अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- هَلْ يَنظُرُونَ – क्या वे प्रतीक्षा कर रहे हैं?
- تَأْتِيَهُمُ الْمَلَائِكَةُ – उनके पास फ़रिश्ते आएँ (रूह क़ब्ज़ करने के लिए)
- أَمْرُ رَبِّكَ – आपके रब का आदेश (अज़ाब या क़यामत)
- كَذَٰلِكَ فَعَلَ الَّذِينَ مِن قَبْلِهِمْ – ऐसा ही उन लोगों ने किया जो उनसे पहले थे
- وَمَا ظَلَمَهُمُ اللَّهُ – और अल्लाह ने उन पर ज़ुल्म नहीं किया
- كَانُوا أَنفُسَهُمْ يَظْلِمُونَ – वे स्वयं अपनी आत्माओं पर ज़ुल्म करते थे
तफ़सीर (व्याख्या):
ये मुशरिकीन (बहुदेववादी) जो आपको झुठला रहे हैं, वे किस चीज़ का इंतज़ार कर रहे हैं? वे केवल इस बात का इंतज़ार कर रहे हैं कि उनके पास फ़रिश्ते आएँ — यानी मौत का फ़रिश्ता और उसके सहायक फ़रिश्ते उनकी रूहें क़ब्ज़ करने के लिए आएँ, और उनके चेहरों और पीठों पर मारें — या फिर आपके रब का आदेश आ जाए, जो उन्हें दुनिया में ही अज़ाब से ख़त्म कर दे, या क़यामत आ जाए जो उनके लिए सबसे बड़ी सज़ा होगी।
ये मुशरिकीन जो शिर्क और झुठलाने का काम कर रहे हैं, यही काम उनसे पहले के काफ़िरों ने भी किया था। उन्होंने अपने नबियों को झुठलाया और शिर्क किया, तो अल्लाह ने उन्हें अज़ाब में पकड़ लिया और हलाक कर दिया। अल्लाह ने उन पर कोई ज़ुल्म नहीं किया — न उन्हें बिना वजह सज़ा दी और न उनके साथ कोई नाइंसाफ़ी की — बल्कि वे ख़ुद अपनी आत्माओं पर ज़ुल्म कर रहे थे। उन्होंने अपने हाथों से अपने लिए हलाकत का रास्ता चुना, क्योंकि उन्होंने कुफ़्र और शिर्क को अपनाया, जबकि उनके पास सच्चाई साफ़ आ चुकी थी। उन्होंने जानबूझकर हक़ को ठुकराया और अपनी आत्माओं को अज़ाब के घर में डाला, भले ही उन्होंने अपनी आत्माओं पर ज़ुल्म करने का इरादा न किया हो, लेकिन उनका कुफ़्र और शिर्क अपने आप में उनकी आत्माओं पर सबसे बड़ा ज़ुल्म था।
फ़ायदे (लाभ):
- अल्लाह की सुन्नत (क़ानून) यही है कि जो लोग हक़ को झुठलाते हैं और नबियों की दावत को नकारते हैं, वे अल्लाह के अज़ाब से नहीं बच सकते। ये एक ऐतिहासिक सच्चाई है जो पहले की उम्मतों पर गुज़र चुकी है।
- अल्लाह अपने बंदों पर कभी ज़ुल्म नहीं करता। जो सज़ा भी आती है, वह बंदे के अपने कर्मों का नतीजा होती है। ये अल्लाह की रहमत और अदालत की निशानी है कि वह बिना वजह किसी को सज़ा नहीं देता।
- इंसान का सबसे बड़ा ज़ुल्म ख़ुद अपनी आत्मा पर करना है — यानी कुफ़्र, शिर्क और नाफ़रमानी में जीना। ये वो ज़ुल्म है जो इंसान अपने ऊपर ख़ुद करता है, और इसका अंजाम दुनिया और आख़िरत दोनों में बुरा है।
- मौत और क़यामत का इंतज़ार हर इंसान को करना है, लेकिन मोमिन उस दिन की तैयारी करता है और काफ़िर उसे भूलकर अपनी हरकतों में मशग़ूल रहता है। ये आयत हमें बताती है कि हमें मौत से पहले तौबा कर लेनी चाहिए और अल्लाह की राह में चलना चाहिए।
- इस आयत में उन लोगों के लिए बड़ी तसल्ली है जो हक़ पर हैं — कि अल्लाह सच्चाई के साथ है और झुठलाने वालों का अंजाम बुरा ही होता है, चाहे वे कितनी भी देर तक दुनिया में रहें।
📜 आयत 31-35 — अन-नहल
अनुवाद — अन-नहल 33
सूरा अन-नहल आयत 33 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल) क्या ये (अहले मक्का) इसी बात के मुन्तिज़र…सूरा आयत 33/128 — अन-नहल النحل (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-नहल सुनें, अन-नहल अनुवाद, अन-नहल mp3, अन-नहल pdf. आयत 31–35. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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