ताहा · 130/135
अनुवाद उच्चारण — ताहा
فَاصْبِرْ عَلَىٰ مَا يَقُولُونَ وَسَبِّحْ بِحَمْدِ رَبِّكَ قَبْلَ طُلُوعِ الشَّمْسِ وَقَبْلَ غُرُوبِهَا ۖ وَمِنْ آنَاءِ اللَّيْلِ فَسَبِّحْ وَأَطْرَافَ النَّهَارِ لَعَلَّكَ تَرْضَىٰ ۝١٣٠
Fasbir `alaa maa yaqooloona wa sabbih bihamdi Rabbika qabla tuloo`ish shamsi wa qabla ghuroobihaa wa min aanaaa`il laili fasbbih wa atraafan nahaari la `allaka tardaa
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) जो कुछ ये कुफ्फ़ार बका करते हैं तुम उस पर सब्र करो और आफ़ताब निकलने के क़ब्ल और उसके ग़ुरूब होने के क़ब्ल अपने परवरदिगार की हम्दोसना के साथ तसबीह किया करो और कुछ रात के वक़्तों में और दिन के किनारों में तस्बीह करो ताकि तुम निहाल हो जाओ
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَاصْبِرْ: धैर्य रखें, सहन करें।
  • وَسَبِّحْ: तस्बीह करें, यानी नमाज़ पढ़ें और अल्लाह की पवित्रता का वर्णन करें।
  • بِحَمْدِ رَبِّكَ: अपने रब की प्रशंसा के साथ।
  • آنَاءِ اللَّيْلِ: रात के घंटे, रात की सारी अवधियाँ।
  • أَطْرَافَ النَّهَارِ: दिन के किनारे, यानी दिन के शुरुआती और आखिरी हिस्से।
  • لَعَلَّكَ تَرْضَىٰ: ताकि आप संतुष्ट हो जाएं (इनाम और फज़ल से)।

तफसीर (व्याख्या):

ऐ नबी! जो लोग आपको झुठलाते हैं और आपके बारे में बुरी बातें कहते हैं, उनकी बातों पर धैर्य रखें। उनके तंज़ और इस्तेहज़ा से दिल पर बोझ न आने दें, क्योंकि अल्लाह आपके साथ है और वही सब कुछ देख रहा है। इस मुश्किल घड़ी में सब्र का सबसे बेहतरीन ज़रिया यह है कि आप अल्लाह की तस्बीह करें और उसकी हम्द (प्रशंसा) के साथ नमाज़ अदा करें।

नमाज़ के ये अलग-अलग औक़ात (समय) आपके लिए रूहानी ताकत और सुकून का ज़रिया बनें: सुबह की नमाज़ (फज्र) सूरज निकलने से पहले पढ़ें, और अस्र की नमाज़ सूरज डूबने से पहले। रात के घंटों में मग़रिब और इशा की नमाज़ पढ़ें, और दिन के किनारों में (यानी ज़वाल के बाद) ज़ुहर की नमाज़ अदा करें। ये नमाज़ें आपको हर वक़्त अल्लाह से जोड़े रखेंगी और आपके दिल को मुश्किलों के बावजूद सुकून देंगी।

यह सब्र और नमाज़ ही वह ज़रिया है जिससे आप अल्लाह के करीब होंगे और उसके इनाम से आप ऐसा मुकाम हासिल करेंगे जिससे आप राज़ी (संतुष्ट) हो जाएंगे। अल्लाह का वादा है कि जो उसके हुक्म पर सब्र करता है और उसकी इबादत में मशगूल रहता है, उसे वह ऐसा अज्र (इनाम) देगा जो उसकी उम्मीदों से बढ़कर होगा।

