Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- تَتَوَفَّاهُمُ: उनकी आत्माएँ क़ब्ज़ करती हैं।
- طَيِّبِينَ: पवित्र, शिर्क और कु़फ़्र से पाक दिल वाले।
- سَلَامٌ عَلَيْكُمُ: तुम पर सलामती हो, यानी हर आफ़त और बुराई से सुरक्षित हो।
तफ़सीर:
यह आयत उन नेक लोगों का ज़िक्र कर रही है जो ईमान और तक़्वा पर साबित-क़दम रहते हैं। जब उनकी मौत का वक़्त आता है, तो फ़रिश्ते उनकी रूहें इस हालत में क़ब्ज़ करते हैं कि उनके दिल कु़फ़्र और गुनाहों की गंदगी से पाक और साफ़ होते हैं। वे फ़रिश्ते उन्हें मौत के वक़्त ख़ुशख़बरी देते हुए कहते हैं: "तुम पर सलामती हो! तुम हर अज़ाब और दर्द से महफ़ूज़ हो। अब उस जन्नत में दाख़िल हो जाओ जो तुम्हारे अच्छे आमाल की जज़ा है।" यानी यह दाख़िला उनके ईमान, नेक अमल और अल्लाह के हुक्म के आगे सर झुकाने की वजह से मिलता है। यह सलाम और दाख़िले की बशारत सिर्फ़ मौत के वक़्त ही नहीं, बल्कि आख़िरत में भी उन्हें मिलेगी, जहाँ वे हमेशा के लिए जन्नत में रहेंगे और उसकी नेअमतों से लुत्फ़ उठाएँगे।
फ़ायदे:
- इस आयत से मालूम होता है कि नेक लोगों की मौत भी रहमत और सलामती का पैग़ाम लेकर आती है, और फ़रिश्ते उनका स्वागत करते हैं।
- यह ईमान वालों के लिए सबसे बड़ी ख़ुशख़बरी है कि अगर वे दुनिया में अच्छे आमाल करें, तो उनका अंजाम जन्नत और अल्लाह की रज़ा है।
- आयत यह भी सिखाती है कि असली कामयाबी दुनिया की दौलत नहीं, बल्कि पाक दिल और नेक अमल है, जो इंसान को फ़रिश्तों की दुआ और जन्नत का हक़दार बनाती है।
- यहाँ "بِمَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ" से यह भी समझ आता है कि जन्नत अल्लाह का फ़ज़्ल है, लेकिन वह अमल की बुनियाद पर मिलती है, इसलिए हर मुसलमान को चाहिए कि वह अपने अमल को दुरुस्त करे और अल्लाह की राह में लगा रहे।
📜 आयत 30-34 — सूरा अन-नहल
अनुवाद — अन-नहल 32
सूरा अन-नहल आयत 32 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ये) वह लोग हैं जिनकी रुहें फरिश्ते इस हालत में…सूरा आयत 32/128 — सूरा अन-नहल النحل (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-नहल सुनें, सूरा अन-नहल अनुवाद, सूरा अन-नहल mp3, सूरा अन-नहल pdf. आयत 30–34. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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