अल-हज · 12/78
अनुवाद उच्चारण — अल-हज
يَدْعُو مِن دُونِ اللَّهِ مَا لَا يَضُرُّهُ وَمَا لَا يَنفَعُهُ ۚ ذَٰلِكَ هُوَ الضَّلَالُ الْبَعِيدُ ۝١٢
Yad`oo min doonil laahi maa laa yadurruhoo wa maa laa yanfa`uh` zaalika huwad dalaalul ba`ed
📖 हिंदी अर्थ
खुदा को छोड़कर उन चीज़ों को (हाजत के वक्त) बुलाता है जो न उसको नुक़सान ही पहुँचा सकते हैं और न कुछ नफा ही पहुँचा सकते हैं
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • يَدْعُو: पुकारता है, अर्थात् पूजता है।
  • مِن دُونِ اللهِ: अल्लाह को छोड़कर।
  • مَا لَا يَضُرُّهُ: जो उसे हानि नहीं पहुँचा सकता।
  • وَمَا لَا يَنفَعُهُ: और जो उसे लाभ नहीं पहुँचा सकता।
  • الضَّلَالُ الْبَعِيدُ: परम पथभ्रष्टता, सत्य से बहुत दूर की गुमराही।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उस व्यक्ति की दयनीय स्थिति का वर्णन करती है जो अल्लाह को छोड़कर उन चीज़ों को पुकारता है—अर्थात् उनकी पूजा करता है—जो न उसे कोई हानि पहुँचा सकती हैं और न ही कोई लाभ। वह ऐसे माबूदों (पूज्यों) की ओर रुजू करता है जो न उसके किसी काम आ सकते हैं, न उसकी कोई मुसीबत टाल सकते हैं, और न ही उसे कोई भलाई दे सकते हैं। ये तो बस निर्जीव पत्थर, मूर्तियाँ या ऐसी चीज़ें हैं जिनमें कोई शक्ति ही नहीं।

यही सबसे बड़ी गुमराही और सत्य से सबसे दूर की पथभ्रष्टता है। क्योंकि एक समझदार इंसान कभी उस चीज़ की ओर हाथ नहीं फैलाता जो न उसे फ़ायदा पहुँचा सके और न नुक़सान से बचा सके। यह उस व्यक्ति की तरह है जो अंधेरे में टटोलता फिरे और उसे यक़ीन ही न हो कि उसे क्या मिलेगा।

इस आयत में अल्लाह तआला हमें यह सिखाना चाहते हैं कि सच्ची पनाह और मदद सिर्फ़ अल्लाह ही से माँगनी चाहिए। वही है जो नुक़सान पहुँचा सकता है और वही है जो फ़ायदा दे सकता है। उसके सिवा हर चीज़ बेबस और लाचार है। जो इंसान अल्लाह को छोड़कर दूसरों की ओर मुड़ता है, वह अपने लिए सबसे बड़ा नुक़सान ख़ुद ही खरीदता है।

इस आयत से हमें यह सबक़ मिलता है कि हम अपनी हर ज़रूरत, हर दुआ और हर इबादत में सिर्फ़ अल्लाह ही को याद करें। वही सुनने वाला, जानने वाला और क़ुदरत रखने वाला है। उसकी रहमत और मेहरबानी से ही हमें सुकून मिल सकता है। जो लोग अल्लाह के सिवा किसी और से उम्मीदें बाँधते हैं, वे सिर्फ़ अपने आप को धोखा देते हैं और सच्ची भलाई से दूर हो जाते हैं।

अल्लाह तआला हम सबको सीधे रास्ते पर चलने की तौफ़ीक़ दे और हमें हर उस चीज़ से बचाए जो उससे दूर ले जाए। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 10-14 — अल-हज

10ذَٰلِكَ بِمَا قَدَّمَتْ يَدَاكَ وَأَنَّ اللَّهَ لَيْسَ بِظَلَّامٍ لِّلْعَبِيدِ
और उस वक्त उससे कहा जाएगा कि ये उन आमाल की सज़ा है जो तेरे हाथों ने पहले से किए हैं और बेशक खुदा बन्दों पर हरगिज़ जुल्म नहीं करता
11وَمِنَ النَّاسِ مَن يَعْبُدُ اللَّهَ عَلَىٰ حَرْفٍ ۖ فَإِنْ أَصَابَهُ خَيْرٌ اطْمَأَنَّ بِهِ ۖ وَإِنْ أَصَابَتْهُ فِتْنَةٌ انقَلَبَ عَلَىٰ وَجْهِهِ خَسِرَ الدُّنْيَا وَالْآخِرَةَ ۚ ذَٰلِكَ هُوَ الْخُسْرَانُ الْمُبِينُ
और लोगों में से कुछ ऐसे भी हैं जो एक किनारे पर (खड़े होकर) खुदा की इबादत करता है तो अगर उसको कोई फायदा पहुँच गया तो उसकी वजह से मुतमईन हो गया और अगर कहीं उस कोई मुसीबत छू भी गयी तो (फौरन) मुँह फेर के (कुफ़्र की तरफ़) पलट पड़ा उसने दुनिया और आखेरत (दोनों) का घाटा उठाया यही तो सरीही घाटा है
12يَدْعُو مِن دُونِ اللَّهِ مَا لَا يَضُرُّهُ وَمَا لَا يَنفَعُهُ ۚ ذَٰلِكَ هُوَ الضَّلَالُ الْبَعِيدُ
खुदा को छोड़कर उन चीज़ों को (हाजत के वक्त) बुलाता है जो न उसको नुक़सान ही पहुँचा सकते हैं और न कुछ नफा ही पहुँचा सकते हैं
13يَدْعُو لَمَن ضَرُّهُ أَقْرَبُ مِن نَّفْعِهِ ۚ لَبِئْسَ الْمَوْلَىٰ وَلَبِئْسَ الْعَشِيرُ
यही तो पल्ले दरने की गुमराही है और उसको अपनी हाजत रवाई के लिए पुकारता है जिस का नुक़सान उसके नफे से ज्यादा क़रीब है बेशक ऐसा मालिक भी बुरा और ऐसा रफीक़ भी बुरा
14إِنَّ اللَّهَ يُدْخِلُ الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ جَنَّاتٍ تَجْرِي مِن تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ ۚ إِنَّ اللَّهَ يَفْعَلُ مَا يُرِيدُ
बेशक जिन लोगों ने ईमान कुबूल किया और अच्छे अच्छे काम किए उनको (खुदा बेहश्त के) उन (हरे-भरे) बाग़ात में ले जाकर दाख़िल करेगा जिनके नीचे नहरें जारी होगीं बेशक खुदा जो चाहता है करता है
अल-हजकुरान सूची
78आयत
मदनीRevelation
12आयत

अनुवाद — अल-हज 12

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Tuesday, August 18, 2026

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