुठलाना और उनसे मुँह मोड़ना इंसान को हिदायत से दूर कर देता है, और यही कुफ़्र का रास्ता है।
- यह आयत हमें सिखाती है कि हमें कुरआन और अल्लाह की निशानियों पर गहराई से विचार करना चाहिए और उन्हें अपने जीवन में अपनाना चाहिए, ताकि हम अल्लाह की रहमत और हिदायत के हक़दार बनें।
- अल्लाह का अज़ाब उन्हीं के लिए है जो हक़ को जानते हुए भी उसका इनकार करते हैं, इसलिए हमें सच्चाई के आगे झुकना चाहिए और अपनी ज़िद नहीं करनी चाहिए।
- यह आयत मोमिनों के लिए एक चेतावनी है कि वे अपने ईमान को सच्चे दिल से पकड़ें और अल्लाह की आयतों से दूर न हों, क्योंकि यही उनकी कामयाबी और नजात का ज़रिया है।
📜 आयत 102-106 — सूरा अन-नहल
अनुवाद — अन-नहल 104
सूरा अन-नहल आयत 104 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : इसमें तो शक ही नहीं कि जो लोग ख़ुदा की…सूरा आयत 104/128 — सूरा अन-नहल النحل (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-नहल सुनें, सूरा अन-नहल अनुवाद, सूरा अन-नहल mp3, सूरा अन-नहल pdf. आयत 102–106. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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