अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- آلِهَةٌ — पूज्य देवता या माबूद।
- تَمْنَعُهُم — उन्हें बचाएँ / रोक दें।
- مِن دُونِنَا — हमारे सिवा / हमारे अज़ाब के मुक़ाबले में।
- لَا يَسْتَطِيعُونَ — वे (देवता) सामर्थ्य नहीं रखते।
- نَصْرَ أَنفُسِهِمْ — अपनी ही मदद करना।
- يُصْحَبُونَ — उन्हें पनाह दी जाए / उन्हें बचाया जाए (अज़ाब से)।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला इस आयत में मुशरिकीन (बहुदेववादियों) से एक सवालिया अंदाज़ में फ़रमाता है: क्या उनके पास ऐसे माबूद हैं जो हमारे अज़ाब से उन्हें बचा सकें? यानी क्या उन्होंने ऐसे देवता बना रखे हैं जो हमारी पकड़ से उन्हें छुड़ा सकें? यह एक ऐसा सवाल है जो उनके अक़ीदे की बुनियाद को हिला देता है।
फिर अल्लाह उन देवताओं की हक़ीक़त बयान करता है — वे देवता ख़ुद अपनी मदद नहीं कर सकते। अगर उन पर कोई मुसीबत आ जाए, अगर उन्हें कोई नुक़सान पहुँचे, तो वे उसे टालने की ताक़त नहीं रखते। जो ख़ुद अपनी रक्षा न कर सके, वह दूसरों की रक्षा क्या करेगा? और यह भी कि उन देवताओं को हमारे अज़ाब से कोई पनाह नहीं मिल सकती — न वे किसी को पनाह दे सकते हैं, न ख़ुद पनाह पा सकते हैं।
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह के सिवा किसी और से मदद माँगना, किसी और पर भरोसा करना, किसी और को पूजना — यह सब बिल्कुल बेकार है। सिर्फ़ अल्लाह ही है जो अपने बंदों की हिफ़ाज़त करता है, उन्हें मुसीबतों से बचाता है, और उन्हें अपनी रहमत से पनाह देता है।
इस आयत में एक बड़ी नसीहत है — हमें अपनी ज़िंदगी में सिर्फ़ अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए। जब हम जान लें कि अल्लाह के सिवा कोई मददगार नहीं, कोई बचाने वाला नहीं, तो हमारा दिल सिर्फ़ उसी की तरफ़ मुड़ता है। और जो दिल अल्लाह से जुड़ जाए, उसे किसी और की ज़रूरत नहीं रहती। यही तोहीद (एकेश्वरवाद) की असली मिठास है — कि बंदा अल्लाह के सिवा किसी से नहीं डरता, और अल्लाह के सिवा किसी से उम्मीद नहीं रखता।
📜 आयत 41-45 — अल-अंबिया
अनुवाद — अल-अंबिया 43
सूरा अल-अंबिया आयत 43 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : क्या हमरो सिवा उनके कुछ और परवरदिगार हैं कि जो…सूरा आयत 43/112 — अल-अंबिया الأنبياء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अंबिया सुनें, अल-अंबिया अनुवाद, अल-अंबिया mp3, अल-अंबिया pdf. आयत 41–45. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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