ताहा · 131/135
अनुवाद उच्चारण — ताहा
وَلَا تَمُدَّنَّ عَيْنَيْكَ إِلَىٰ مَا مَتَّعْنَا بِهِ أَزْوَاجًا مِّنْهُمْ زَهْرَةَ الْحَيَاةِ الدُّنْيَا لِنَفْتِنَهُمْ فِيهِ ۚ وَرِزْقُ رَبِّكَ خَيْرٌ وَأَبْقَىٰ ۝١٣١
Wa laa tamuddanna `ainaika ilaa ma matta`na biheee azwajam minhum zahratal hayaatid dunya linaftinahum feeh; wa rizqu Rabbika khairunw wa abqaa
📖 हिंदी अर्थ
और (ऐ रसूल) जो उनमें से कुछ लोगों को दुनिया की इस ज़रा सी ज़िन्दगी की रौनक़ से निहाल कर दिया है ताकि हम उनको उसमें आज़माएँ तुम अपनी नज़रें उधर न बढ़ाओ और (इससे) तुम्हारे परवरदिगार की रोज़ी (सवाब) कहीं बेहतर और ज्यादा पाएदार है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • لا تَمُدَّنَّ عَيْنَيْكَ: अपनी आँखें न उठाओ, लालच भरी नज़रों से न देखो।
  • أَزْوَاجًا: क़िस्में, प्रकार, समूह।
  • زَهْرَةَ الْحَيَاةِ الدُّنْيَا: सांसारिक जीवन की सजावट, चमक-धमक और आकर्षण।
  • لِنَفْتِنَهُمْ فِيهِ: ताकि हम उन्हें इस (सांसारिक सुख-सामग्री) में परीक्षा में डालें।
  • رِزْقُ رَبِّكَ: तुम्हारे रब की ओर से दिया जाने वाला प्रतिफल और इनाम।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ को नसीहत करते हुए फ़रमाता है कि ऐ नबी! तुम उन चीज़ों की ओर अपनी आँखें न उठाओ जो हमने इन काफ़िरों और मुनकिरों के विभिन्न समूहों को दी हैं। यह सांसारिक जीवन की चमक-दमक, ऐशो-आराम के साधन, धन-दौलत, सुंदर वस्त्र और भव्य महल हैं — यह सब कुछ क्षणभंगुर है, फ़ानी है। हमने उन्हें यह सब कुछ इसलिए दिया है ताकि उनकी परीक्षा हो — कि वे इन नेअमतों को देखकर शुक्र करते हैं या कृतघ्नता दिखाते हैं, और यह सब उनके लिए एक इम्तिहान है, न कि कोई सम्मान या प्रतिष्ठा।

फिर अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ को और उनके ज़रिए पूरी उम्मत को सबसे बड़ी खुशखबरी देता है: "और तुम्हारे रब की ओर से दिया जाने वाला रिज़्क़ (प्रतिफल) कहीं बेहतर और अधिक स्थायी है।" यानी जो कुछ अल्लाह तुम्हें आख़िरत में देगा — जन्नत, रिज़वान, अल्लाह का दीदार, और वह सब कुछ जो उसने अपने नेक बंदों से वादा किया है — वह इन काफ़िरों को दी गई दुनियावी चीज़ों से कहीं उत्तम है। दुनिया का सुख-सामान कुछ दिनों का है, जल्द ही खत्म हो जाता है, जबकि आख़िरत का इनाम हमेशा रहने वाला है, कभी खत्म नहीं होता।

इस आयत में हमारे लिए एक बहुत बड़ी शिक्षा है। हमें दुनिया की चमक-दमक और दूसरों के पास मौजूद सांसारिक सुख-साधनों को देखकर रश्क (ईर्ष्या) नहीं करना चाहिए। यह सब कुछ अल्लाह की ओर से एक परीक्षा है। असली कामयाबी उसी की है जो अल्लाह की राह में सब्र करे और आख़िरत के इनाम पर यक़ीन रखे। जो चीज़ अल्लाह के पास है — उसकी रहमत, उसका इनाम और जन्नत — वही सबसे अच्छी और सबसे स्थायी है। इसलिए हमें अपनी निगाहें दुनिया की ओर नहीं, बल्कि अल्लाह की रहमत और उसके वादों की ओर लगानी चाहिए। यही सच्ची भलाई है, और यही हमेशा रहने वाली नेअमत है।



