ताहा · 14/135
अनुवाद उच्चारण — सूरा ताहा
إِنَّنِي أَنَا اللَّهُ لَا إِلَٰهَ إِلَّا أَنَا فَاعْبُدْنِي وَأَقِمِ الصَّلَاةَ لِذِكْرِي ۝١٤
Innaneee Anal laahu laaa ilaaha illaa Ana fa`budnee wa aqimis-salaata lizikree
📖 हिंदी अर्थ
इसमें शक नहीं कि मैं ही वह अल्लाह हूँ कि मेरे सिवा कोई माबूद नहीं तो मेरी ही इबादत करो और मेरी याद के लिए नमाज़ बराबर पढ़ा करो

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • إِنَّنِي أَنَا اللَّهُ: बेशक मैं ही अल्लाह हूँ।
  • لَا إِلَٰهَ إِلَّا أَنَا: मेरे सिवा कोई सच्चा माबूद (पूज्य) नहीं।
  • فَاعْبُدْنِي: तो तू मेरी ही इबादत कर।
  • وَأَقِمِ الصَّلَاةَ لِذِكْرِي: और मेरी याद के लिए नमाज़ क़ायम कर।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने अपने प्यारे नबी मूसा (अलैहिस्सलाम) को पवित्र घाटी तुवा में यह अनमोल पैग़ाम दिया, जो हर मुसलमान के दिल की धड़कन है। यहाँ अल्लाह तआला अपनी पहचान खुद बयान कर रहे हैं — "बेशक मैं ही अल्लाह हूँ।" यानी वह ज़ात जिसके सिवा कोई माबूद नहीं, कोई पूज्य नहीं, कोई मददगार नहीं। यह ऐलान है तौहीद का, जो इस्लाम की बुनियाद है।

जब अल्लाह तआला ने यह बता दिया कि वही एक सच्चा माबूद है, तो उसका सीधा तक़ाज़ा यह है कि बंदा सिर्फ़ उसी की इबादत करे, किसी और को उसका शरीक न बनाए। यही इबादत का खुलासा है — इबादत सिर्फ़ अल्लाह के लिए, सिर्फ़ अल्लाह के हुक्म के मुताबिक़, और सिर्फ़ अल्लाह से मुहब्बत रखते हुए।

फिर अल्लाह तआला ने नमाज़ का हुक्म दिया — "और मेरी याद के लिए नमाज़ क़ायम कर।" यानी नमाज़ का मक़सद ही अल्लाह की याद है। नमाज़ में जो क़ुरआन पढ़ा जाता है, जो तस्बीहात और अज़कार किए जाते हैं, वह सब अल्लाह की याद का ज़रिया हैं। नमाज़ वह पवित्र रस्सी है जो बंदे को उसके रब से जोड़ती है। जब बंदा नमाज़ में खड़ा होता है, तो वह दुनिया के झंझटों से कटकर अपने रब से बातें करता है — यही सबसे बड़ी सआदत है।

नमाज़ को "लिज़िक्री" (मेरी याद के लिए) कहकर अल्लाह ने यह बताया कि नमाज़ का असली मक़सद दिल का अल्लाह से जुड़ना है। सिर्फ़ रस्म अदा करना काफ़ी नहीं, बल्कि दिल और दिमाग़ अल्लाह की याद में मशग़ूल हों। यही वह चीज़ है जो इंसान को गुनाहों से रोकती है, उसके दिल को साफ़ करती है, और उसे सब्र और शुक्र की तालीम देती है।

यह आयत हमें सिखाती है कि हमारी ज़िंदगी का मरकज़ अल्लाह होना चाहिए। जब हम नमाज़ को सही तरीक़े से, ख़ुशू और ख़ुज़ू के साथ पढ़ेंगे, तो हमारा दिल अल्लाह की याद से भर जाएगा, और यह याद हमें हर बुराई से बचाएगी। नमाज़ ही वह ज़रिया है जिससे बंदा अपने रब से क़रीब होता है, अपनी ज़रूरतें उसके सामने रखता है, और उससे मदद माँगता है।

प्यारे भाइयो और बहनो! यह आयत हमें बुला रही है कि हम अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की इबादत के लिए समर्पित करें, और नमाज़ को अपनी आँखों की ठंडक बनाएँ। जैसे हमारे नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फ़रमाया कि नमाज़ मेरी आँखों की ठंडक है, वैसे ही हम भी नमाज़ में सुकून तलाश करें। यही वह रास्ता है जो हमें दुनिया में इज़्ज़त और आख़िरत में कामयाबी दिलाएगा। अल्लाह हम सबको अपनी याद में नमाज़ पढ़ने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 12-16 — सूरा ताहा

12إِنِّي أَنَا رَبُّكَ فَاخْلَعْ نَعْلَيْكَ ۖ إِنَّكَ بِالْوَادِ الْمُقَدَّسِ طُوًى
कि ऐ मूसा बेशक मैं ही तुम्हारा परवरदिगार हूँ तो तुम अपनी जूतियाँ उतार डालो क्योंकि तुम (इस वक्त) तुआ (नामी) पाक़ीज़ा चटियल मैदान में हो
13وَأَنَا اخْتَرْتُكَ فَاسْتَمِعْ لِمَا يُوحَىٰ
और मैंने तुमको पैग़म्बरी के वास्ते मुन्तख़िब किया (चुन लिया) है तो जो कुछ तुम्हारी तरफ़ वही की जाती है उसे कान लगा कर सुनो
14إِنَّنِي أَنَا اللَّهُ لَا إِلَٰهَ إِلَّا أَنَا فَاعْبُدْنِي وَأَقِمِ الصَّلَاةَ لِذِكْرِي
इसमें शक नहीं कि मैं ही वह अल्लाह हूँ कि मेरे सिवा कोई माबूद नहीं तो मेरी ही इबादत करो और मेरी याद के लिए नमाज़ बराबर पढ़ा करो
15إِنَّ السَّاعَةَ آتِيَةٌ أَكَادُ أُخْفِيهَا لِتُجْزَىٰ كُلُّ نَفْسٍ بِمَا تَسْعَىٰ
(क्योंकि) क़यामत ज़रूर आने वाली है और मैं उसे लामहौला छिपाए रखूँगा ताकि हर शख्स (उसके ख़ौफ से नेकी करे) और वैसी कोशिश की है उसका उसे बदला दिया जाए
16فَلَا يَصُدَّنَّكَ عَنْهَا مَن لَّا يُؤْمِنُ بِهَا وَاتَّبَعَ هَوَاهُ فَتَرْدَىٰ
तो (कहीं) ऐसा न हो कि जो शख्स उसे दिल से नहीं मानता और अपनी नफ़सियानी ख्वाहिश के पीछे पड़ा वह तुम्हें इस (फिक्र) से रोक दे तो तुम तबाह हो जाओगे
ताहाकुरान सूची
135आयत
मक्कीअवतरण स्थान
14आयत

अनुवाद — ताहा 14

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Friday, October 2, 2026

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