Mishary Rashid Alafasy
✓
Mahmoud Khalil Al-Husary
✓
Abdurrahman As-Sudais
✓
Mohamed Siddiq Al-Minshawi
✓
Abdul Basit Abdul Samad
✓
Ali Al-Hudhaify
✓
Ahmed ibn Ali al-Ajamy
✓
Abu Bakr Ash-Shaatree
✓
Muhammad Ayyoub
✓
Abdullah Basfar
✓
Abdullah Al-Juhani
✓
Maher Al Muaiqly
✓
अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- غَضْبَانَ: अत्यधिक क्रोधित
- أَسِفًا: अत्यधिक दुखी और शोकाकुल
- الْعَهْدُ: वादे की अवधि, समय
- يَحِلَّ: आ पड़े, नाज़िल हो
- مَوْعِدِي: मेरा वादा, मेरी प्रतीक्षा
तफ़सीर:
जब हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) अपने रब से चालीस रातों की मीआद (वादे) के बाद वापस लौटे, तो उन्होंने देखा कि उनकी क़ौम सीधे रास्ते से भटक चुकी है और बछड़े की पूजा में लग गई है। यह देखकर वे अत्यधिक क्रोधित और गहरे दुख से भर गए। उन्हें इस बात का बहुत अफ़सोस हुआ कि उनकी अनुपस्थिति में उनकी क़ौम ने इतनी बड़ी गलती कर डाली।
उन्होंने अपनी क़ौम को संबोधित करते हुए फरमाया: "ऐ मेरी क़ौम! क्या तुम्हारे रब ने तुम्हें अच्छा वादा नहीं दिया था? क्या उसने तुमसे यह वादा नहीं किया था कि वह तुम्हें तौरात (तोराह) की हिदायत देगा और तुम्हें जन्नत में दाखिल करेगा? क्या तुम्हें यह वादा याद नहीं रहा?"
फिर उन्होंने दो संभावित कारण बताए: "क्या तुम्हें मेरी यह अवधि बहुत लंबी लगी और तुमने जल्दबाज़ी की? या तुमने जानबूझकर यह चाहा कि तुम्हारे रब का ग़ज़ब तुम पर नाज़िल हो, ताकि तुम्हारी इस नाफ़रमानी की सज़ा तुम्हें मिले? क्या तुमने इसीलिए मेरे वादे को तोड़ दिया और मेरे लौटने तक सब्र नहीं किया?"
यह पूछताछ एक प्रेमपूर्ण नसीहत और गहरी चिंता का इज़हार थी, क्योंकि हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) अपनी क़ौम से बेहद मुहब्बत करते थे और उनका भला चाहते थे। वे नहीं चाहते थे कि उनकी क़ौम अल्लाह के ग़ज़ब का शिकार हो।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह का वादा सच्चा और पक्का होता है। जब हम अल्लाह से वादा करें, तो उसे पूरा करना चाहिए। अल्लाह ने अपने बंदों से जो वादे किए हैं—जैसे जन्नत, मग़फिरत, रहमत—वे सब सच्चे हैं। हमें उन पर भरोसा रखना चाहिए और सब्र के साथ उनका इंतज़ार करना चाहिए। जल्दबाज़ी और बेसब्री इंसान को गुमराही की तरफ ले जाती है, जैसे बनी इसराईल को ले गई। आज भी हमें चाहिए कि हम अल्लाह के वादों पर यक़ीन रखें, अपने ईमान पर साबित क़दम रहें और उन रास्तों से बचें जो अल्लाह के ग़ज़ब का कारण बनते हैं। अल्लाह की रहमत और मग़फिरत उन्हीं के लिए है जो उसकी तरफ लौटते हैं और उसके हुक्मों का पालन करते हैं।
📜 आयत 84-88 — सूरा ताहा
अनुवाद — ताहा 86
सूरा ताहा आयत 86 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (तो मूसा) गुस्से में भरे पछताए हुए अपनी क़ौम की…सूरा आयत 86/135 — सूरा ताहा طه (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा ताहा सुनें, सूरा ताहा अनुवाद, सूरा ताहा mp3, सूरा ताहा pdf. आयत 84–88. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा ताहा
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


