अल-कहफ · 72/110
अनुवाद उच्चारण — अल-कहफ
قَالَ أَلَمْ أَقُلْ إِنَّكَ لَن تَسْتَطِيعَ مَعِيَ صَبْرًا ۝٧٢
Qaala alam aqul innaka lan tastatee`a ma`iya sabraa
📖 हिंदी अर्थ
कि लोगों को डुबा दीजिए ये तो आप ने बड़ी अजीब बात की है-ख़िज्र ने कहा क्या मैने आप से (पहले ही) न कह दिया था

🎧 सुनें
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • لَن تَسْتَطِيعَ — तुम कभी सहन नहीं कर सकोगे
  • صَبْرًا — धैर्य, सब्र

तफ़सीर (व्याख्या):

जब हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) ने उस नाव को छेदते देखा, जिसमें सवार लोगों को डूबने का खतरा पैदा हो गया था, तो वे अपनी स्वाभाविक प्रतिक्रिया में रुक नहीं सके और एतराज़ किया। इस पर हज़रत ख़िज़र (अलैहिस्सलाम) ने उन्हें वही बात याद दिलाई जो उन्होंने पहले ही कह दी थी: "क्या मैंने तुमसे नहीं कहा था कि तुम मेरे साथ धैर्य नहीं रख सकते?"

यह एक नर्म लेकिन स्पष्ट अनुस्मारक था — जैसे कोई शिक्षक अपने शिष्य को प्यार से समझाए कि "मैंने तुम्हें पहले ही बता दिया था।" हज़रत ख़िज़र की यह बात किसी तरह की झुंझलाहट या गुस्से से नहीं, बल्कि एक गहरी शिक्षा और हिकमत से भरी हुई थी। वे मूसा (अलैहिस्सलाम) को यह समझाना चाहते थे कि जो कुछ वे कर रहे हैं, वह अल्लाह के हुक्म से है, और उसके पीछे ऐसी मसलहतें (भलाइयाँ) हैं जिन्हें ज़ाहिरी तौर पर नहीं देखा जा सकता।

इस आयत में हमारे लिए एक बहुत बड़ी सीख है — कभी-कभी अल्लाह की तरफ से आने वाले हालात या फैसले हमें अजीब या नापसंद लगते हैं, लेकिन उनमें छिपी हुई भलाई होती है। जिस तरह हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) जैसे महान पैग़म्बर को भी सब्र की परीक्षा से गुज़रना पड़ा, उसी तरह हमें भी ज़िंदगी के उतार-चढ़ाव में सब्र और भरोसे की ज़रूरत है। अल्लाह पर यक़ीन रखें कि वह जो करता है, बेहतरी के लिए ही करता है — भले ही हमारी समझ उस तक न पहुँचे।

यह क़िस्सा हमें सिखाता है कि इल्म (ज्ञान) के कितने ही दरजे होते हैं। एक इंसान कितना भी बड़ा आलिम क्यों न हो, कुछ ऐसी बातें होती हैं जो उसकी समझ से परे होती हैं। इसलिए अल्लाह के फैसलों पर भरोसा रखना और सब्र करना ही मोमिन की पहचान है।



📜 आयत 70-74 — अल-कहफ

70قَالَ فَإِنِ اتَّبَعْتَنِي فَلَا تَسْأَلْنِي عَن شَيْءٍ حَتَّىٰ أُحْدِثَ لَكَ مِنْهُ ذِكْرًا
और मै आपके किसी हुक्म की नाफरमानी न करुँगा खिज्र ने कहा अच्छा तो अगर आप को मेरे साथ रहना है तो जब तक मै खुद आपसे किसी बात का ज़िक्र न छेडँ
71فَانطَلَقَا حَتَّىٰ إِذَا رَكِبَا فِي السَّفِينَةِ خَرَقَهَا ۖ قَالَ أَخَرَقْتَهَا لِتُغْرِقَ أَهْلَهَا لَقَدْ جِئْتَ شَيْئًا إِمْرًا
आप मुझसे किसी चीज़ के बारे में न पूछियेगा ग़रज़ ये दोनो (मिलकर) चल खड़े हुए यहाँ तक कि (एक दरिया में) जब दोनों कश्ती में सवार हुए तो ख़िज्र ने कश्ती में छेद कर दिया मूसा ने कहा (आप ने तो ग़ज़ब कर दिया) क्या कश्ती में इस ग़रज़ से सुराख़ किया है
72قَالَ أَلَمْ أَقُلْ إِنَّكَ لَن تَسْتَطِيعَ مَعِيَ صَبْرًا
कि लोगों को डुबा दीजिए ये तो आप ने बड़ी अजीब बात की है-ख़िज्र ने कहा क्या मैने आप से (पहले ही) न कह दिया था
73قَالَ لَا تُؤَاخِذْنِي بِمَا نَسِيتُ وَلَا تُرْهِقْنِي مِنْ أَمْرِي عُسْرًا
कि आप मेरे साथ हरगिज़ सब्र न कर सकेगे-मूसा ने कहा अच्छा जो हुआ सो हुआ आप मेरी गिरफत न कीजिए और मुझ पर मेरे इस मामले में इतनी सख्ती न कीजिए
74فَانطَلَقَا حَتَّىٰ إِذَا لَقِيَا غُلَامًا فَقَتَلَهُ قَالَ أَقَتَلْتَ نَفْسًا زَكِيَّةً بِغَيْرِ نَفْسٍ لَّقَدْ جِئْتَ شَيْئًا نُّكْرًا
(ख़ैर ये तो हो गया) फिर दोनों के दोनों आगे चले यहाँ तक कि दोनों एक लड़के से मिले तो उस बन्दे ख़ुदा ने उसे जान से मार डाला मूसा ने कहा (ऐ माज़ अल्लाह) क्या आपने एक मासूम शख़्श को मार डाला और वह भी किसी के (ख़ौफ के) बदले में नहीं आपने तो यक़ीनी एक अजीब हरकत की
अल-कहफकुरान सूची
110आयत
मक्कीRevelation
72आयत

अनुवाद — अल-कहफ 72

सूरा अल-कहफ आयत 72 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : कि लोगों को डुबा दीजिए ये तो आप ने बड़ी…

सूरा आयत 72/110 — अल-कहफ الكهف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-कहफ सुनें, अल-कहफ अनुवाद, अल-कहफ mp3, अल-कहफ pdf. आयत 70–74. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए