अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- أَلَّا تَتَّبِعَنِ – "तू मेरे पीछे क्यों नहीं आया?" अर्थात्, तुझे कौन सी चीज़ रोक लाई कि तू मेरा अनुसरण करते हुए मेरे पास न आया?
- أَفَعَصَيْتَ أَمْرِي – "क्या तूने मेरे आदेश की अवज्ञा की?" अर्थात्, क्या तूने मेरे उस आदेश को तोड़ दिया जो मैंने तुझे दिया था?
विस्तृत तफ़सीर:
यह आयत हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) और उनके भाई हज़रत हारून (अलैहिस्सलाम) के बीच के उस महत्वपूर्ण संवाद का हिस्सा है, जब हज़रत मूसा पहाड़ (तूर) से लौटकर अपनी क़ौम के पास आए और देखा कि वे सोने के बछड़े की पूजा कर रहे हैं। उन्होंने अपने भाई हारून से पूछा: "ऐ हारून! जब तूने देखा कि ये लोग सीधे रास्ते से भटक गए हैं और गुमराही में पड़ गए हैं, तो तुझे किस चीज़ ने रोका कि तू मेरे पीछे-पीछे न आया? तूने उन्हें छोड़कर मेरा अनुसरण क्यों नहीं किया? क्या तूने मेरे उस आदेश की अवज्ञा की जो मैंने तुझे दिया था कि मेरी ग़ैरमौजूदगी में मेरी उम्मत की देखभाल करना और उन्हें सीधे रास्ते पर रखना?"
यह पूछताछ एक नबी की अपने भाई और नायब (प्रतिनिधि) के प्रति गंभीर ज़िम्मेदारी का इज़हार थी। हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) यह जानना चाहते थे कि आख़िर हारून ने बछड़े की पूजा रोकने के लिए क्या कदम उठाया और वे स्वयं उनसे अलग क्यों हो गए। यह आयत हमें सिखाती है कि अम्र बिल-मारूफ़ व नही अनिल-मुनकर (अच्छाई का आदेश देना और बुराई से रोकना) हर मुसलमान की ज़िम्मेदारी है, और जो लोग इस ज़िम्मेदारी में कसूर करते हैं, उनसे हिसाब लिया जाएगा।
दावती पहलू:
इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि इस्लाम में अमानत और ज़िम्मेदारी का कितना बड़ा महत्व है। हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) ने अपने भाई को जो ज़िम्मेदारी सौंपी थी, उसके बारे में उन्होंने सख्ती से पूछा। यह हमें सिखाता है कि एक मुसलमान को अपने परिवार, समाज और उम्मत के मामलों में सिर्फ़ नाम के लिए नहीं, बल्कि पूरी गंभीरता और ईमानदारी से काम करना चाहिए। जब हम किसी काम की ज़िम्मेदारी लें, तो उसे पूरी तरह निभाएं, क्योंकि अल्लाह तआला हर अमानत के बारे में हमसे सवाल करेगा। यह आयत हमें यह भी बताती है कि सच्चे नेता और दाइयों का दिल अपनी उम्मत की हिदायत के लिए कितना धड़कता है — मूसा (अलैहिस्सलाम) की यह पूछताछ उनके दिल में अपनी क़ौम के लिए मौजूद मुहब्बत और चिंता का सबूत है। हमें भी अपने समाज की भलाई के लिए इसी जोश और जुनून के साथ काम करना चाहिए।
📜 आयत 91-95 — ताहा
अनुवाद — ताहा 93
सूरा ताहा आयत 93 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो क्या तुमने मेरे हुक्म की नाफ़रमानी कीसूरा आयत 93/135 — ताहा طه (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: ताहा सुनें, ताहा अनुवाद, ताहा mp3, ताहा pdf. आयत 91–95. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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