अल-हज · 28/78
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-हज
لِّيَشْهَدُوا مَنَافِعَ لَهُمْ وَيَذْكُرُوا اسْمَ اللَّهِ فِي أَيَّامٍ مَّعْلُومَاتٍ عَلَىٰ مَا رَزَقَهُم مِّن بَهِيمَةِ الْأَنْعَامِ ۖ فَكُلُوا مِنْهَا وَأَطْعِمُوا الْبَائِسَ الْفَقِيرَ ۝٢٨
Li yashhadoo manaafi`a lahum wa yazkurus mal laahi feee ayyaamimma`loomaatin `alaa maa razaqahum mim baheematil an`aami fakuloo minhaa wa at`imul baaa`isal faqeer
📖 हिंदी अर्थ
ताकि अपने (दुनिया व आखेरत के) फायदो पर फायज़ हों और खुदा ने जो जानवर चारपाए उन्हें अता फ़रमाए उनपर (ज़िबाह के वक्त) चन्द मुअय्युन दिनों में खुदा का नाम लें तो तुम लोग कुरबानी के गोश्त खुद भी खाओ और भूखे मोहताज को भी खिलाओ

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • لِيَشْهَدُوا – वे उपस्थित हों
  • مَنَافِعَ – लाभ (धार्मिक और सांसारिक)
  • بَهِيمَةِ الْأَنْعَامِ – चौपाये जानवर (ऊँट, गाय, बकरी, भेड़)
  • أَيَّامٍ مَّعْلُومَاتٍ – निश्चित दिन (ज़ुल-हिज्जा के दस दिन)
  • الْبَائِسَ – अत्यंत कष्ट में फँसा हुआ, सख्त मुसीबत वाला

तफ़सीर:

अल्लाह तआला ने हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम की ज़ुबान से लोगों को हज का आदेश दिया और उन्हें बुलाया कि वे इस पवित्र सफ़र के लिए निकलें। यह आयत उन लोगों के बारे में है जो अल्लाह के घर की यात्रा करते हैं। उनका उद्देश्य यह होना चाहिए कि वे उन फ़ायदों को हासिल करें जो धार्मिक और दुनियावी दोनों हैं — गुनाहों की माफ़ी, सवाब का हुसूल, आपसी भाईचारा, एकता और इत्तेहाद, और व्यापार व दुनियावी कामों में भी बरकत। यह सब उनके लिए मुनाफ़े का ज़रिया है।

फिर अल्लाह फ़रमाता है कि वे मालूम दिनों में अल्लाह का नाम लें — यानी ज़ुल-हिज्जा के दस दिन, ख़ास तौर पर क़ुर्बानी के वक़्त — उन जानवरों पर अल्लाह का नाम लें जो अल्लाह ने उन्हें रिज़्क़ के तौर पर दिए हैं। यह क़ुर्बानी अल्लाह का शुक्र अदा करने का ज़रिया है, क्योंकि अल्लाह ने ही ये नेअमतें दीं।

इसके बाद अल्लाह तआला हुक्म देता है कि तुम खुद भी इन क़ुर्बानी के गोश्त से खाओ — यह इबाहत (अनुमति) है, कोई फ़र्ज़ नहीं — और उन ग़रीबों को भी खिलाओ जो सख्त मुसीबत में हों, जिनके पास कुछ नहीं है। यह हमें सिखाता है कि इबादत सिर्फ़ दिल और ज़ुबान तक सीमित नहीं, बल्कि दूसरों की मदद और हमदर्दी भी इबादत का हिस्सा है।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि हज और क़ुर्बानी जैसी इबादतें सिर्फ़ रस्म नहीं, बल्कि इनमें समाज की भलाई और आपसी मोहब्बत का पैग़ाम छिपा है। जब हम अपने माल में से दूसरों को हिस्सा देते हैं, तो अल्लाह की रहमत और बरकत हमारे जीवन में उतरती है। यही इस्लाम की खूबसूरती है — कि इबादत और बंदगी के साथ-साथ इंसानियत और खैरख्वाही भी सिखाई जाती है। आओ, हम इस पैग़ाम को अपनी ज़िंदगी में अपनाएँ और अल्लाह के इन अज़ीमुलशान दिनों की क़द्र करें।



