ताहा · 87/135
अनुवाद उच्चारण — सूरा ताहा
قَالُوا مَا أَخْلَفْنَا مَوْعِدَكَ بِمَلْكِنَا وَلَٰكِنَّا حُمِّلْنَا أَوْزَارًا مِّن زِينَةِ الْقَوْمِ فَقَذَفْنَاهَا فَكَذَٰلِكَ أَلْقَى السَّامِرِيُّ ۝٨٧
Qaaloo maaa akhlafnaa maw`idaka bimalkinna wa laakinna hummilnaaa awzaaram min zeenatil qawmi faqazafnaahaa fakazaalika alqas Saamiriyy
📖 हिंदी अर्थ
वह लोग कहने लगे हमने आपके वायदे के ख़िलाफ नहीं किया बल्कि (बात ये हुईकि फिरऔन की) क़ौम के ज़ेवर के बोझे जो (मिस्र से निकलते वक्त) हम पर लोग गए थे उनको हम लोगों ने (सामरी के कहने से आग में) डाल दिया फिर सामरी ने भी डाल दिया

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
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A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • بِمَلْكِنَا – अपनी इच्छा और मर्जी से।
  • أَوْزَارًا – भारी बोझ, यानी सोना-चाँदी और गहने।
  • زِينَةِ الْقَوْمِ – क़ौम (बनी इस्राईल) के गहने, जो उन्होंने फ़िरऔन की क़ौम से उधार लिए थे।
  • فَقَذَفْنَاهَا – हमने उन्हें (आग में) फेंक दिया।
  • السَّامِرِيُّ – एक व्यक्ति जो बनी इस्राईल में से था और मुनाफ़िक़ (दिखावा करने वाला) था।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) तूर पहाड़ पर अल्लाह से कलाम (बातचीत) के लिए गए और अपनी क़ौम से वादा किया कि तीस रातों के बाद लौटूँगा, तो उनके जाने के बाद बनी इस्राईल ने एक बड़ी ग़लती की। जब मूसा (अलैहिस्सलाम) ने लौटकर उन्हें डांटा और पूछा कि तुमने मेरा वादा क्यों तोड़ा, तो उन्होंने उत्तर दिया:

"ऐ मूसा! हमने अपनी मर्जी और इच्छा से आपका वादा नहीं तोड़ा, बल्कि हम पर मजबूरी थी। हम पर फ़िरऔन की क़ौम के गहनों का भारी बोझ लाद दिया गया था, और हम उन गहनों से पाक होना चाहते थे, क्योंकि वे हमारे लिए अमानत में ख़ियानत का सबब बन गए थे। इसलिए हमने उन सारे गहनों को एक गड्ढे में डाल दिया, और उसी तरह सामरी ने भी अपने पास जो कुछ था, उसे आग में फेंक दिया।"

असल में सामरी ने उन गहनों से एक बछड़े की मूर्ति बनाई थी, जिसकी आवाज़ निकलती थी, और उसने बनी इस्राईल को धोखा देकर कहा कि यही तुम्हारा ख़ुदा है। लेकिन यहाँ उन्होंने अपनी बेबसी और मजबूरी का बहाना बनाया, हालाँकि असल में उनकी ग़लती यह थी कि उन्होंने सामरी की बात मान ली और अल्लाह के हुक्म से मुँह मोड़ लिया।


दावत और नसीहत:

यह क़िस्सा हमें सिखाता है कि इंसान को अपनी ग़लतियों पर पछतावा करना चाहिए और सच्चाई के साथ पेश आना चाहिए। बनी इस्राईल ने बहाने बनाए, लेकिन अल्लाह के नबी ने उनकी सच्चाई को परखा। हमें चाहिए कि हम अपने जीवन में किसी भी हालत में अल्लाह के हुक्म से मुँह न मोड़ें, और किसी भी धोखेबाज़ की बातों में आकर अपने ईमान को कमज़ोर न करें। याद रखें, अल्लाह हमेशा सच्चे और साफ़ दिल वालों के साथ होता है, और वही सबसे बड़ा मददगार है। जब हम अल्लाह के वादे पर क़ायम रहते हैं, तो अल्लाह हमें कभी अकेला नहीं छोड़ता।



