Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- فَلَمَّا جَاوَزَا – जब वे दोनों (मूसा और उनके ख़ादिम) उस जगह से आगे निकल गए।
- لِفَتَاهُ – अपने ख़ादिम (सेवक) से।
- آتِنَا غَدَاءَنَا – हमारा नाश्ता (सुबह का खाना) हमें दे।
- نَصَبًا – थकान और कठिनाई।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) और उनके साथी उस चट्टान से आगे निकल गए, जहाँ उन्होंने मछली को ज़िंदा होकर समुद्र में जाते हुए देखा था, तो उन्हें भूख महसूस हुई। यह एक स्वाभाविक एहसास था, क्योंकि उन्होंने लंबा सफ़र तय किया था और थकान भी उन पर हावी हो रही थी। उस समय हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) ने अपने ख़ादिम से कहा: "हमारा नाश्ता लाओ, हमें इस सफ़र में बहुत थकान हुई है।"
यहाँ एक अहम बात यह है कि हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) ने उस जगह से आगे बढ़ने के बाद ही थकान महसूस की, जबकि उस जगह पर उन्हें मछली के ज़िंदा होकर समुद्र में जाने का संकेत मिला था, लेकिन वे उस समय उसे भूल गए थे। अल्लाह तआला ने यह इसलिए किया ताकि जब वे थकान की वजह से खाना माँगें, तो उन्हें मछली का वाक़िया याद आए और वे उस जगह वापस लौटें जहाँ उन्हें एक बहुत बड़ी निशानी मिलने वाली थी।
यह हमारे लिए एक बहुत बड़ा सबक़ है कि अल्लाह तआला अपने बंदों की ज़िंदगी में ऐसे हालात पैदा करता है जो उन्हें सही रास्ते की तरफ ले जाते हैं। कभी-कभी हमें लगता है कि हमारी मुश्किलें और थकान बेकार हैं, लेकिन अल्लाह की योजना बहुत खूबसूरत होती है। हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) की यह थकान और भूख ही वह ज़रिया बनी जिससे उन्हें एक बहुत बड़ी इल्मी दौलत (ज्ञान) हासिल करने का मौक़ा मिला।
इस आयत से हमें यह भी सीख मिलती है कि सफ़र में खाने-पीने का इंतज़ाम करना चाहिए और अपने साथियों से मदद माँगने में कोई हर्ज नहीं है। हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) ने अपने ख़ादिम से बड़े अच्छे अंदाज़ में कहा, जो हमें सिखाता है कि आपसी मोहब्बत और नर्मी से बात करनी चाहिए।
अल्लाह हमें अपनी राह में मेहनत और मुश्किलों का सामना करने की तौफ़ीक़ दे और हमें यक़ीन दिलाए कि हर मुश्किल के बाद आसानी है। आमीन।
📜 आयत 60-64 — सूरा अल-कहफ
अनुवाद — अल-कहफ 62
सूरा अल-कहफ आयत 62 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : फिर जब कुछ और आगे बढ़ गए तो मूसा ने…सूरा आयत 62/110 — सूरा अल-कहफ الكهف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-कहफ सुनें, सूरा अल-कहफ अनुवाद, सूरा अल-कहफ mp3, सूरा अल-कहफ pdf. आयत 60–64. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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