Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- مَا آمَنَتْ – ईमान नहीं लाई
- قَبْلَهُم – इन (क़ुरैश के काफ़िरों) से पहले
- مِن قَرْيَةٍ – कोई बस्ती (बस्ती के निवासी)
- أَهْلَكْنَاهَا – हमने उसे हलाक (विनष्ट) कर दिया
- أَفَهُمْ يُؤْمِنُونَ – तो क्या ये ईमान लाएँगे?
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत मक्का के काफ़िरों को सम्बोधित करते हुए उनके उस रवैये पर कड़ी फटकार लगाती है, जब वे नबी ﷺ से माँग करते थे कि उनकी मान्यता के अनुसार कोई चमत्कार (मौजिज़ा) दिखाया जाए। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि इनसे पहले जब किसी बस्ती के लोगों ने अपने रसूल से चमत्कारों की माँग की और वह चमत्कार उन्हें दिखा दिया गया, तो भी उन्होंने ईमान नहीं लाया। उन्होंने उसे झुठलाया और अल्लाह की यात्रा (अज़ाब) ने उन्हें आ घेरा और वे हलाक कर दिए गए।
यानी चमत्कार दिखाने से ईमान लाना अल्लाह की सुन्नत (रीति) के विपरीत है। जब पिछली उम्मतों को उनकी माँगे पूरी करने पर भी ईमान नहीं आया और वे तबाह कर दी गईं, तो क्या इन क़ुरैश वालों को चमत्कार देखकर ईमान ले आना चाहिए? हरगिज़ नहीं! ये तो उनसे भी ज़्यादा सरकश और हठीले हैं।
अल्लाह तआला ने इस उम्मत पर विशेष रहमत की है कि उन्हें चमत्कारों की माँग के बावजूद वैसा अज़ाब नहीं दिया जो पिछली उम्मतों पर आया, क्योंकि यह उम्मत क़यामत तक बाक़ी रहने वाली है और इसे उखाड़ कर हलाक नहीं किया जाएगा। यह अल्लाह की रहमत और हिकमत है कि उसने उन्हें वे निशानियाँ नहीं दीं जो वे ज़िद और हठधर्मी से माँग रहे थे, क्योंकि अगर वे निशानियाँ दिखा दी जातीं और फिर भी ये ईमान नहीं लाते, तो उन पर भी वही अज़ाब आता जो पिछली उम्मतों पर आया।
इस आयत में हमारे लिए बड़ी नसीहत है कि हम अल्लाह के दिए हुए कुरआन और रसूल ﷺ की सुन्नत को ही काफी समझें। चमत्कारों और निशानियों की माँग करना ईमान की कमज़ोरी की निशानी है। सच्चा ईमान तो ग़ैब पर ईमान लाना है — बिना देखे, अल्लाह और उसके रसूल की बात को दिल से मान लेना। यही वह ईमान है जो इंसान को नजात (मुक्ति) देता है और अल्लाह की मुहब्बत का ज़रिया बनता है।
आओ, हम अपने नबी ﷺ की सुन्नत पर चलें, कुरआन को अपना रहनुमा बनाएँ और अल्लाह से सीधी राह की दुआ करें। याद रखें, अल्लाह तआला अपने बंदों पर बहुत मेहरबान है और चाहता है कि वे ईमान लाकर जन्नत की नेमतें हासिल करें।
📜 आयत 4-8 — सूरा अल-अंबिया
अनुवाद — अल-अंबिया 6
सूरा अल-अंबिया आयत 6 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : उसी तरह ये भी कोई मौजिज़ा (जैसा हम कहें) हमारे…सूरा आयत 6/112 — सूरा अल-अंबिया الأنبياء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-अंबिया सुनें, सूरा अल-अंबिया अनुवाद, सूरा अल-अंबिया mp3, सूरा अल-अंबिया pdf. आयत 4–8. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-अंबिया
पवित्र क़ुरआन
Saturday, October 3, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


