अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- جَنَّاتُ عَدْنٍ: स्थायी निवास के बगीचे, जहाँ से कभी निकलना नहीं होगा।
- يَدْخُلُونَهَا: वे उनमें प्रवेश करेंगे।
- تَجْرِي مِن تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ: उनके नीचे से नहरें बह रही होंगी।
- مَا يَشَاءُونَ: जो कुछ वे चाहेंगे (हर प्रकार की इच्छाएँ पूरी होंगी)।
- كَذَلِكَ يَجْزِي: इसी प्रकार बदला देता है।
- الْمُتَّقِينَ: परहेज़गार, जो अल्लाह से डरते हैं और उसकी आज्ञाओं का पालन करते हैं।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ने पिछली आयत में मुत्तक़ियों (परहेज़गारों) के लिए जो अच्छी ख़बर दी थी, इस आयत में उसकी तफ़सील बयान की है। वे जन्नत के ऐसे बाग़ हैं जो स्थायी हैं—उनमें हमेशा रहना है, कभी निकलना नहीं। उन बाग़ों में दाख़िल होते ही वहाँ के महलों और पेड़ों के नीचे से नहरें बहती हुई दिखाई देंगी, जो उस जन्नत की ताज़गी और ख़ूबसूरती को चार चाँद लगा देंगी। वहाँ उनके लिए वह सब कुछ मौजूद होगा जो वे चाहेंगे—हर प्रकार का खाना, पीना, आराम, सुख-सुविधाएँ, और वह सब कुछ जो दिल चाहे और आँखों को अच्छा लगे। कोई चीज़ उनसे रोकी नहीं जाएगी, न कोई कमी होगी।
यह अल्लाह का वही इनाम है जो वह अपने डरने वाले बंदों को देता है—जिन्होंने दुनिया में उसकी नाफ़रमानी से परहेज़ किया, उसके हुक्मों को माना, और अपनी ज़िंदगी को उसकी रज़ा के मुताबिक़ ढाला। यह बदला सिर्फ़ हज़रत मुहम्मद ﷺ की उम्मत के मुत्तक़ियों के लिए नहीं, बल्कि पिछली उम्मतों के मुत्तक़ी लोगों को भी इसी तरह का इनाम दिया जाएगा, क्योंकि अल्लाह का क़ानून हमेशा एक जैसा रहा है—नेकी का बदला नेकी है।
फ़ायदे (सीख):
- अल्लाह का इनाम हमेशा बेहतर होता है: जो लोग दुनिया में अल्लाह से डरकर गुनाहों से बचते हैं, अल्लाह उन्हें ऐसी जगह देगा जहाँ हर ख़्वाहिश पूरी होगी—यह उनके सब्र और परहेज़गारी का सबसे बड़ा फल है।
- जन्नत की असली ख़ूबसूरती: जन्नत सिर्फ़ एक बाग़ नहीं, बल्कि वहाँ हर वह चीज़ मौजूद है जो इंसान का दिल चाहे। यह हमें बताती है कि अल्लाह की रहमत और इनाम की कोई हद नहीं।
- परहेज़गारी की अहमियत: यह आयत हमें तक़वा (अल्लाह का डर) अपनाने की तरग़ीब देती है। दुनिया में थोड़ी सी मुश्किलें सहकर अल्लाह की रज़ा के मुताबिक़ चलना, उस अनगिनत इनामों का ज़रिया बनता है जो कभी ख़त्म नहीं होंगे।
- उम्मीद और ख़ुशख़बरी: यह आयत हर उस इंसान के लिए उम्मीद का पैग़ाम है जो गुनाहों से बचना चाहता है और अल्लाह की तरफ़ रुजू करता है—उसके लिए जन्नत के दरवाज़े खुले हैं।
- अल्लाह की सुन्नत (क़ानून) में एकरूपता: अल्लाह का इनाम और अज़ाब दोनों उसके क़ानून के मुताबिक़ हैं—हर ज़माने में नेक लोगों के साथ यही सलूक हुआ है। इससे हमें यक़ीन होता है कि अल्लाह का वादा सच्चा है और उसका इनाम कभी ज़ाए नहीं होता।
📜 आयत 29-33 — अन-नहल
अनुवाद — अन-नहल 31
सूरा अन-नहल आयत 31 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : सदा बहार (हरे भरे) बाग़ हैं जिनमें (वे तकल्लुफ) जा…सूरा आयत 31/128 — अन-नहल النحل (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-नहल सुनें, अन-नहल अनुवाद, अन-नहल mp3, अन-नहल pdf. आयत 29–33. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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