अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- رَسُولَا: दो संदेशवाहक (मूसा और हारून अलैहिमुस्सलाम)
- فَأَرْسِلْ مَعَنَا: हमारे साथ भेज दीजिए
- آيَة: निशानी, चमत्कार, प्रमाण
- السَّلَامُ: सुरक्षा, अमन, अल्लाह की यातना से बचाव
- الْهُدَى: मार्गदर्शन, सीधा रास्ता, एकेश्वरवाद
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ने मूसा और हारून अलैहिमुस्सलाम को फ़िरऔन के पास जाने का आदेश दिया और उन्हें यह सिखाया कि वे उससे कैसे बात करें। अल्लाह ने उन्हें आश्वस्त किया कि वह उनके साथ है, उनकी बातें सुनता है और उनके कार्यों को देखता है, इसलिए उन्हें किसी प्रकार का भय नहीं होना चाहिए।
जब वे फ़िरऔन के पास पहुँचें तो उससे कहें: "हम आपके रब की ओर से भेजे गए दो संदेशवाहक हैं।" यह कहकर उन्होंने फ़िरऔन को यह स्पष्ट कर दिया कि वे उसकी प्रजा नहीं हैं, बल्कि उसके रब—जो सारे जहान का पालनहार है—के भेजे हुए हैं। उन्होंने उससे दो माँगें रखीं:
पहली: कि वह बनी इस्राईल को उनके साथ भेज दे, ताकि वे आज़ाद होकर अल्लाह की इबादत कर सकें।
दूसरी: कि वह उन्हें यातना न दे—उनके बेटों को क़त्ल न करे और उनकी औरतों को ग़ुलाम न बनाए, और न ही उनसे ऐसे कठोर कार्य करवाए जो उनकी ताकत से बाहर हों।
फिर उन्होंने फ़िरऔन को बताया: "हम आपके पास आपके रब की ओर से एक स्पष्ट निशानी (चमत्कार) लेकर आए हैं, जो हमारी सच्चाई का प्रमाण है।" यह वही चमत्कार थे जो अल्लाह ने मूसा अलैहिस्सलाम को दिए—लाठी का साँप बनना, हाथ का चमकना आदि—ताकि फ़िरऔन समझ जाए कि ये महज़ जादू नहीं, बल्कि अल्लाह की ओर से सच्चा प्रमाण है।
अंत में उन्होंने कहा: "सलामती और अल्लाह की यातना से सुरक्षा उसी के लिए है जो मार्गदर्शन का पालन करे।" यानी जो व्यक्ति अल्लाह की ओर से आए सीधे रास्ते—एकेश्वरवाद और उसकी शरीयत—का अनुसरण करेगा, वही अल्लाह के क्रोध और यातना से सुरक्षित रहेगा। यह एक स्पष्ट निमंत्रण था कि ऐ फ़िरऔन! यदि तू भी इस मार्गदर्शन को क़बूल कर ले, तो तू भी अल्लाह की सुरक्षा में आ सकता है।
यह आयत हमें सिखाती है कि सत्य के प्रचारकों को किसी भी ज़ालिम और ताकतवर से डरना नहीं चाहिए, क्योंकि अल्लाह उनके साथ है। साथ ही, यह भी सिखाती है कि दावत के दौरान नरमी और हिकमत से बात करनी चाहिए, और सामने वाले को यह बताना चाहिए कि सच्चाई का रास्ता सबके लिए खुला है—यहाँ तक कि फ़िरऔन जैसा ज़ालिम भी अगर हिदायत क़बूल कर ले, तो उसे अल्लाह की रहमत मिल सकती है। यह अल्लाह की असीम दया और न्याय का प्रमाण है कि उसने फ़िरऔन को भी आख़िरी मौक़ा दिया, और हमें भी चाहिए कि हम अपने जीवन में कभी अल्लाह की रहमत से निराश न हों, बल्कि हर हाल में उसकी ओर लौटें।
📜 आयत 45-49 — ताहा
अनुवाद — ताहा 47
सूरा ताहा आयत 47 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ग़रज़ तुम दोनों उसके पास जाओ और कहो कि हम…सूरा आयत 47/135 — ताहा طه (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: ताहा सुनें, ताहा अनुवाद, ताहा mp3, ताहा pdf. आयत 45–49. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए








