Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
بَلَىٰ مَنْ أَسْلَمَ وَجْهَهُ لِلَّهِ وَهُوَ مُحْسِنٌ فَلَهُ أَجْرُهُ عِندَ رَبِّهِ وَلَا خَوْفٌ عَلَيْهِمْ وَلَا هُمْ يَحْزَنُونَ
शब्दों के अर्थ:
- أَسْلَمَ وَجْهَهُ: अपने चेहरे को अल्लाह के प्रति समर्पित कर दिया, अर्थात अपने आप को पूर्ण रूप से अल्लाह के हवाले कर दिया और केवल उसी की ओर रुख किया।
- مُحْسِنٌ: जो अपने अमल (कर्म) को अच्छी तरह से करे, यानी ईमान के साथ नेक काम करे और अल्लाह के आदेशों का पालन करे।
- أَجْرُهُ: उसका बदला या प्रतिफल।
- لَا خَوْفٌ عَلَيْهِمْ وَلَا هُمْ يَحْزَنُونَ: उन्हें न किसी चीज़ का डर होगा और न ही वे किसी बात पर दुखी होंगे।
तफसीर (व्याख्या):
यह आयत उन लोगों के दावे का उत्तर देती है जो कहते थे कि जन्नत (स्वर्ग) केवल यहूदियों या ईसाइयों के लिए है। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि ऐसा नहीं है, बल्कि जन्नत में वही लोग प्रवेश करेंगे जो अपने आप को पूरी तरह अल्लाह के सामने समर्पित कर दें, यानी अपने दिल और अपने कर्मों को केवल अल्लाह के लिए खालिस कर लें। साथ ही, वे "मुहसिन" हों, यानी अपने अमल को अच्छी तरह से करें, अल्लाह के आदेशों का पालन करें और उसके रसूल (मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की सुन्नत (तरीके) का अनुसरण करें। यही वह लोग हैं जिन्हें उनके रब के पास उनका पूरा बदला मिलेगा, और यह बदला जन्नत है। उन्हें आख़िरत (परलोक) के किसी भी मामले में कोई डर नहीं होगा, और न ही वे दुनिया की उन चीज़ों पर दुखी होंगे जो उन्होंने छोड़ दीं, क्योंकि उन्हें अल्लाह से जो कुछ मिलेगा वह उनके लिए सबसे अच्छा होगा। यह वर्णन पैगंबर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के आने के बाद केवल मुसलमानों में ही पूरा होता है, क्योंकि इस्लाम ही वह सच्चा दीन है जो अल्लाह को पसंद है।
फ़ायदे (लाभ):
- इस आयत से पता चलता है कि अल्लाह के पास किसी जाति या समुदाय का कोई विशेष अधिकार नहीं है, बल्कि असली कसौटी ईमान और नेक अमल है। यह इस्लाम की सार्वभौमिकता को दर्शाता है, जो हर इंसान को बिना किसी भेदभाव के अपनाने का न्योता देता है।
- सच्चा इस्लाम वही है जिसमें इंसान अपने अमल को सिर्फ अल्लाह के लिए खालिस करे और अपने जीवन को अल्लाह के आदेशों और उसके रसूल के तरीके के अनुसार ढाले। यही वह रास्ता है जो इंसान को सुकून और शांति देता है।
- इस आयत में मोमिनों को खुशखबरी दी गई है कि उन्हें किसी बात का डर नहीं होगा और न ही वे दुखी होंगे। यह एक ऐसा वादा है जो इंसान के दिल को तसल्ली देता है और उसे अल्लाह की राह में मेहनत करने की ताकत देता है।
- यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की रहमत और उसका इनाम किसी खास गिरोह के लिए नहीं है, बल्कि हर वह इंसान जो सच्चे दिल से अल्लाह की ओर रुख करे और नेक काम करे, वह उसका हकदार है। यह बात लोगों को इस्लाम की ओर आकर्षित करती है, क्योंकि यहाँ कोई जातिवाद या भेदभाव नहीं है।
📜 आयत 110-114 — सूरा अल-बकरा
अनुवाद — अल-बकरा 112
सूरा अल-बकरा आयत 112 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : हाँ अलबत्ता जिस शख्स ने खुदा के आगे अपना सर…सूरा आयत 112/286 — सूरा अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-बकरा सुनें, सूरा अल-बकरा अनुवाद, सूरा अल-बकरा mp3, सूरा अल-बकरा pdf. आयत 110–114. हिंदी अर्थ: اردو.
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Monday, September 28, 2026
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