Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- وَقَاتِلُوا: तुम लड़ो, जिहाद करो।
- فِي سَبِيلِ اللَّهِ: अल्लाह के मार्ग में, यानी उसकी राह में जो उसकी इबादत और दीन की मदद हो।
- الَّذِينَ يُقَاتِلُونَكُمْ: जो लोग तुमसे लड़ते हैं (यानी जो तुम पर हमला करते हैं)।
- وَلَا تَعْتَدُوا: हद से आगे न बढ़ो, ज़ुल्म मत करो।
- الْمُعْتَدِينَ: हद से बढ़ने वाले, ज़ालिम, जो अल्लाह की सीमाओं का उल्लंघन करते हैं।
तफसीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला मुसलमानों को आदेश देता है कि वे उसके मार्ग में उन लोगों से लड़ें जो उनसे लड़ते हैं, यानी जो काफ़िर तुम पर हमला करते हैं और तुम्हें तुम्हारे दीन से रोकना चाहते हैं, उनका मुक़ाबला करो। यह आदेश शुरुआती दौर में दिया गया था जब मुसलमानों को केवल उन्हीं से लड़ने की इजाज़त दी गई जो उनसे जंग करते थे। लेकिन साथ ही अल्लाह ने साफ़ तौर पर मना किया है कि तुम हद से आगे बढ़ो — यानी जंग के दौरान उन लोगों को न मारो जिन्हें मारना जायज़ नहीं है, जैसे औरतें, बच्चे, बूढ़े, और वे लोग जो जंग में हिस्सा नहीं ले रहे हों। इसके अलावा, किसी शहीद या मुर्दे का अंग काटना (मुस्ला करना), चोरी करना (ग़ुलूल), और जो अल्लाह ने हराम किया है उसे हलाल ठहराना — ये सब हद से बढ़ने की क़िस्में हैं। अल्लाह ने साफ़ कहा कि वह उन लोगों को पसंद नहीं करता जो उसकी सीमाओं का उल्लंघन करते हैं और ज़ुल्म व ज़्यादती करते हैं। इसलिए जिहाद सिर्फ़ अल्लाह की राह में, उसके दीन की सरबुलंदी के लिए होना चाहिए, न कि किसी दुनियावी मक़सद या ज़ुल्म के लिए।
फ़ायदे (उपदेश):
- इस आयत से पता चलता है कि इस्लाम में जंग सिर्फ़ आत्मरक्षा और दीन की हिफ़ाज़त के लिए है, न कि ज़ुल्म फैलाने या दुनिया हासिल करने के लिए।
- अल्लाह ने जंग के दौरान भी इंसाफ़ और रहम का हुक्म दिया है — बेगुनाहों, औरतों, बच्चों और बूढ़ों को नुक़सान न पहुँचाना। यह इस्लाम की पाकीज़गी और इंसानियत की मिसाल है।
- मुसलमान को चाहिए कि हर मामले में अल्लाह की सीमाओं का पूरा ख़याल रखे, क्योंकि अल्लाह हद से बढ़ने वालों से मुहब्बत नहीं करता — यह एक बड़ी चेतावनी है।
- यह आयत हमें सिखाती है कि जंग भी अल्लाह की राह में होनी चाहिए, यानी नीयत साफ़ हो और मक़सद सिर्फ़ अल्लाह की रज़ा हो, तभी वह जंग अल्लाह के यहाँ क़ुबूल है।
- इस्लाम दुश्मनों के साथ भी इंसाफ़ का हुक्म देता है — यही वजह है कि इस्लाम में जंग के आदाब (नियम) बहुत सख़्ती से सिखाए गए हैं, ताकि ज़ुल्म और फ़साद न फैले।
📜 आयत 188-192 — सूरा अल-बकरा
अनुवाद — अल-बकरा 190
सूरा अल-बकरा आयत 190 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जो लोग तुम से लड़े तुम (भी) ख़ुदा की…सूरा आयत 190/286 — सूरा अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-बकरा सुनें, सूरा अल-बकरा अनुवाद, सूरा अल-बकरा mp3, सूरा अल-बकरा pdf. आयत 188–192. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Wednesday, September 30, 2026
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