अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- मन्सकन (مَنسَكًا): अर्थात क़ुर्बानी का स्थान, या क़ुर्बानी की रस्म और तरीक़ा।
- बहीमतिल अनआम (بَهِيمَةِ الْأَنْعَامِ): चौपाये जानवर, जिनमें ऊँट, गाय, बकरी आदि शामिल हैं।
- मुख़बितीन (الْمُخْبِتِينَ): वे लोग जो अल्लाह के आगे झुकने वाले, विनम्र और नम्र हों, जिनके दिल अल्लाह के ज़िक्र से इत्मिनान पाते हैं।
तफ़सीर:
अल्लाह तआला इस आयत में बताते हैं कि हर उम्मत (समुदाय) के लिए, जो पहले गुज़री है, हमने क़ुर्बानी की रस्म मुक़र्रर की थी। यह एक पुरानी और सार्वभौमिक इबादत है, जो अल्लाह की वहदानियत (एकता) और उसकी नेमतों के शुक्र का ज़रिया है। इसका मक़सद यह है कि लोग उन जानवरों को ज़बह करते वक़्त अल्लाह का नाम लें, जो अल्लाह ने उन्हें रिज़्क़ के तौर पर दिए हैं — जैसे ऊँट, गाय, बकरी और भेड़। यह ज़िक्र सिर्फ़ ज़बान से नहीं, बल्कि दिल की गहराई से होना चाहिए, ताकि बंदे को याद रहे कि यह रिज़्क़ अल्लाह की तरफ़ से है और उसी के नाम पर इसे ज़बह किया जा रहा है।
फिर अल्लाह तआला फ़रमाते हैं: "तुम्हारा माबूद (पूज्य) सिर्फ़ एक ही है — वह अल्लाह है।" यह एकता का पैग़ाम है, जो सभी उम्मतों को दिया गया। इसलिए ऐ लोगों! तुम सब उसी के आगे झुको, उसी की इताअत (आज्ञाकारिता) करो, और अपने आप को उसी के सुपुर्द कर दो। इस्लाम का मतलब ही यही है — अल्लाह के सामने पूर्ण समर्पण। जो लोग ऐसा करते हैं, वही असली मुसलमान हैं।
आख़िर में अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ को हुक्म देते हैं कि वे "मुख़बितीन" — यानी उन लोगों को ख़ुशख़बरी सुनाएँ जो अल्लाह के आगे झुकने वाले, विनम्र, नम्र और उसकी इबादत में सच्चे हैं। उनके लिए दुनिया और आख़िरत दोनों में भलाई है। वे अल्लाह के ज़िक्र से दिलों को तसल्ली देते हैं, और अल्लाह उन्हें अपनी रहमत, मग़फ़िरत और जन्नत की ख़ुशख़बरी देता है।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि क़ुर्बानी सिर्फ़ एक रस्म नहीं, बल्कि अल्लाह से जुड़ने का ज़रिया है। जब हम अपने माल में से अल्लाह के नाम पर क़ुर्बानी करते हैं, तो हम यह सबूत देते हैं कि हमारा दिल अल्लाह की मोहब्बत से भरा है और हम उसकी नेमतों के शुक्रगुज़ार हैं। यही वह रास्ता है जो हमें अल्लाह की वहदानियत की तरफ़ ले जाता है — एक अल्लाह, एक उम्मत, एक रस्म। और जो लोग इस रास्ते पर चलते हैं, उनके लिए अल्लाह ने बेशुमार ख़ुशियाँ तैयार कर रखी हैं। आओ, हम सब अपने दिलों को अल्लाह के आगे झुकाएँ, उसकी इताअत करें, और उस विनम्रता को अपनाएँ जो हमें दुनिया और आख़िरत की कामयाबी तक पहुँचाती है।
📜 आयत 32-36 — अल-हज
अनुवाद — अल-हज 34
सूरा अल-हज आयत 34 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और हमने तो हर उम्मत के वास्ते क़ुरबानी का तरीक़ा…सूरा आयत 34/78 — अल-हज الحج (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-हज सुनें, अल-हज अनुवाद, अल-हज mp3, अल-हज pdf. आयत 32–36. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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