📜 आयत 85-89 — सूरा ताहा

85قَالَ فَإِنَّا قَدْ فَتَنَّا قَوْمَكَ مِن بَعْدِكَ وَأَضَلَّهُمُ السَّامِرِيُّ
फ़रमाया तो हमने तुम्हारे (आने के बाद) तुम्हारी क़ौम का इम्तिहान लिया और सामरी ने उनको गुमराह कर छोड़ा
86فَرَجَعَ مُوسَىٰ إِلَىٰ قَوْمِهِ غَضْبَانَ أَسِفًا ۚ قَالَ يَا قَوْمِ أَلَمْ يَعِدْكُمْ رَبُّكُمْ وَعْدًا حَسَنًا ۚ أَفَطَالَ عَلَيْكُمُ الْعَهْدُ أَمْ أَرَدتُّمْ أَن يَحِلَّ عَلَيْكُمْ غَضَبٌ مِّن رَّبِّكُمْ فَأَخْلَفْتُم مَّوْعِدِي
(तो मूसा) गुस्से में भरे पछताए हुए अपनी क़ौम की तरफ पलटे और आकर कहने लगे ऐ मेरी (क़म्बख्त) क़ौम क्या तुमसे तुम्हारे परवरदिगार ने एक अच्छा वायदा (तौरेत देने का) न किया था तुम्हारे वायदे में अरसा लग गया या तुमने ये चाहा कि तुम पर तुम्हारे परवरदिगार का ग़ज़ब टूंट पड़े कि तुमने मेरे वायदे (खुदा की परसतिश) के ख़िलाफ किया
87قَالُوا مَا أَخْلَفْنَا مَوْعِدَكَ بِمَلْكِنَا وَلَٰكِنَّا حُمِّلْنَا أَوْزَارًا مِّن زِينَةِ الْقَوْمِ فَقَذَفْنَاهَا فَكَذَٰلِكَ أَلْقَى السَّامِرِيُّ
वह लोग कहने लगे हमने आपके वायदे के ख़िलाफ नहीं किया बल्कि (बात ये हुईकि फिरऔन की) क़ौम के ज़ेवर के बोझे जो (मिस्र से निकलते वक्त) हम पर लोग गए थे उनको हम लोगों ने (सामरी के कहने से आग में) डाल दिया फिर सामरी ने भी डाल दिया
88فَأَخْرَجَ لَهُمْ عِجْلًا جَسَدًا لَّهُ خُوَارٌ فَقَالُوا هَٰذَا إِلَٰهُكُمْ وَإِلَٰهُ مُوسَىٰ فَنَسِيَ
फिर सामरी ने उन लोगों के लिए (उसी जेवर से) एक बछड़े की मूरत बनाई जिसकी आवाज़ भी बछड़े की सी थी उस पर बाज़ लोग कहने लगे यही तुम्हारा (भी) माबूद और मूसा का (भी) माबूद है मगर वह भूल गया है
89أَفَلَا يَرَوْنَ أَلَّا يَرْجِعُ إِلَيْهِمْ قَوْلًا وَلَا يَمْلِكُ لَهُمْ ضَرًّا وَلَا نَفْعًا
भला इनको इतनी भी न सूझी कि ये बछड़ा न तो उन लोगों को पलट कर उन की बात का जवाब ही देता है और न उनका ज़रर ही उस के हाथ में है और न नफ़ा
ताहाकुरान सूची
135आयत
मक्कीअवतरण स्थान
87आयत

अनुवाद — ताहा 87

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Thursday, October 1, 2026

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