अल-बकरा · 64/286
अनुवाद उच्चारण — अल-बकरा
ثُمَّ تَوَلَّيۡتُم مِّنۢ بَعۡدِ ذَٰلِكَۖ فَلَوۡلَا فَضۡلُ ٱللَّهِ عَلَيۡكُمۡ وَرَحۡمَتُهُۥ لَكُنتُم مِّنَ ٱلۡخَٰسِرِينَ  ۝٦٤
Summa tawallaitum mim ba`di zaalika falawlaa fadlul laahi `alaikum wa rahmatuhoo lakuntum minal khaasireen
📖 हिंदी अर्थ
ताकि तुम परहेज़गार बनो फिर उसके बाद तुम (अपने एहदो पैमान से) फिर गए पस अगर तुम पर खुदा का फज़ल और उसकी मेहरबानी न होती तो तुमने सख्त घाटा उठाया होता
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • ثُمَّ تَوَلَّيْتُم (फिर तुम मुड़ गए): यानी तुमने मुंह मोड़ लिया और आज्ञा का उल्लंघन किया।
  • فَلَوْلَا (यदि न होता): यहाँ इसका अर्थ है "यदि न होता"।
  • فَضْلُ اللَّهِ (अल्लाह का अनुग्रह): अल्लाह की ओर से विशेष कृपा और दया।
  • الْخَاسِرِينَ (घाटे में रहने वाले): वे लोग जिन्होंने अपना सब कुछ खो दिया और असफल रहे।

व्याख्या:

इस आयात में अल्लाह तआला बनी इस्राईल को उनके पिछले वादे और मीसेक़ (अहद) की याद दिलाता है। जब उन्होंने तौरात को मानने का वादा किया और उस पर अमल करने का अहद किया, तो अल्लाह ने उनके सिर पर तूर (पहाड़) उठाकर उन्हें डराया और उन्होंने वादा किया। लेकिन उसके बाद भी वे मुड़ गए और उस वादे को तोड़ दिया, अल्लाह के हुक्मों की अवहेलना की और उसकी नाफ़रमानी की।

अगर अल्लाह का फज़ल (अनुग्रह) और उसकी रहमत (दया) उनके साथ न होती, तो वे इस नाफ़रमानी की वजह से दुनिया और आख़िरत दोनों में घाटे में रहते। लेकिन अल्लाह ने अपनी रहमत से उन्हें मोहलत दी, उनकी तौबा क़बूल की और उन पर अज़ाब नाज़िल नहीं किया। यह अल्लाह का विशेष अनुग्रह है कि वह अपने बंदों की ग़लतियों पर तुरंत पकड़ नहीं करता, बल्कि उन्हें तौबा का मौक़ा देता है।

शिक्षाएँ और लाभ:

  1. अल्लाह की रहमत की विशालता: यह आयात हमें सिखाती है कि अल्लाह की रहमत बहुत विशाल है। वह अपने बंदों की ग़लतियों के बावजूद उन पर रहम करता है और उन्हें तौबा का मौक़ा देता है। इससे हमें उम्मीद रखनी चाहिए कि चाहे हमसे कितनी भी ग़लतियाँ हों, अल्लाह की रहमत हमेशा हमारे साथ है।
  2. तौबा का दरवाज़ा हमेशा खुला है: अल्लाह ने अपने बंदों के लिए तौबा का दरवाज़ा खुला रखा है। चाहे इंसान कितना भी गुनाहगार हो, वह अल्लाह की ओर लौट सकता है और अल्लाह उसकी तौबा क़बूल करेगा।
  3. अल्लाह का फज़ल ही हमारी नजात का ज़रिया है: हमारी नजात (मुक्ति) हमारे अमल से नहीं, बल्कि अल्लाह के फज़ल और रहमत से है। इसलिए हमें हमेशा अल्लाह से उसके फज़ल और रहमत की दुआ करनी चाहिए।
  4. अहद तोड़ने का अंजाम: यह आयात हमें सिखाती है कि अल्लाह से किया गया वादा तोड़ना बहुत बुरा है। अगर अल्लाह की रहमत न हो, तो यह घाटे का सबब बनता है। इसलिए हमें अल्लाह से किए गए वादों को पूरा करना चाहिए।
  5. उम्मीद और खौफ का तवाज़ुन: यह आयात हमें सिखाती है कि एक तरफ हमें अल्लाह की रहमत से उम्मीद रखनी चाहिए, तो दूसरी तरफ उसके अज़ाब से डरना भी चाहिए। यही संतुलन एक मुसलमान की ज़िंदगी का आधार है।
🎧 सुनें

