अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- مَقَامًا: ठहरने की जगह, निवास स्थान।
- نَدِيًّا: सभा, मजलिस, बैठक की जगह।
तफसीर:
जब उनके सामने हमारी स्पष्ट आयतें पढ़ी जाती हैं, जो सत्य और मार्गदर्शन को उजागर करती हैं, तो काफिर लोग ईमान लाने वालों से घमंड और अहंकार के साथ कहते हैं: "हमारे और तुम्हारे इन दोनों समूहों में से कौन सा समूह दुनिया में बेहतर ठिकाने वाला और अधिक सुंदर सभा-स्थल वाला है?"
यह वही हालत थी जो मक्का के मुशरिकों ने अपनाई थी। वे अपने बालों में कंघी करते, तेल लगाते, बेहतरीन कपड़े पहनते और शानदार मजलिसों का आयोजन करते थे। दूसरी ओर, ईमान लाने वाले साथी—जिनमें से कई गरीब और साधारण जीवन जीने वाले थे—उन्हें देखकर वे मुशरिक उनका मज़ाक उड़ाते और उन्हें नीचा दिखाने के लिए यह सवाल करते थे। उनका उद्देश्य यह था कि वे यह साबित करें कि उनका धर्म सही है क्योंकि उनकी दुनियावी हालत बेहतर है, जबकि यह सोच पूरी तरह गलत है।
इस आयत में अल्लाह तआला हमें सिखाता है कि दुनिया की चमक-दमक, ऐशो-आराम और सांसारिक सुख-सुविधाएं किसी के सच्चे होने का पैमाना नहीं हैं। असली कसौटी तो ईमान, अच्छे आचरण और अल्लाह की रज़ा है। अल्लाह ने दुनिया में कई नबियों को गरीबी और मुश्किलों में रखा, जबकि काफिरों को खूब सुख-सुविधाएं दीं—यह उनकी परीक्षा है, न कि उनकी बड़ाई।
इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि हमें दुनिया के झूठे मापदंडों से धोखा नहीं खाना चाहिए। किसी व्यक्ति की असली इज़्ज़त अल्लाह के पास उसके ईमान और तक़्वा से है, न कि उसकी दौलत, ठाठ-बाठ या सामाजिक हैसियत से। अल्लाह का दीन सच्चा है, चाहे दुनिया वाले उसे कितना भी हेय समझें। हमें अपने ईमान पर मज़बूती से क़ायम रहना चाहिए और दुनिया की चमक-दमक को अपने दिल में जगह नहीं देनी चाहिए। याद रखें, आख़िरत की कामयाबी ही असली कामयाबी है, और वह उन्हीं को मिलेगी जो अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान लाए।
📜 आयत 71-75 — मरियम
अनुवाद — मरियम 73
सूरा मरियम आयत 73 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जब हमारी वाज़ेए रौशन आयतें उनके सामने पढ़ी जाती…सूरा आयत 73/98 — मरियम مريم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: मरियम सुनें, मरियम अनुवाद, मरियम mp3, मरियम pdf. आयत 71–75. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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