अल-कहफ · 61/110
अनुवाद उच्चारण — अल-कहफ
فَلَمَّا بَلَغَا مَجْمَعَ بَيْنِهِمَا نَسِيَا حُوتَهُمَا فَاتَّخَذَ سَبِيلَهُ فِي الْبَحْرِ سَرَبًا ۝٦١
Falammaa balaghaa majma`a bainihimaa nasiyaa hootahumaa fattakhaza sabeelahoo fil bahri sarabaa
📖 हिंदी अर्थ
ख्वाह (अगर मुलाक़ात न हो तो) बरसों यूँ ही चलता जाऊँगा फिर जब ये दोनों उन दोनों दरियाओं के मिलने की जगह पहुँचे तो अपनी (भुनी हुई) मछली छोड़ चले तो उसने दरिया में सुरंग बनाकर अपनी राह ली
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • मजमा' का अर्थ है मिलने की जगह, संगम स्थल।
  • बैनिहिमा का अर्थ है दोनों (समुद्रों) के बीच।
  • नसिया का अर्थ है भूल गए।
  • हूत का अर्थ है मछली।
  • सरबन का अर्थ है सुरंग, भूमिगत रास्ता, या ऐसा रास्ता जिसमें पानी न मिले।

तफसीर:

जब हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) और उनके साथी युवा (यूशा' इब्न नून) उस स्थान पर पहुँचे जहाँ दो समुद्र आपस में मिलते हैं—और यही वह जगह थी जहाँ अल्लाह ने उन्हें हज़रत ख़िज़्र (अलैहिस्सलाम) से मिलने का वादा किया था—तो वहाँ पहुँचकर वे एक चट्टान के पास बैठ गए। उस समय उन्होंने अपनी मछली को भूला दिया, जिसे वे अपने साथ भोजन के रूप में ले गए थे। यह मछली यूशा' के पास थी, और अल्लाह की क़ुदरत से वह मछली ज़िंदा हो गई और समुद्र में कूद पड़ी। उसने समुद्र में अपने लिए एक ऐसा रास्ता बना लिया जो सुरंग की तरह था—पानी उस रास्ते में नहीं मिलता था, और वह रास्ता खुला हुआ था। यह अल्लाह की एक बड़ी निशानी थी, जो इस बात का सबूत थी कि यही वह जगह है जहाँ मूसा (अलैहिस्सलाम) को ख़िज़्र से मिलना है।

इस घटना में हमारे लिए कई सबक हैं। सबसे पहले, यह दिखाती है कि अल्लाह अपने नेक बंदों की राहनुमाई किस तरह करता है और उन्हें अपनी निशानियों से रास्ता दिखाता है। दूसरे, यह हमें सिखाती है कि अल्लाह की क़ुदरत के आगे सारे क़ानून बेकार हैं—वह मछली को ज़िंदा कर सकता है और पानी को रास्ता दे सकता है। तीसरे, यह हमें याद दिलाती है कि इल्म की तलाश में इंसान को थकने नहीं चाहिए, चाहे कितनी ही लंबी मंज़िल क्यों न हो। हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) जैसे महान नबी ने अपने से बड़े इल्म वाले की तलाश में यात्रा की, तो हमें भी इल्म हासिल करने के लिए मेहनत करनी चाहिए।

यह क़िस्सा हमें बताता है कि अल्लाह की निशानियाँ कभी-कभी अनजाने में हमारे सामने आती हैं, लेकिन उन पर ग़ौर करने वाला ही सही रास्ता पाता है। मूसा (अलैहिस्सलाम) और उनके साथी ने मछली को भुला दिया, लेकिन अल्लाह ने उसी भूल को उनके लिए रहनुमाई का ज़रिया बना दिया। यह हमें सिखाता है कि कभी-कभी हमारी कमज़ोरियाँ और भूलें भी अल्लाह की रहमत का ज़रिया बन जाती हैं, बशर्ते हमारा इरादा सच्चा हो और हम अल्लाह पर भरोसा रखें।

