ताहा · 15/135
अनुवाद उच्चारण — सूरा ताहा
إِنَّ السَّاعَةَ آتِيَةٌ أَكَادُ أُخْفِيهَا لِتُجْزَىٰ كُلُّ نَفْسٍ بِمَا تَسْعَىٰ ۝١٥
Innas Saa`ata aatiyatun akaadu ukhfeehaa litujzaa kullu nafsim bimaa tas`aa
📖 हिंदी अर्थ
(क्योंकि) क़यामत ज़रूर आने वाली है और मैं उसे लामहौला छिपाए रखूँगा ताकि हर शख्स (उसके ख़ौफ से नेकी करे) और वैसी कोशिश की है उसका उसे बदला दिया जाए

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अनुवाद — Tafsir

निश्चय ही क़ियामत आने वाली है, मैं उसे लगभग छिपाए रखता हूँ, ताकि प्रत्येक प्राणी को उसका बदला दिया जाए जो वह प्रयास करता है।

शब्दों के अर्थ:

  • الساعة (अस-साआह): क़ियामत, वह घड़ी जिसमें सभी प्राणियों को पुनर्जीवित किया जाएगा।
  • آتِيَةٌ (आतियाह): निश्चित रूप से आने वाली, अवश्यंभावी।
  • أَكَادُ أُخْفِيهَا (अकादु उख़फ़ीहा): मैं उसे छिपाए रखता हूँ, अर्थात उसका समय गुप्त रखा गया है।
  • لِتُجْزَىٰ (लितुज्ज़ा): ताकि बदला दिया जाए, प्रतिफल दिया जाए।
  • بِمَا تَسْعَىٰ (बिमा तस्आ): उसके प्रयासों के अनुसार, उसके किए हुए कर्मों के बदले।

विस्तृत व्याख्या:

अल्लाह तआला इस आयत में क़ियामत के आने की ख़बर देते हुए फ़रमाते हैं कि वह घड़ी निश्चित रूप से आने वाली है, इसमें कोई संदेह नहीं। यह कोई दूर की बात नहीं, बल्कि हर लम्हा वह घड़ी निकट आती जा रही है। अल्लाह ने उसके आने का सही समय अपने ज्ञान में छिपाए रखा है, यहाँ तक कि फ़रिश्तों और नबियों को भी उसका सटीक समय नहीं बताया गया। यह छिपाव इसलिए है कि लोग हर वक़्त उसके आने से डरते रहें और उसकी तैयारी में लगे रहें। अगर समय मालूम होता तो लोग आख़िरी वक़्त तक लापरवाही करते और फिर अचानक तैयारी में जुट जाते।

यह क़ियामत क्यों आएगी? इसका उद्देश्य बताते हुए अल्लाह फ़रमाता है कि ताकि हर व्यक्ति को उसके कर्मों का पूरा-पूरा बदला मिले। जिसने नेकी की होगी, उसे नेकी का बदला मिलेगा, और जिसने बुराई की होगी, उसे बुराई का अंजाम भुगतना होगा। यह अल्लाह का पूर्ण न्याय है कि कोई अच्छा काम रद्द नहीं होगा और कोई बुरा काम बिना सज़ा के नहीं छूटेगा।

इस आयत में हमारे लिए बड़ी नसीहत है। हमें चाहिए कि हम हर पल इस बात का एहसास रखें कि हमारा रब हमें देख रहा है और हमारे हर अमल का हिसाब होना है। यह दुनिया की ज़िंदगी एक इम्तिहान है, और क़ियामत उस इम्तिहान का नतीजा है। जो लोग इस दुनिया में अल्लाह की इबादत करते हैं और अच्छे कर्म करते हैं, उनके लिए उस दिन खुशी और कामयाबी है। और जो लोग अल्लाह से ग़ाफ़िल रहते हैं और बुराइयों में डूबे रहते हैं, उनके लिए उस दिन पछतावा और अफ़सोस है।

याद रखिए, क़ियामत का आना सुनिश्चित है, लेकिन उसका समय हमसे छिपा है। यही अल्लाह की रहमत है कि उसने हमें मौक़ा दिया है कि हम आज अपने कर्म सुधार लें, तौबा कर लें, और उस दिन के लिए ऐसा सामान इकट्ठा करें जो हमारे काम आए। आइए, हम अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के अनुसार ढालें, नेकी अपनाएँ और बुराई से बचें, ताकि उस दिन हमारा पलड़ा भारी हो और हम जन्नत की नेमतों से नवाज़े जाएँ।



📜 आयत 13-17 — सूरा ताहा

13وَأَنَا اخْتَرْتُكَ فَاسْتَمِعْ لِمَا يُوحَىٰ
और मैंने तुमको पैग़म्बरी के वास्ते मुन्तख़िब किया (चुन लिया) है तो जो कुछ तुम्हारी तरफ़ वही की जाती है उसे कान लगा कर सुनो
14إِنَّنِي أَنَا اللَّهُ لَا إِلَٰهَ إِلَّا أَنَا فَاعْبُدْنِي وَأَقِمِ الصَّلَاةَ لِذِكْرِي
इसमें शक नहीं कि मैं ही वह अल्लाह हूँ कि मेरे सिवा कोई माबूद नहीं तो मेरी ही इबादत करो और मेरी याद के लिए नमाज़ बराबर पढ़ा करो
15إِنَّ السَّاعَةَ آتِيَةٌ أَكَادُ أُخْفِيهَا لِتُجْزَىٰ كُلُّ نَفْسٍ بِمَا تَسْعَىٰ
(क्योंकि) क़यामत ज़रूर आने वाली है और मैं उसे लामहौला छिपाए रखूँगा ताकि हर शख्स (उसके ख़ौफ से नेकी करे) और वैसी कोशिश की है उसका उसे बदला दिया जाए
16فَلَا يَصُدَّنَّكَ عَنْهَا مَن لَّا يُؤْمِنُ بِهَا وَاتَّبَعَ هَوَاهُ فَتَرْدَىٰ
तो (कहीं) ऐसा न हो कि जो शख्स उसे दिल से नहीं मानता और अपनी नफ़सियानी ख्वाहिश के पीछे पड़ा वह तुम्हें इस (फिक्र) से रोक दे तो तुम तबाह हो जाओगे
17وَمَا تِلْكَ بِيَمِينِكَ يَا مُوسَىٰ
और ऐ मूसा ये तुम्हारे दाहिने हाथ में क्या चीज़ है
ताहाकुरान सूची
135आयत
मक्कीअवतरण स्थान
15आयत

अनुवाद — ताहा 15

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सूरा आयत 15/135 — सूरा ताहा طه (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा ताहा सुनें, सूरा ताहा अनुवाद, सूरा ताहा mp3, सूरा ताहा pdf. आयत 13–17. हिंदी अर्थ: اردو.





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Friday, October 2, 2026

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