Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- بِمَلْكِنَا – अपनी इच्छा और मर्जी से।
- أَوْزَارًا – भारी बोझ, यानी सोना-चाँदी और गहने।
- زِينَةِ الْقَوْمِ – क़ौम (बनी इस्राईल) के गहने, जो उन्होंने फ़िरऔन की क़ौम से उधार लिए थे।
- فَقَذَفْنَاهَا – हमने उन्हें (आग में) फेंक दिया।
- السَّامِرِيُّ – एक व्यक्ति जो बनी इस्राईल में से था और मुनाफ़िक़ (दिखावा करने वाला) था।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) तूर पहाड़ पर अल्लाह से कलाम (बातचीत) के लिए गए और अपनी क़ौम से वादा किया कि तीस रातों के बाद लौटूँगा, तो उनके जाने के बाद बनी इस्राईल ने एक बड़ी ग़लती की। जब मूसा (अलैहिस्सलाम) ने लौटकर उन्हें डांटा और पूछा कि तुमने मेरा वादा क्यों तोड़ा, तो उन्होंने उत्तर दिया:
"ऐ मूसा! हमने अपनी मर्जी और इच्छा से आपका वादा नहीं तोड़ा, बल्कि हम पर मजबूरी थी। हम पर फ़िरऔन की क़ौम के गहनों का भारी बोझ लाद दिया गया था, और हम उन गहनों से पाक होना चाहते थे, क्योंकि वे हमारे लिए अमानत में ख़ियानत का सबब बन गए थे। इसलिए हमने उन सारे गहनों को एक गड्ढे में डाल दिया, और उसी तरह सामरी ने भी अपने पास जो कुछ था, उसे आग में फेंक दिया।"
असल में सामरी ने उन गहनों से एक बछड़े की मूर्ति बनाई थी, जिसकी आवाज़ निकलती थी, और उसने बनी इस्राईल को धोखा देकर कहा कि यही तुम्हारा ख़ुदा है। लेकिन यहाँ उन्होंने अपनी बेबसी और मजबूरी का बहाना बनाया, हालाँकि असल में उनकी ग़लती यह थी कि उन्होंने सामरी की बात मान ली और अल्लाह के हुक्म से मुँह मोड़ लिया।
दावत और नसीहत:
यह क़िस्सा हमें सिखाता है कि इंसान को अपनी ग़लतियों पर पछतावा करना चाहिए और सच्चाई के साथ पेश आना चाहिए। बनी इस्राईल ने बहाने बनाए, लेकिन अल्लाह के नबी ने उनकी सच्चाई को परखा। हमें चाहिए कि हम अपने जीवन में किसी भी हालत में अल्लाह के हुक्म से मुँह न मोड़ें, और किसी भी धोखेबाज़ की बातों में आकर अपने ईमान को कमज़ोर न करें। याद रखें, अल्लाह हमेशा सच्चे और साफ़ दिल वालों के साथ होता है, और वही सबसे बड़ा मददगार है। जब हम अल्लाह के वादे पर क़ायम रहते हैं, तो अल्लाह हमें कभी अकेला नहीं छोड़ता।
📜 आयत 85-89 — सूरा ताहा
अनुवाद — ताहा 87
सूरा ताहा आयत 87 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : वह लोग कहने लगे हमने आपके वायदे के ख़िलाफ नहीं…सूरा आयत 87/135 — सूरा ताहा طه (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा ताहा सुनें, सूरा ताहा अनुवाद, सूरा ताहा mp3, सूरा ताहा pdf. आयत 85–89. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा ताहा
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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