इस आयत से हमें यह भी सीख मिलती है कि इल्म की तलाश में निकलने वाले को अल्लाह ज़रूर रास्ता दिखाता है, चाहे वह रास्ता कितना ही मुश्किल क्यों न हो। जिस तरह मछली ने समुद्र में सुरंग जैसा रास्ता बना लिया, उसी तरह अल्लाह अपने बंदों के लिए मुश्किल से मुश्किल हालात में भी रास्ते बना देता है। हमें चाहिए कि हम अपने जीवन में अल्लाह पर भरोसा रखें, उसकी निशानियों पर ग़ौर करें, और इल्म हासिल करने में कभी थकें नहीं। यही वह रास्ता है जो हमें दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी तक पहुँचाता है।

🎧 सुनें

📜 आयत 59-63 — अल-कहफ

59وَتِلْكَ الْقُرَىٰ أَهْلَكْنَاهُمْ لَمَّا ظَلَمُوا وَجَعَلْنَا لِمَهْلِكِهِم مَّوْعِدًا
और ये बस्तियाँ (जिन्हें तुम अपनी ऑंखों से देखते हो) जब उन लोगों ने सरकशी तो हमने उन्हें हलाक कर मारा और हमने उनकी हलाकत की मियाद मुक़र्रर कर दी थी
60وَإِذْ قَالَ مُوسَىٰ لِفَتَاهُ لَا أَبْرَحُ حَتَّىٰ أَبْلُغَ مَجْمَعَ الْبَحْرَيْنِ أَوْ أَمْضِيَ حُقُبًا
(ऐ रसूल) वह वाक़या याद करो जब मूसा खिज़्र की मुलाक़ात को चले तो अपने जवान वसी यूशा से बोले कि जब तक में दोनों दरियाओं के मिलने की जगह न पहुँच जाऊँ (चलने से) बाज़ न आऊँगा
61فَلَمَّا بَلَغَا مَجْمَعَ بَيْنِهِمَا نَسِيَا حُوتَهُمَا فَاتَّخَذَ سَبِيلَهُ فِي الْبَحْرِ سَرَبًا
ख्वाह (अगर मुलाक़ात न हो तो) बरसों यूँ ही चलता जाऊँगा फिर जब ये दोनों उन दोनों दरियाओं के मिलने की जगह पहुँचे तो अपनी (भुनी हुई) मछली छोड़ चले तो उसने दरिया में सुरंग बनाकर अपनी राह ली
62فَلَمَّا جَاوَزَا قَالَ لِفَتَاهُ آتِنَا غَدَاءَنَا لَقَدْ لَقِينَا مِن سَفَرِنَا هَٰذَا نَصَبًا
फिर जब कुछ और आगे बढ़ गए तो मूसा ने अपने जवान (वसी) से कहा (अजी हमारा नाश्ता तो हमें दे दो हमारे (आज के) इस सफर से तो हमको बड़ी थकन हो गई
63قَالَ أَرَأَيْتَ إِذْ أَوَيْنَا إِلَى الصَّخْرَةِ فَإِنِّي نَسِيتُ الْحُوتَ وَمَا أَنسَانِيهُ إِلَّا الشَّيْطَانُ أَنْ أَذْكُرَهُ ۚ وَاتَّخَذَ سَبِيلَهُ فِي الْبَحْرِ عَجَبًا
(यूशा ने) कहा क्या आप ने देखा भी कि जब हम लोग (दरिया के किनारे) उस पत्थर के पास ठहरे तो मै (उसी जगह) मछली छोड़ आया और मुझे आप से उसका ज़िक्र करना शैतान ने भुला दिया और मछली ने अजीब तरह से दरिया में अपनी राह ली
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अनुवाद — अल-कहफ 61

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Tuesday, August 18, 2026

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