अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- मजमा' का अर्थ है मिलने की जगह, संगम स्थल।
- बैनिहिमा का अर्थ है दोनों (समुद्रों) के बीच।
- नसिया का अर्थ है भूल गए।
- हूत का अर्थ है मछली।
- सरबन का अर्थ है सुरंग, भूमिगत रास्ता, या ऐसा रास्ता जिसमें पानी न मिले।
तफसीर:
जब हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) और उनके साथी युवा (यूशा' इब्न नून) उस स्थान पर पहुँचे जहाँ दो समुद्र आपस में मिलते हैं—और यही वह जगह थी जहाँ अल्लाह ने उन्हें हज़रत ख़िज़्र (अलैहिस्सलाम) से मिलने का वादा किया था—तो वहाँ पहुँचकर वे एक चट्टान के पास बैठ गए। उस समय उन्होंने अपनी मछली को भूला दिया, जिसे वे अपने साथ भोजन के रूप में ले गए थे। यह मछली यूशा' के पास थी, और अल्लाह की क़ुदरत से वह मछली ज़िंदा हो गई और समुद्र में कूद पड़ी। उसने समुद्र में अपने लिए एक ऐसा रास्ता बना लिया जो सुरंग की तरह था—पानी उस रास्ते में नहीं मिलता था, और वह रास्ता खुला हुआ था। यह अल्लाह की एक बड़ी निशानी थी, जो इस बात का सबूत थी कि यही वह जगह है जहाँ मूसा (अलैहिस्सलाम) को ख़िज़्र से मिलना है।
इस घटना में हमारे लिए कई सबक हैं। सबसे पहले, यह दिखाती है कि अल्लाह अपने नेक बंदों की राहनुमाई किस तरह करता है और उन्हें अपनी निशानियों से रास्ता दिखाता है। दूसरे, यह हमें सिखाती है कि अल्लाह की क़ुदरत के आगे सारे क़ानून बेकार हैं—वह मछली को ज़िंदा कर सकता है और पानी को रास्ता दे सकता है। तीसरे, यह हमें याद दिलाती है कि इल्म की तलाश में इंसान को थकने नहीं चाहिए, चाहे कितनी ही लंबी मंज़िल क्यों न हो। हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) जैसे महान नबी ने अपने से बड़े इल्म वाले की तलाश में यात्रा की, तो हमें भी इल्म हासिल करने के लिए मेहनत करनी चाहिए।
यह क़िस्सा हमें बताता है कि अल्लाह की निशानियाँ कभी-कभी अनजाने में हमारे सामने आती हैं, लेकिन उन पर ग़ौर करने वाला ही सही रास्ता पाता है। मूसा (अलैहिस्सलाम) और उनके साथी ने मछली को भुला दिया, लेकिन अल्लाह ने उसी भूल को उनके लिए रहनुमाई का ज़रिया बना दिया। यह हमें सिखाता है कि कभी-कभी हमारी कमज़ोरियाँ और भूलें भी अल्लाह की रहमत का ज़रिया बन जाती हैं, बशर्ते हमारा इरादा सच्चा हो और हम अल्लाह पर भरोसा रखें।
इस आयत से हमें यह भी सीख मिलती है कि इल्म की तलाश में निकलने वाले को अल्लाह ज़रूर रास्ता दिखाता है, चाहे वह रास्ता कितना ही मुश्किल क्यों न हो। जिस तरह मछली ने समुद्र में सुरंग जैसा रास्ता बना लिया, उसी तरह अल्लाह अपने बंदों के लिए मुश्किल से मुश्किल हालात में भी रास्ते बना देता है। हमें चाहिए कि हम अपने जीवन में अल्लाह पर भरोसा रखें, उसकी निशानियों पर ग़ौर करें, और इल्म हासिल करने में कभी थकें नहीं। यही वह रास्ता है जो हमें दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी तक पहुँचाता है।
📜 आयत 59-63 — अल-कहफ
अनुवाद — अल-कहफ 61
सूरा अल-कहफ आयत 61 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ख्वाह (अगर मुलाक़ात न हो तो) बरसों यूँ ही चलता…सूरा आयत 61/110 — अल-कहफ الكهف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-कहफ सुनें, अल-कहफ अनुवाद, अल-कहफ mp3, अल-कहफ pdf. आयत 59–63. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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