📜 आयत 26-30 — सूरा अल-हज

26وَإِذْ بَوَّأْنَا لِإِبْرَاهِيمَ مَكَانَ الْبَيْتِ أَن لَّا تُشْرِكْ بِي شَيْئًا وَطَهِّرْ بَيْتِيَ لِلطَّائِفِينَ وَالْقَائِمِينَ وَالرُّكَّعِ السُّجُودِ
और (ऐ रसूल वह वक्त याद करो) जब हमने इबराहीम के ज़रिये से इबरहीम के वास्ते ख़ानए काबा की जगह ज़ाहिर कर दी (और उनसे कहा कि) मेरा किसी चीज़ को शरीक न बनाना और मेरे घर को तवाफ और क़याम और रूकू सुजूद करने वालों के वास्ते साफ सुथरा रखना
27وَأَذِّن فِي النَّاسِ بِالْحَجِّ يَأْتُوكَ رِجَالًا وَعَلَىٰ كُلِّ ضَامِرٍ يَأْتِينَ مِن كُلِّ فَجٍّ عَمِيقٍ
और लोगों को हज की ख़बर कर दो कि लोग तुम्हारे पास (ज़ूक दर ज़ूक) ज्यादा और हर तरह की दुबली (सवारियों पर जो राह दूर दराज़ तय करके आयी होगी चढ़-चढ़ के) आ पहुँचेगें
28لِّيَشْهَدُوا مَنَافِعَ لَهُمْ وَيَذْكُرُوا اسْمَ اللَّهِ فِي أَيَّامٍ مَّعْلُومَاتٍ عَلَىٰ مَا رَزَقَهُم مِّن بَهِيمَةِ الْأَنْعَامِ ۖ فَكُلُوا مِنْهَا وَأَطْعِمُوا الْبَائِسَ الْفَقِيرَ
ताकि अपने (दुनिया व आखेरत के) फायदो पर फायज़ हों और खुदा ने जो जानवर चारपाए उन्हें अता फ़रमाए उनपर (ज़िबाह के वक्त) चन्द मुअय्युन दिनों में खुदा का नाम लें तो तुम लोग कुरबानी के गोश्त खुद भी खाओ और भूखे मोहताज को भी खिलाओ
29ثُمَّ لْيَقْضُوا تَفَثَهُمْ وَلْيُوفُوا نُذُورَهُمْ وَلْيَطَّوَّفُوا بِالْبَيْتِ الْعَتِيقِ
फिर लोगों को चाहिए कि अपनी-अपनी (बदन की) कसाफ़त दूर करें और अपनी नज़रें पूरी करें और क़दीम (इबादत) ख़ानए काबा का तवाफ करें यही हुक्म है
30ذَٰلِكَ وَمَن يُعَظِّمْ حُرُمَاتِ اللَّهِ فَهُوَ خَيْرٌ لَّهُ عِندَ رَبِّهِ ۗ وَأُحِلَّتْ لَكُمُ الْأَنْعَامُ إِلَّا مَا يُتْلَىٰ عَلَيْكُمْ ۖ فَاجْتَنِبُوا الرِّجْسَ مِنَ الْأَوْثَانِ وَاجْتَنِبُوا قَوْلَ الزُّورِ
और इसके अलावा जो शख्स खुदा की हुरमत वाली चीज़ों की ताज़ीम करेगा तो ये उसके पवरदिगार के यहाँ उसके हक़ में बेहतर है और उन जानवरों के अलावा जो तुमसे बयान किए जाँएगे कुल चारपाए तुम्हारे वास्ते हलाल किए गए तो तुम नापाक बुतों से बचे रहो और लग़ो बातें गाने वग़ैरह से बचे रहो
अल-हजकुरान सूची
78आयत
मदनीअवतरण स्थान
28आयत

अनुवाद — अल-हज 28

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Thursday, October 1, 2026

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