अल-बकरा · 63/286
अनुवाद उच्चारण — अल-बकरा
وَإِذْ أَخَذْنَا مِيثَاقَكُمْ وَرَفَعْنَا فَوْقَكُمُ الطُّورَ خُذُوا مَا آتَيْنَاكُم بِقُوَّةٍ وَاذْكُرُوا مَا فِيهِ لَعَلَّكُمْ تَتَّقُونَ ۝٦٣
Wa iz akhaznaa meesaaqakum wa rafa`naa fawqakumut Toora khuzoo maaa aatainaakum biquwwatinw wazkuroo maa feehi la`allakum tattaqoon
📖 हिंदी अर्थ
और (वह वक्त याद करो) जब हमने (तामीले तौरेत) का तुमसे एक़रार कर लिया और हमने तुम्हारे सर पर तूर से (पहाड़ को) लाकर लटकाया और कह दिया कि तौरेत जो हमने तुमको दी है उसको मज़बूत पकड़े रहो और जो कुछ उसमें है उसको याद रखो
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • मी़साक़: पक्का और दृढ़ वचन, अहद।
  • तूर: पहाड़, विशेष रूप से सीना पर्वत (जो मिस्र और फिलिस्तीन के बीच स्थित है)।
  • बिक़ुव्वतिन: पूरी ताक़त, गंभीरता और लगन के साथ।
  • तक़वा: अल्लाह का भय रखते हुए उसकी नाफ़रमानी से बचना।

तफ़सीर:

ऐ बनी इसराईल! उस वक़्त को याद करो जब हमने तुमसे पक्का अहद लिया था कि तुम अल्लाह पर ईमान लाओगे, उसकी इबादत में किसी को शरीक नहीं करोगे और तौरात पर अमल करोगे। इस अहद को और मज़बूत करने के लिए हमने तुम्हारे सिरों पर तूर (पहाड़) को उठा दिया था, जैसे कोई सख़्त हुक्म देने वाला अपने मातहतों पर दबाव डालता है। हमने कहा: "इस किताब (तौरात) को पूरी ताक़त, गंभीरता और लगन के साथ पकड़ो, इसमें जो कुछ है उसे सीखो, याद रखो और उस पर अमल करो।" यह सब इसलिए था कि तुम अल्लाह के अज़ाब से बच सको और उसकी नाराज़गी से ख़ुद को महफ़ूज़ रख सको। यह वह मौक़ा था जब तुमने यह अहद क़ुबूल किया था, लेकिन बाद में तुमने इसकी ख़िलाफ़वरज़ी की।

फ़ायदे:

  1. अल्लाह की नेमतों को याद करना ईमान की निशानी है और इससे अल्लाह का शुक्र अदा करने की तौफ़ीक़ मिलती है।
  2. दीन के मामले में सुस्ती और काहिली नहीं होनी चाहिए; किताबुल्लाह को पूरी ताक़त और लगन के साथ पकड़ना चाहिए।
  3. अल्लाह की तरफ़ से दी गई हिदायत पर अमल करना ही तक़वा है, और तक़वा ही इंसान को दुनिया और आख़िरत की मुसीबतों से बचाता है।
  4. अल्लाह अपने बंदों पर रहम करने वाला है, वह उन्हें सीधे रास्ते पर लाने के लिए हर ज़रिया इस्तेमाल करता है, चाहे वह नरमी हो या सख़्ती।
  5. अहद और वचन को पूरा करना अल्लाह के नज़दीक बहुत अहम है; जो लोग अहद तोड़ते हैं, वह अल्लाह के अज़ाब के हक़दार बनते हैं।
🎧 सुनें

