Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
(قَالَ يَا ابْنَ أُمَّ) – मूसा (अलैहिस्सलाम) ने हारून (अलैहिस्सलाम) की दाढ़ी और सिर के बाल पकड़ लिए थे, इसलिए हारून ने कहा: "मेरी माँ के बेटे!" – यह पुकार शफ़क़त और मुहब्बत के लिए थी।
(لَا تَأْخُذْ بِلِحْيَتِي وَلَا بِرَأْسِي) – मेरी दाढ़ी और मेरे सिर के बाल मत पकड़ो। मूसा ने अपने भाई की चोटी (सिर के बाल) पकड़ ली थी, इसलिए हारून ने उन्हें ऐसा करने से रोका।
(إِنِّي خَشِيتُ أَن تَقُولَ فَرَّقْتَ بَيْنَ بَنِي إِسْرَائِيلَ) – मुझे डर था कि अगर मैंने उन्हें छोड़कर तुम्हारे पास आने की कोशिश की और उनके बीच झगड़ा हुआ, तो तुम मुझसे कहोगे: "तुमने बनी इसराईल के बीच फूट डाल दी।"
(وَلَمْ تَرْقُبْ قَوْلِي) – और तुमने मेरी उस वसीयत (नसीहत) का पालन नहीं किया जो मैंने तुम्हें की थी, यानी "मेरे पीछे मेरी क़ौम में मेरा ख़लीफ़ा बनो और उनके साथ अच्छा व्यवहार करो।"
विस्तृत तफ़सीर:
जब हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) तूर पहाड़ से वापस लौटे और अपनी क़ौम को सोने के बछड़े की पूजा करते देखा, तो उन्हें बहुत ग़ुस्सा आया। उन्होंने तौरात की तख्तियाँ फेंक दीं और अपने भाई हारून का सिर और दाढ़ी पकड़कर खींचा। यह उनका स्वाभाविक इंसानी रिएक्शन था, क्योंकि वे अपनी क़ौम के इस कुकर्म पर बेहद नाराज़ थे।
लेकिन हारून (अलैहिस्सलाम) ने बड़ी नर्मी और मुहब्बत से जवाब दिया। उन्होंने "मेरी माँ के बेटे" कहकर मूसा के दिल को नरम किया – यह एक बहुत ही प्यारा और भाईचारे वाला अंदाज़ था। फिर उन्होंने अपना उज़्र (बहाना) बयान किया कि मैंने उन्हें रोकने की पूरी कोशिश की, लेकिन जब मैंने देखा कि वे मुझे मार डालने पर तुले हैं, तो मैंने उन्हें छोड़ दिया। मुझे डर था कि अगर मैं उनसे लड़ता या उन्हें छोड़कर तुम्हारे पास आता, तो वे आपस में लड़कर तितर-बितर हो जाते, और तुम मुझसे कहते कि मैंने बनी इसराईल में फूट डाल दी और तुम्हारी वसीयत का पालन नहीं किया।
यह वाक़िया हमें सिखाता है कि ग़ुस्से के वक़्त भी हमें अपने भाई-बहनों और दोस्तों के साथ नर्मी और हिकमत से पेश आना चाहिए। हारून ने मूसा के ग़ुस्से को अपनी मुहब्बत और अक़्लमंदी से ठंडा किया, और मूसा ने भी अपने भाई की बात सुनकर उन्हें माफ़ कर दिया और अल्लाह से दुआ की। यह इस्लाम की खूबसूरती है कि यह हमें माफ़ी, नर्मी और भाईचारे की तालीम देता है। अल्लाह हमें भी अपने भाइयों के साथ नर्मी और मुहब्बत से पेश आने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 92-96 — सूरा ताहा
अनुवाद — ताहा 94
सूरा ताहा आयत 94 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : हारून ने कहा ऐ मेरे माँजाए (भाई) मेरी दाढ़ी न…सूरा आयत 94/135 — सूरा ताहा طه (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा ताहा सुनें, सूरा ताहा अनुवाद, सूरा ताहा mp3, सूरा ताहा pdf. आयत 92–96. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा ताहा
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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