📜 आयत 62-66 — अल-बकरा

62إِنَّ ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَٱلَّذِينَ هَادُواْ وَٱلنَّصَٰرَىٰ وَٱلصَّٰبِـِٔينَ مَنۡ ءَامَنَ بِٱللَّهِ وَٱلۡيَوۡمِ ٱلۡأٓخِرِ وَعَمِلَ صَٰلِحًا فَلَهُمۡ أَجۡرُهُمۡ عِندَ رَبِّهِمۡ وَلَا خَوۡفٌ عَلَيۡهِمۡ وَلَا هُمۡ يَحۡزَنُونَ 
बेशक मुसलमानों और यहूदियों और नसरानियों और ला मज़हबों में से जो कोई खुदा और रोज़े आख़िरत पर ईमान लाए और अच्छे-अच्छे काम करता रहे तो उन्हीं के लिए उनका अज्र व सवाब उनके खुदा के पास है और न (क़यामत में) उन पर किसी का ख़ौफ होगा न वह रंजीदा दिल होंगे
63وَإِذۡ أَخَذۡنَا مِيثَٰقَكُمۡ وَرَفَعۡنَا فَوۡقَكُمُ ٱلطُّورَ خُذُواْ مَآ ءَاتَيۡنَٰكُم بِقُوَّةٍ وَٱذۡكُرُواْ مَا فِيهِ لَعَلَّكُمۡ تَتَّقُونَ 
और (वह वक्त याद करो) जब हमने (तामीले तौरेत) का तुमसे एक़रार कर लिया और हमने तुम्हारे सर पर तूर से (पहाड़ को) लाकर लटकाया और कह दिया कि तौरेत जो हमने तुमको दी है उसको मज़बूत पकड़े रहो और जो कुछ उसमें है उसको याद रखो
64ثُمَّ تَوَلَّيۡتُم مِّنۢ بَعۡدِ ذَٰلِكَۖ فَلَوۡلَا فَضۡلُ ٱللَّهِ عَلَيۡكُمۡ وَرَحۡمَتُهُۥ لَكُنتُم مِّنَ ٱلۡخَٰسِرِينَ 
ताकि तुम परहेज़गार बनो फिर उसके बाद तुम (अपने एहदो पैमान से) फिर गए पस अगर तुम पर खुदा का फज़ल और उसकी मेहरबानी न होती तो तुमने सख्त घाटा उठाया होता
65وَلَقَدۡ عَلِمۡتُمُ ٱلَّذِينَ ٱعۡتَدَوۡاْ مِنكُمۡ فِي ٱلسَّبۡتِ فَقُلۡنَا لَهُمۡ كُونُواْ قِرَدَةً خَٰسِـِٔينَ 
और अपनी क़ौम से उन लोगों की हालत तो तुम बखूबी जानते हो जो शम्बे (सनीचर) के दिन अपनी हद से गुज़र गए (कि बावजूद मुमानिअत शिकार खेलने निकले) तो हमने उन से कहा कि तुम राइन्दे गए बन्दर बन जाओ (और वह बन्दर हो गए)
66فَجَعَلۡنَٰهَا نَكَٰلًا لِّمَا بَيۡنَ يَدَيۡهَا وَمَا خَلۡفَهَا وَمَوۡعِظَةً لِّلۡمُتَّقِينَ 
पस हमने इस वाक़ये से उन लोगों के वास्ते जिन के सामने हुआ था और जो उसके बाद आनेवाले थे अज़ाब क़रार दिया, और परहेज़गारों के लिए नसीहत
अल-बकराकुरान सूची
286आयत
मदनीRevelation
64आयत

अनुवाद — अल-बकरा 64

सूरा आयत 64/286 — अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-बकरा सुनें, अल-बकरा अनुवाद, अल-बकरा mp3, अल-बकरा pdf. आयत 62–66. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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