अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- وَأْمُرْ أَهْلَكَ: अपने परिवार वालों को आदेश दीजिए।
- بِالصَّلَاةِ: नमाज़ की पाबंदी का।
- وَاصْطَبِرْ عَلَيْهَا: और उस (नमाज़) पर दृढ़ता और सब्र रखिए।
- لَا نَسْأَلُكَ رِزْقًا: हम आपसे रोज़ी (आजीविका) का तक़ाज़ा नहीं करते।
- نَحْنُ نَرْزُقُكَ: हम ही आपको रोज़ी देते हैं।
- وَالْعَاقِبَةُ لِلتَّقْوَىٰ: और अच्छा अंजाम (परिणाम) परहेज़गारी (तक़वा) के लिए है।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ को एक बहुत ही अहम और प्यारी हिदायत दे रहे हैं कि वे अपने घर वालों को नमाज़ की तालीम दें और उन्हें नमाज़ पर मुस्तक़िम रहने का हुक्म दें। यह सिर्फ़ दूसरों को कहने की बात नहीं है, बल्कि ख़ुद भी नमाज़ पर जमी रहें और उस पर सब्र करें। नमाज़ ही वह चीज़ है जो इंसान को बुराइयों और फ़हश (अश्लील कामों) से रोकती है, दिल को साफ़ करती है और अल्लाह से रिश्ता मज़बूत करती है।
अल्लाह फ़रमाता है: “हम तुमसे रोज़ी का सवाल नहीं करते, हम ही तुम्हें रोज़ी देते हैं।” यानी अल्लाह की इबादत और नमाज़ की पाबंदी कभी भी रोज़ी में कमी का सबब नहीं बनती। रिज़्क़ (रोज़ी) अल्लाह के ज़िम्मे है, वह जिसे चाहता है देता है। इंसान को अपनी फ़िक्र छोड़कर अल्लाह की इबादत पर ध्यान देना चाहिए। यह एक बहुत बड़ी तसल्ली है कि जो बंदा अल्लाह की इबादत में लगा रहता है, अल्लाह उसकी रोज़ी का इंतज़ाम ख़ुद करता है।
फिर अल्लाह फ़रमाता है: “और अच्छा अंजाम तक़वा (परहेज़गारी) के लिए है।” यानी दुनिया और आख़िरत में कामयाबी और बेहतरीन नतीजा उन्हीं के लिए है जो अल्लाह से डरते हैं, उसके हुक्मों की पैरवी करते हैं और उसकी मनाही से बचते हैं। नमाज़ ही तक़वा की जड़ है, और तक़वा ही कामयाबी की कुंजी है।
दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):
प्यारे भाइयो और बहनो! यह आयत हमें सिखाती है कि नमाज़ सिर्फ़ हमारा फ़र्ज़ नहीं, बल्कि हमारी ज़िंदगी की रौशनी है। अगर हम अपने घरों को नमाज़ की रौशनी से रोशन कर दें, तो हमारे घर सुकून और बरकत से भर जाएँगे। अल्लाह ने हमें रोज़ी की फ़िक्र से आज़ाद कर दिया है—वह ख़ुद कहता है कि “हम तुम्हें रोज़ी देते हैं।” तो फिर हम क्यों चिंता में डूबे रहते हैं? हमें अपना ध्यान अल्लाह की इबादत पर लगाना चाहिए, और देखना है कि अल्लाह कैसे हमारे रिज़्क़ के दरवाज़े खोलता है। याद रखिए, जो लोग तक़वा (परहेज़गारी) अपनाते हैं, उन्हीं के लिए दुनिया और आख़िरत की कामयाबी है। नमाज़ को अपनी ज़िंदगी का हिस्सा बनाइए, अपने बच्चों को नमाज़ सिखाइए, और देखिए कि आपकी ज़िंदगी कैसे बदल जाती है। अल्लाह हम सबको नमाज़ की पाबंदी और तक़वा की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।
📜 आयत 130-134 — ताहा
अनुवाद — ताहा 132
सूरा ताहा आयत 132 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और अपने घर वालों को नमाज़ का हुक्म दो और…सूरा आयत 132/135 — ताहा طه (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: ताहा सुनें, ताहा अनुवाद, ताहा mp3, ताहा pdf. आयत 130–134. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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