अल-अंबिया · 5/112
अनुवाद उच्चारण — अल-अंबिया
بَلْ قَالُوا أَضْغَاثُ أَحْلَامٍ بَلِ افْتَرَاهُ بَلْ هُوَ شَاعِرٌ فَلْيَأْتِنَا بِآيَةٍ كَمَا أُرْسِلَ الْأَوَّلُونَ ۝٥
Bal qaalooo adghaasu ahlaamim balif taraahu bal huwa shaa`irun falyaatinaa bi Aayatin kamaa ursilal awwaloon
📖 हिंदी अर्थ
(उस पर भी उन लोगों ने इक्तिफ़ा न की) बल्कि कहने लगे (ये कुरान तो) ख़ाबहाय परीशाँ का मजमूआ है बल्कि उसने खुद अपने जी से झूट-मूट गढ़ लिया है बल्कि ये शख्स शायर है और अगर हक़ीकतन रसूल है) तो जिस तरह अगले पैग़म्बर मौजिज़ों के साथ भेजे गए थे

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अनुवाद — Tafsir

بَلْ قَالُوا أَضْغَاثُ أَحْلَامٍ... (अर्थात, उन्होंने कहा: ये तो सपनों के उलझे हुए टुकड़े हैं)

शब्दों के अर्थ:

  • أَضْغَاثُ أَحْلَامٍ: उलझे हुए, मिले-जुले और बेमतलब के सपने, जिनकी कोई हकीकत नहीं होती।
  • افْتَرَاهُ: उसने इसे स्वयं गढ़ लिया है, अर्थात झूठ बना लिया है।
  • شَاعِرٌ: शायर (कवि), और उनका मतलब था कि यह कलाम शायरी है, वह शायर है।
  • آيَةٌ: निशानी, चमत्कार, वह मौजिज़ा जो नबियों को दिया जाता है।
  • كَمَا أُرْسِلَ الْأَوَّلُونَ: जैसे पहले भेजे गए रसूलों के साथ चमत्कार भेजे गए थे।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उस हठधर्मिता और जिद को बयान करती है जो काफ़िरों ने अपनाई थी जब उन्हें सच्चाई पेश की गई। उन्होंने कुरआन को सुनकर भी उसे कबूल नहीं किया, बल्कि उसके बारे में अलग-अलग बातें गढ़ने लगे। कभी कहते कि ये तो सपनों के उलझे हुए टुकड़े हैं, जिनका कोई मतलब नहीं। कभी कहते कि नहीं, ये तो उसने खुद गढ़ लिया है, यह कोई वही (प्रकाशना) नहीं है। और कभी कहते कि वह तो शायर है, और यह सब शायरी है।

फिर उन्होंने एक और बात कही कि अगर वह सच्चा है तो हमारे सामने कोई ऐसा चमत्कार लाए जैसे पहले के रसूलों के साथ आए थे — जैसे सालेह अलैहिस्सलाम की ऊँटनी, मूसा अलैहिस्सलाम की लाठी, और ईसा अलैहिस्सलाम के मुर्दे ज़िंदा करने का मौजिज़ा।

यह उनकी जिद और सच्चाई से मुँह मोड़ने की सबसे बड़ी दलील थी। वे सच्चाई को मानने के लिए तैयार नहीं थे, बल्कि हर बार कोई न कोई बहाना ढूँढ़ते रहे। जब कुरआन उनके सामने आया — जो अपने आप में सबसे बड़ा चमत्कार है, जिसकी तरफ चुनौती दी गई कि इस जैसी एक सूरत बना कर लाओ, और वे न ला सके — तब भी उन्होंने उसे नहीं माना और नए-नए बहाने बनाते रहे।

