Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- لِيَشْهَدُوا – वे उपस्थित हों
- مَنَافِعَ – लाभ (धार्मिक और सांसारिक)
- بَهِيمَةِ الْأَنْعَامِ – चौपाये जानवर (ऊँट, गाय, बकरी, भेड़)
- أَيَّامٍ مَّعْلُومَاتٍ – निश्चित दिन (ज़ुल-हिज्जा के दस दिन)
- الْبَائِسَ – अत्यंत कष्ट में फँसा हुआ, सख्त मुसीबत वाला
तफ़सीर:
अल्लाह तआला ने हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम की ज़ुबान से लोगों को हज का आदेश दिया और उन्हें बुलाया कि वे इस पवित्र सफ़र के लिए निकलें। यह आयत उन लोगों के बारे में है जो अल्लाह के घर की यात्रा करते हैं। उनका उद्देश्य यह होना चाहिए कि वे उन फ़ायदों को हासिल करें जो धार्मिक और दुनियावी दोनों हैं — गुनाहों की माफ़ी, सवाब का हुसूल, आपसी भाईचारा, एकता और इत्तेहाद, और व्यापार व दुनियावी कामों में भी बरकत। यह सब उनके लिए मुनाफ़े का ज़रिया है।
फिर अल्लाह फ़रमाता है कि वे मालूम दिनों में अल्लाह का नाम लें — यानी ज़ुल-हिज्जा के दस दिन, ख़ास तौर पर क़ुर्बानी के वक़्त — उन जानवरों पर अल्लाह का नाम लें जो अल्लाह ने उन्हें रिज़्क़ के तौर पर दिए हैं। यह क़ुर्बानी अल्लाह का शुक्र अदा करने का ज़रिया है, क्योंकि अल्लाह ने ही ये नेअमतें दीं।
इसके बाद अल्लाह तआला हुक्म देता है कि तुम खुद भी इन क़ुर्बानी के गोश्त से खाओ — यह इबाहत (अनुमति) है, कोई फ़र्ज़ नहीं — और उन ग़रीबों को भी खिलाओ जो सख्त मुसीबत में हों, जिनके पास कुछ नहीं है। यह हमें सिखाता है कि इबादत सिर्फ़ दिल और ज़ुबान तक सीमित नहीं, बल्कि दूसरों की मदद और हमदर्दी भी इबादत का हिस्सा है।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि हज और क़ुर्बानी जैसी इबादतें सिर्फ़ रस्म नहीं, बल्कि इनमें समाज की भलाई और आपसी मोहब्बत का पैग़ाम छिपा है। जब हम अपने माल में से दूसरों को हिस्सा देते हैं, तो अल्लाह की रहमत और बरकत हमारे जीवन में उतरती है। यही इस्लाम की खूबसूरती है — कि इबादत और बंदगी के साथ-साथ इंसानियत और खैरख्वाही भी सिखाई जाती है। आओ, हम इस पैग़ाम को अपनी ज़िंदगी में अपनाएँ और अल्लाह के इन अज़ीमुलशान दिनों की क़द्र करें।
📜 आयत 26-30 — सूरा अल-हज
अनुवाद — अल-हज 28
सूरा अल-हज आयत 28 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ताकि अपने (दुनिया व आखेरत के) फायदो पर फायज़ हों…सूरा आयत 28/78 — सूरा अल-हज الحج (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-हज सुनें, सूरा अल-हज अनुवाद, सूरा अल-हज mp3, सूरा अल-हज pdf. आयत 26–30. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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