Mishary Rashid Alafasy
✓
Mahmoud Khalil Al-Husary
✓
Abdurrahman As-Sudais
✓
Mohamed Siddiq Al-Minshawi
✓
Abdul Basit Abdul Samad
✓
Ali Al-Hudhaify
✓
Ahmed ibn Ali al-Ajamy
✓
Abu Bakr Ash-Shaatree
✓
Muhammad Ayyoub
✓
Abdullah Basfar
✓
Abdullah Al-Juhani
✓
Maher Al Muaiqly
✓
अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- بَلَدًا آمِنًا: एक सुरक्षित शहर/भूभाग, जहाँ निवासी भय से मुक्त हों।
- مِنَ الثَّمَرَاتِ: विभिन्न प्रकार के फल और उपज।
- فَأُمَتِّعُهُ قَلِيلًا: मैं उसे थोड़े समय के लिए (दुनिया में) सुख-सामग्री दूँगा।
- أَضْطَرُّهُ: मैं उसे विवश करके (मजबूरन) ले जाऊँगा।
- بِئْسَ الْمَصِيرُ: बहुत बुरा ठिकाना/अंतिम परिणाम।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ नबी! उस समय को याद करो जब हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) ने अपने रब से दुआ करते हुए कहा: "ऐ मेरे पालनहार! इस स्थान (मक्का) को एक सुरक्षित शहर बना दे, जहाँ लोग भय और आतंक से मुक्त होकर शांति से रहें। और इसके निवासियों को तरह-तरह के फल और आजीविका प्रदान कर — विशेष रूप से उन लोगों को जो तुझ पर और आख़िरत के दिन पर ईमान रखते हैं।"
यह दुआ हज़रत इब्राहीम ने उस समय की थी जब उन्होंने अपने परिवार को एक बंजर, खेती-योग्य न होने वाली घाटी में छोड़ा था। वे जानते थे कि केवल अल्लाह ही इस निर्जन स्थान को आबाद कर सकता है और यहाँ के लोगों को रोज़ी दे सकता है। इसलिए उन्होंने अपनी दुआ में ईमानवालों के लिए विशेष रूप से रोज़ी की प्रार्थना की।
अल्लाह ने उनकी दुआ का उत्तर देते हुए फ़रमाया: "और जो कोई कुफ़्र करेगा (अर्थात ईमान नहीं लाएगा), तो मैं उसे भी दुनिया में थोड़े दिनों के लिए सुख-सामग्री दूँगा — उसे खाने-पीने और जीवन के साधन दूँगा — लेकिन यह सब कुछ बहुत ही थोड़े समय के लिए है। फिर आख़िरत में मैं उसे विवश करके आग के अज़ाब की ओर ले जाऊँगा। और वह (आग) कितनी बुरी जगह है, जहाँ वह हमेशा के लिए रुकेगा!"
इस आयत में एक बड़ी सीख है कि अल्लाह की रहमत और रोज़ी दुनिया में सबको मिलती है — चाहे वह मोमिन हो या काफ़िर। लेकिन आख़िरत की सफलता और सच्ची नेमतें केवल ईमानवालों के लिए हैं। दुनिया की सुख-सुविधाएँ चाहे कितनी भी लंबी क्यों न लगें, वे अंततः बहुत थोड़ी और क्षणभंगुर हैं। जबकि आख़िरत का अज़ाब स्थायी और भयानक है।
यह दुआ हमें सिखाती है कि हमें अपनी दुआओं में दुनिया की भलाई के साथ-साथ आख़िरत की भलाई भी माँगनी चाहिए। और यह भी कि एक सच्चा मुसलमान वह है जो अपने भाइयों के लिए भी भलाई की दुआ करे, जैसा कि हज़रत इब्राहीम ने ईमानवालों के लिए विशेष रूप से दुआ की। अल्लाह हमें सच्चे ईमान की तौफ़ीक़ दे और हमें आख़िरत के अज़ाब से बचाए। आमीन।
📜 आयत 124-128 — सूरा अल-बकरा
अनुवाद — अल-बकरा 126
सूरा अल-बकरा आयत 126 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (ऐ रसूल वह वक्त भी याद दिलाओ) जब इबराहीम…सूरा आयत 126/286 — सूरा अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-बकरा सुनें, सूरा अल-बकरा अनुवाद, सूरा अल-बकरा mp3, सूरा अल-बकरा pdf. आयत 124–128. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Wednesday, September 30, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