इस आयत से हमें सबक मिलता है कि जिस दिल में हक़ (सच्चाई) को कबूल करने की नीयत न हो, उसके लिए कोई भी दलील और चमत्कार काफी नहीं होता। अल्लाह तआला ने पैगंबर मुहम्मद ﷺ को कुरआन जैसा जावेदानी (स्थायी) चमत्कार दिया, जो क़यामत तक के लिए है। यह किताब अपने अंदर इंसानियत की हर ज़रूरत का हल रखती है, और इसकी बलाग़त (वाक्पटुता), इसका इल्म और इसकी हिदायत ऐसी है कि अक्लमंद इंसान उसे पढ़कर यकीन कर लेता है कि यह अल्लाह का कलाम है।

हमें चाहिए कि हम कुरआन को सिर्फ पढ़ने तक ही सीमित न रखें, बल्कि उस पर अमल करें और उसे अपनी ज़िंदगी का नक्शा बनाएं। क्योंकि यही वह किताब है जो हमें दुनिया और आख़िरत की भलाई तक पहुँचाती है। अल्लाह हमें कुरआन को समझने और उस पर अमल करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 3-7 — अल-अंबिया

3لَاهِيَةً قُلُوبُهُمْ ۗ وَأَسَرُّوا النَّجْوَى الَّذِينَ ظَلَمُوا هَلْ هَٰذَا إِلَّا بَشَرٌ مِّثْلُكُمْ ۖ أَفَتَأْتُونَ السِّحْرَ وَأَنتُمْ تُبْصِرُونَ
उनके दिल (आख़िरत के ख्याल से) बिल्कुल बेख़बर हैं और ये ज़ालिम चुपके-चुपके कानाफूसी किया करते हैं कि ये शख्स (मोहम्मद कुछ भी नहीं) बस तुम्हारे ही सा आदमी है तो क्या तुम दीन व दानिस्ता जादू में फँसते हो
4قَالَ رَبِّي يَعْلَمُ الْقَوْلَ فِي السَّمَاءِ وَالْأَرْضِ ۖ وَهُوَ السَّمِيعُ الْعَلِيمُ
(तो उस पर) रसूल ने कहा कि मेरा परवरदिगार जितनी बातें आसमान और ज़मीन में होती हैं खूब जानता है (फिर क्यों कानाफूसी करते हो) और वह तो बड़ा सुनने वाला वाक़िफ़कार है
5بَلْ قَالُوا أَضْغَاثُ أَحْلَامٍ بَلِ افْتَرَاهُ بَلْ هُوَ شَاعِرٌ فَلْيَأْتِنَا بِآيَةٍ كَمَا أُرْسِلَ الْأَوَّلُونَ
(उस पर भी उन लोगों ने इक्तिफ़ा न की) बल्कि कहने लगे (ये कुरान तो) ख़ाबहाय परीशाँ का मजमूआ है बल्कि उसने खुद अपने जी से झूट-मूट गढ़ लिया है बल्कि ये शख्स शायर है और अगर हक़ीकतन रसूल है) तो जिस तरह अगले पैग़म्बर मौजिज़ों के साथ भेजे गए थे
6مَا آمَنَتْ قَبْلَهُم مِّن قَرْيَةٍ أَهْلَكْنَاهَا ۖ أَفَهُمْ يُؤْمِنُونَ
उसी तरह ये भी कोई मौजिज़ा (जैसा हम कहें) हमारे पास भला लाए तो सही इनसे पहले जिन बस्तियों को तबाह कर डाला (मौजिज़े भी देखकर तो) ईमान न लाए
7وَمَا أَرْسَلْنَا قَبْلَكَ إِلَّا رِجَالًا نُّوحِي إِلَيْهِمْ ۖ فَاسْأَلُوا أَهْلَ الذِّكْرِ إِن كُنتُمْ لَا تَعْلَمُونَ
तो क्या ये लोग ईमान लाएँगे और ऐ रसूल हमने तुमसे पहले भी आदमियों ही को (रसूल बनाकर) भेजा था कि उनके पास ''वही'' भेजा करते थे तो अगर तुम लोग खुद नहीं जानते हो तो आलिमों से पूँछकर देखो
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अनुवाद — अल-अंबिया 5

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Tuesday, August 18, 2026

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