📜 आयत 61-65 — अल-बकरा

61وَإِذْ قُلْتُمْ يَا مُوسَىٰ لَن نَّصْبِرَ عَلَىٰ طَعَامٍ وَاحِدٍ فَادْعُ لَنَا رَبَّكَ يُخْرِجْ لَنَا مِمَّا تُنبِتُ الْأَرْضُ مِن بَقْلِهَا وَقِثَّائِهَا وَفُومِهَا وَعَدَسِهَا وَبَصَلِهَا ۖ قَالَ أَتَسْتَبْدِلُونَ الَّذِي هُوَ أَدْنَىٰ بِالَّذِي هُوَ خَيْرٌ ۚ اهْبِطُوا مِصْرًا فَإِنَّ لَكُم مَّا سَأَلْتُمْ ۗ وَضُرِبَتْ عَلَيْهِمُ الذِّلَّةُ وَالْمَسْكَنَةُ وَبَاءُوا بِغَضَبٍ مِّنَ اللَّهِ ۗ ذَٰلِكَ بِأَنَّهُمْ كَانُوا يَكْفُرُونَ بِآيَاتِ اللَّهِ وَيَقْتُلُونَ النَّبِيِّينَ بِغَيْرِ الْحَقِّ ۗ ذَٰلِكَ بِمَا عَصَوا وَّكَانُوا يَعْتَدُونَ
(और वह वक्त भी याद करो) जब तुमने मूसा से कहा कि ऐ मूसा हमसे एक ही खाने पर न रहा जाएगा तो आप हमारे लिए अपने परवरदिगार से दुआ कीजिए कि जो चीज़े ज़मीन से उगती है जैसे साग पात तरकारी और ककड़ी और गेहूँ या (लहसुन) और मसूर और प्याज़ (मन व सलवा) की जगह पैदा करें (मूसा ने) कहा क्या तुम ऐसी चीज़ को जो हर तरह से बेहतर है अदना चीज़ से बदलन चाहते हो तो किसी शहर में उतर पड़ो फिर तुम्हारे लिए जो तुमने माँगा है सब मौजूद है और उन पर रूसवाई और मोहताजी की मार पड़ी और उन लोगों ने क़हरे खुदा की तरफ पलटा खाया, ये सब इस सबब से हुआ कि वह लोग खुदा की निशानियों से इन्कार करते थे और पैग़म्बरों को नाहक शहीद करते थे, और इस वजह से (भी) कि वह नाफ़रमानी और सरकशी किया करते थे
62إِنَّ الَّذِينَ آمَنُوا وَالَّذِينَ هَادُوا وَالنَّصَارَىٰ وَالصَّابِئِينَ مَنْ آمَنَ بِاللَّهِ وَالْيَوْمِ الْآخِرِ وَعَمِلَ صَالِحًا فَلَهُمْ أَجْرُهُمْ عِندَ رَبِّهِمْ وَلَا خَوْفٌ عَلَيْهِمْ وَلَا هُمْ يَحْزَنُونَ
बेशक मुसलमानों और यहूदियों और नसरानियों और ला मज़हबों में से जो कोई खुदा और रोज़े आख़िरत पर ईमान लाए और अच्छे-अच्छे काम करता रहे तो उन्हीं के लिए उनका अज्र व सवाब उनके खुदा के पास है और न (क़यामत में) उन पर किसी का ख़ौफ होगा न वह रंजीदा दिल होंगे
63وَإِذْ أَخَذْنَا مِيثَاقَكُمْ وَرَفَعْنَا فَوْقَكُمُ الطُّورَ خُذُوا مَا آتَيْنَاكُم بِقُوَّةٍ وَاذْكُرُوا مَا فِيهِ لَعَلَّكُمْ تَتَّقُونَ
और (वह वक्त याद करो) जब हमने (तामीले तौरेत) का तुमसे एक़रार कर लिया और हमने तुम्हारे सर पर तूर से (पहाड़ को) लाकर लटकाया और कह दिया कि तौरेत जो हमने तुमको दी है उसको मज़बूत पकड़े रहो और जो कुछ उसमें है उसको याद रखो
64ثُمَّ تَوَلَّيْتُم مِّن بَعْدِ ذَٰلِكَ ۖ فَلَوْلَا فَضْلُ اللَّهِ عَلَيْكُمْ وَرَحْمَتُهُ لَكُنتُم مِّنَ الْخَاسِرِينَ
ताकि तुम परहेज़गार बनो फिर उसके बाद तुम (अपने एहदो पैमान से) फिर गए पस अगर तुम पर खुदा का फज़ल और उसकी मेहरबानी न होती तो तुमने सख्त घाटा उठाया होता
65وَلَقَدْ عَلِمْتُمُ الَّذِينَ اعْتَدَوْا مِنكُمْ فِي السَّبْتِ فَقُلْنَا لَهُمْ كُونُوا قِرَدَةً خَاسِئِينَ
और अपनी क़ौम से उन लोगों की हालत तो तुम बखूबी जानते हो जो शम्बे (सनीचर) के दिन अपनी हद से गुज़र गए (कि बावजूद मुमानिअत शिकार खेलने निकले) तो हमने उन से कहा कि तुम राइन्दे गए बन्दर बन जाओ (और वह बन्दर हो गए)
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अनुवाद — अल-बकरा 63

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Tuesday, August 18, 2026

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