Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- لا تَمُدَّنَّ عَيْنَيْكَ: अपनी आँखें न उठाओ, लालच भरी नज़रों से न देखो।
- أَزْوَاجًا: क़िस्में, प्रकार, समूह।
- زَهْرَةَ الْحَيَاةِ الدُّنْيَا: सांसारिक जीवन की सजावट, चमक-धमक और आकर्षण।
- لِنَفْتِنَهُمْ فِيهِ: ताकि हम उन्हें इस (सांसारिक सुख-सामग्री) में परीक्षा में डालें।
- رِزْقُ رَبِّكَ: तुम्हारे रब की ओर से दिया जाने वाला प्रतिफल और इनाम।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ को नसीहत करते हुए फ़रमाता है कि ऐ नबी! तुम उन चीज़ों की ओर अपनी आँखें न उठाओ जो हमने इन काफ़िरों और मुनकिरों के विभिन्न समूहों को दी हैं। यह सांसारिक जीवन की चमक-दमक, ऐशो-आराम के साधन, धन-दौलत, सुंदर वस्त्र और भव्य महल हैं — यह सब कुछ क्षणभंगुर है, फ़ानी है। हमने उन्हें यह सब कुछ इसलिए दिया है ताकि उनकी परीक्षा हो — कि वे इन नेअमतों को देखकर शुक्र करते हैं या कृतघ्नता दिखाते हैं, और यह सब उनके लिए एक इम्तिहान है, न कि कोई सम्मान या प्रतिष्ठा।
फिर अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ को और उनके ज़रिए पूरी उम्मत को सबसे बड़ी खुशखबरी देता है: "और तुम्हारे रब की ओर से दिया जाने वाला रिज़्क़ (प्रतिफल) कहीं बेहतर और अधिक स्थायी है।" यानी जो कुछ अल्लाह तुम्हें आख़िरत में देगा — जन्नत, रिज़वान, अल्लाह का दीदार, और वह सब कुछ जो उसने अपने नेक बंदों से वादा किया है — वह इन काफ़िरों को दी गई दुनियावी चीज़ों से कहीं उत्तम है। दुनिया का सुख-सामान कुछ दिनों का है, जल्द ही खत्म हो जाता है, जबकि आख़िरत का इनाम हमेशा रहने वाला है, कभी खत्म नहीं होता।
इस आयत में हमारे लिए एक बहुत बड़ी शिक्षा है। हमें दुनिया की चमक-दमक और दूसरों के पास मौजूद सांसारिक सुख-साधनों को देखकर रश्क (ईर्ष्या) नहीं करना चाहिए। यह सब कुछ अल्लाह की ओर से एक परीक्षा है। असली कामयाबी उसी की है जो अल्लाह की राह में सब्र करे और आख़िरत के इनाम पर यक़ीन रखे। जो चीज़ अल्लाह के पास है — उसकी रहमत, उसका इनाम और जन्नत — वही सबसे अच्छी और सबसे स्थायी है। इसलिए हमें अपनी निगाहें दुनिया की ओर नहीं, बल्कि अल्लाह की रहमत और उसके वादों की ओर लगानी चाहिए। यही सच्ची भलाई है, और यही हमेशा रहने वाली नेअमत है।
📜 आयत 129-133 — सूरा ताहा
अनुवाद — ताहा 131
सूरा ताहा आयत 131 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (ऐ रसूल) जो उनमें से कुछ लोगों को दुनिया…सूरा आयत 131/135 — सूरा ताहा طه (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा ताहा सुनें, सूरा ताहा अनुवाद, सूरा ताहा mp3, सूरा ताहा pdf. आयत 129–133. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा ताहा
पवित्र क़ुरआन
Saturday, October 3, 2026
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