यह आयत हमें सिखाती है कि जीवन की परेशानियों और लोगों की बुरी बातों का सामना करने का सबसे अच्छा तरीका सब्र और नमाज़ है। नमाज़ हमें अल्लाह से जोड़ती है, हमारे दिल को साफ करती है और हमें मुश्किलों का सामना करने की ताकत देती है। जब हम अल्लाह की तस्बीह करते हैं और उसकी हम्द बयान करते हैं, तो हमारा दिल नूर से भर जाता है और हमें यकीन होता है कि अल्लाह हमारे साथ है। यही सब्र और इबादत हमें उस मुकाम तक पहुंचाती है जहां हम अल्लाह के फज़ल से राज़ी और खुश हो जाते हैं।

🎧 सुनें

📜 आयत 128-132 — ताहा

128أَفَلَمْ يَهْدِ لَهُمْ كَمْ أَهْلَكْنَا قَبْلَهُم مِّنَ الْقُرُونِ يَمْشُونَ فِي مَسَاكِنِهِمْ ۗ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ لِّأُولِي النُّهَىٰ
तो क्या उन (अहले मक्का) को उस (खुदा) ने ये नहीं बता दिया था कि हमने उनके पहले कितने लोगों को हलाक कर डाला जिनके घरों में ये लोग चलते फिरते हैं इसमें शक नहीं कि उसमें अक्लमंदों के लिए (कुदरते खुदा की) यक़ीनी बहुत सी निशानियाँ हैं
129وَلَوْلَا كَلِمَةٌ سَبَقَتْ مِن رَّبِّكَ لَكَانَ لِزَامًا وَأَجَلٌ مُّسَمًّى
और (ऐ रसूल) अगर तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से पहले ही एक वायदा और अज़ाब का) एक वक्त मुअय्युन न होता तो (उनकी हरकतों से) फ़ौरन अज़ाब का आना लाज़मी बात थी
130فَاصْبِرْ عَلَىٰ مَا يَقُولُونَ وَسَبِّحْ بِحَمْدِ رَبِّكَ قَبْلَ طُلُوعِ الشَّمْسِ وَقَبْلَ غُرُوبِهَا ۖ وَمِنْ آنَاءِ اللَّيْلِ فَسَبِّحْ وَأَطْرَافَ النَّهَارِ لَعَلَّكَ تَرْضَىٰ
(ऐ रसूल) जो कुछ ये कुफ्फ़ार बका करते हैं तुम उस पर सब्र करो और आफ़ताब निकलने के क़ब्ल और उसके ग़ुरूब होने के क़ब्ल अपने परवरदिगार की हम्दोसना के साथ तसबीह किया करो और कुछ रात के वक़्तों में और दिन के किनारों में तस्बीह करो ताकि तुम निहाल हो जाओ
131وَلَا تَمُدَّنَّ عَيْنَيْكَ إِلَىٰ مَا مَتَّعْنَا بِهِ أَزْوَاجًا مِّنْهُمْ زَهْرَةَ الْحَيَاةِ الدُّنْيَا لِنَفْتِنَهُمْ فِيهِ ۚ وَرِزْقُ رَبِّكَ خَيْرٌ وَأَبْقَىٰ
और (ऐ रसूल) जो उनमें से कुछ लोगों को दुनिया की इस ज़रा सी ज़िन्दगी की रौनक़ से निहाल कर दिया है ताकि हम उनको उसमें आज़माएँ तुम अपनी नज़रें उधर न बढ़ाओ और (इससे) तुम्हारे परवरदिगार की रोज़ी (सवाब) कहीं बेहतर और ज्यादा पाएदार है
132وَأْمُرْ أَهْلَكَ بِالصَّلَاةِ وَاصْطَبِرْ عَلَيْهَا ۖ لَا نَسْأَلُكَ رِزْقًا ۖ نَّحْنُ نَرْزُقُكَ ۗ وَالْعَاقِبَةُ لِلتَّقْوَىٰ
और अपने घर वालों को नमाज़ का हुक्म दो और तुम खुद भी उसके पाबन्द रहो हम तुम से रोज़ी तो तलब करते नहीं (बल्कि) हम तो खुद तुमको रोज़ी देते हैं और परहेज़गारी ही का तो अन्जाम बखैर है
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अनुवाद — ताहा 130

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Tuesday, August 18, 2026

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