📜 आयत 129-133 — ताहा

129وَلَوْلَا كَلِمَةٌ سَبَقَتْ مِن رَّبِّكَ لَكَانَ لِزَامًا وَأَجَلٌ مُّسَمًّى
और (ऐ रसूल) अगर तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से पहले ही एक वायदा और अज़ाब का) एक वक्त मुअय्युन न होता तो (उनकी हरकतों से) फ़ौरन अज़ाब का आना लाज़मी बात थी
130فَاصْبِرْ عَلَىٰ مَا يَقُولُونَ وَسَبِّحْ بِحَمْدِ رَبِّكَ قَبْلَ طُلُوعِ الشَّمْسِ وَقَبْلَ غُرُوبِهَا ۖ وَمِنْ آنَاءِ اللَّيْلِ فَسَبِّحْ وَأَطْرَافَ النَّهَارِ لَعَلَّكَ تَرْضَىٰ
(ऐ रसूल) जो कुछ ये कुफ्फ़ार बका करते हैं तुम उस पर सब्र करो और आफ़ताब निकलने के क़ब्ल और उसके ग़ुरूब होने के क़ब्ल अपने परवरदिगार की हम्दोसना के साथ तसबीह किया करो और कुछ रात के वक़्तों में और दिन के किनारों में तस्बीह करो ताकि तुम निहाल हो जाओ
131وَلَا تَمُدَّنَّ عَيْنَيْكَ إِلَىٰ مَا مَتَّعْنَا بِهِ أَزْوَاجًا مِّنْهُمْ زَهْرَةَ الْحَيَاةِ الدُّنْيَا لِنَفْتِنَهُمْ فِيهِ ۚ وَرِزْقُ رَبِّكَ خَيْرٌ وَأَبْقَىٰ
और (ऐ रसूल) जो उनमें से कुछ लोगों को दुनिया की इस ज़रा सी ज़िन्दगी की रौनक़ से निहाल कर दिया है ताकि हम उनको उसमें आज़माएँ तुम अपनी नज़रें उधर न बढ़ाओ और (इससे) तुम्हारे परवरदिगार की रोज़ी (सवाब) कहीं बेहतर और ज्यादा पाएदार है
132وَأْمُرْ أَهْلَكَ بِالصَّلَاةِ وَاصْطَبِرْ عَلَيْهَا ۖ لَا نَسْأَلُكَ رِزْقًا ۖ نَّحْنُ نَرْزُقُكَ ۗ وَالْعَاقِبَةُ لِلتَّقْوَىٰ
और अपने घर वालों को नमाज़ का हुक्म दो और तुम खुद भी उसके पाबन्द रहो हम तुम से रोज़ी तो तलब करते नहीं (बल्कि) हम तो खुद तुमको रोज़ी देते हैं और परहेज़गारी ही का तो अन्जाम बखैर है
133وَقَالُوا لَوْلَا يَأْتِينَا بِآيَةٍ مِّن رَّبِّهِ ۚ أَوَلَمْ تَأْتِهِم بَيِّنَةُ مَا فِي الصُّحُفِ الْأُولَىٰ
और (अहले मक्का) कहते हैं कि अपने परवरदिगार की तरफ से हमारे पास कोई मौजिज़ा हमारी मर्ज़ी के मुवाफिक़ क्यों नहीं लाते तो क्या जो (पेशीव गोइयाँ) अगली किताबों (तौरेत, इन्जील) में (इसकी) गवाह हैं वह भी उनके पास नहीं पहुँची
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अनुवाद — ताहा 131

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Tuesday, August 18, 2026

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