अन-नहल · 32/128
अनुवाद उच्चारण — अन-नहल
الَّذِينَ تَتَوَفَّاهُمُ الْمَلَائِكَةُ طَيِّبِينَ ۙ يَقُولُونَ سَلَامٌ عَلَيْكُمُ ادْخُلُوا الْجَنَّةَ بِمَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ ۝٣٢
Allazeena tatawaf faahumul malaaa`ikatu taiyibeena yaqooloona salaamun `alai kumud khulul Jannata bimaa kuntum ta`maloon
📖 हिंदी अर्थ
(ये) वह लोग हैं जिनकी रुहें फरिश्ते इस हालत में क़ब्ज़ करतें हैं कि वह (नजासते कुफ्र से) पाक व पाकीज़ा होते हैं तो फरिश्ते उनसे (निहायत तपाक से) कहते है सलामुन अलैकुम जो नेकियाँ दुनिया में तुम करते थे उसके सिले में जन्नत में (बेतकल्लुफ) चले जाओ

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • تَتَوَفَّاهُمُ: उनकी आत्माएँ क़ब्ज़ करती हैं।
  • طَيِّبِينَ: पवित्र, शिर्क और कु़फ़्र से पाक दिल वाले।
  • سَلَامٌ عَلَيْكُمُ: तुम पर सलामती हो, यानी हर आफ़त और बुराई से सुरक्षित हो।

तफ़सीर:

यह आयत उन नेक लोगों का ज़िक्र कर रही है जो ईमान और तक़्वा पर साबित-क़दम रहते हैं। जब उनकी मौत का वक़्त आता है, तो फ़रिश्ते उनकी रूहें इस हालत में क़ब्ज़ करते हैं कि उनके दिल कु़फ़्र और गुनाहों की गंदगी से पाक और साफ़ होते हैं। वे फ़रिश्ते उन्हें मौत के वक़्त ख़ुशख़बरी देते हुए कहते हैं: "तुम पर सलामती हो! तुम हर अज़ाब और दर्द से महफ़ूज़ हो। अब उस जन्नत में दाख़िल हो जाओ जो तुम्हारे अच्छे आमाल की जज़ा है।" यानी यह दाख़िला उनके ईमान, नेक अमल और अल्लाह के हुक्म के आगे सर झुकाने की वजह से मिलता है। यह सलाम और दाख़िले की बशारत सिर्फ़ मौत के वक़्त ही नहीं, बल्कि आख़िरत में भी उन्हें मिलेगी, जहाँ वे हमेशा के लिए जन्नत में रहेंगे और उसकी नेअमतों से लुत्फ़ उठाएँगे।

फ़ायदे:

  • इस आयत से मालूम होता है कि नेक लोगों की मौत भी रहमत और सलामती का पैग़ाम लेकर आती है, और फ़रिश्ते उनका स्वागत करते हैं।
  • यह ईमान वालों के लिए सबसे बड़ी ख़ुशख़बरी है कि अगर वे दुनिया में अच्छे आमाल करें, तो उनका अंजाम जन्नत और अल्लाह की रज़ा है।
  • आयत यह भी सिखाती है कि असली कामयाबी दुनिया की दौलत नहीं, बल्कि पाक दिल और नेक अमल है, जो इंसान को फ़रिश्तों की दुआ और जन्नत का हक़दार बनाती है।
  • यहाँ "بِمَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ" से यह भी समझ आता है कि जन्नत अल्लाह का फ़ज़्ल है, लेकिन वह अमल की बुनियाद पर मिलती है, इसलिए हर मुसलमान को चाहिए कि वह अपने अमल को दुरुस्त करे और अल्लाह की राह में लगा रहे।


📜 आयत 30-34 — अन-नहल

30۞ وَقِيلَ لِلَّذِينَ اتَّقَوْا مَاذَا أَنزَلَ رَبُّكُمْ ۚ قَالُوا خَيْرًا ۗ لِّلَّذِينَ أَحْسَنُوا فِي هَٰذِهِ الدُّنْيَا حَسَنَةٌ ۚ وَلَدَارُ الْآخِرَةِ خَيْرٌ ۚ وَلَنِعْمَ دَارُ الْمُتَّقِينَ
और जब परहेज़गारों से पूछा जाता है कि तुम्हारे परवरदिगार ने क्या नाज़िल किया है तो बोल उठते हैं सब अच्छे से अच्छा जिन लोगों ने नेकी की उनके लिए इस दुनिया में (भी) भलाई (ही भलाई) है और आख़िरत का घर क्या उम्दा है
31جَنَّاتُ عَدْنٍ يَدْخُلُونَهَا تَجْرِي مِن تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ ۖ لَهُمْ فِيهَا مَا يَشَاءُونَ ۚ كَذَٰلِكَ يَجْزِي اللَّهُ الْمُتَّقِينَ
सदा बहार (हरे भरे) बाग़ हैं जिनमें (वे तकल्लुफ) जा पहुँचेगें उनके नीचे नहरें जारी होंगी और ये लोग जो चाहेगें उनके लिए मुयय्या (मौजूद) है यूँ ख़ुदा परहेज़गारों (को उनके किए) की जज़ा अता फरमाता है
32الَّذِينَ تَتَوَفَّاهُمُ الْمَلَائِكَةُ طَيِّبِينَ ۙ يَقُولُونَ سَلَامٌ عَلَيْكُمُ ادْخُلُوا الْجَنَّةَ بِمَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ
(ये) वह लोग हैं जिनकी रुहें फरिश्ते इस हालत में क़ब्ज़ करतें हैं कि वह (नजासते कुफ्र से) पाक व पाकीज़ा होते हैं तो फरिश्ते उनसे (निहायत तपाक से) कहते है सलामुन अलैकुम जो नेकियाँ दुनिया में तुम करते थे उसके सिले में जन्नत में (बेतकल्लुफ) चले जाओ
33هَلْ يَنظُرُونَ إِلَّا أَن تَأْتِيَهُمُ الْمَلَائِكَةُ أَوْ يَأْتِيَ أَمْرُ رَبِّكَ ۚ كَذَٰلِكَ فَعَلَ الَّذِينَ مِن قَبْلِهِمْ ۚ وَمَا ظَلَمَهُمُ اللَّهُ وَلَٰكِن كَانُوا أَنفُسَهُمْ يَظْلِمُونَ
(ऐ रसूल) क्या ये (अहले मक्का) इसी बात के मुन्तिज़र है कि उनके पास फरिश्ते (क़ब्ज़े रुह को) आ ही जाएँ या (उनके हलाक करने को) तुम्हारे परवरदिगार का अज़ाब ही आ पहुँचे जो लोग उनसे पहले हो गुज़रे हैं वह ऐसी बातें कर चुके हैं और ख़ुदा ने उन पर (ज़रा भी) जुल्म नहीं किया बल्कि वह लोग ख़ुद कुफ़्र की वजह से अपने ऊपर आप जुल्म करते रहे
34فَأَصَابَهُمْ سَيِّئَاتُ مَا عَمِلُوا وَحَاقَ بِهِم مَّا كَانُوا بِهِ يَسْتَهْزِئُونَ
फिर जो जो करतूतें उनकी थी उसकी सज़ा में बुरे नतीजे उनको मिले और जिस (अज़ाब) की वह हँसी उड़ाया करते थे उसने उन्हें (चारो तरफ से) घेर लिया
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अनुवाद — अन-नहल 32

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Tuesday, August 18, 2026

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