अल-मोमिनुन · 104/118
अनुवाद उच्चारण — अल-मोमिनुन
تَلْفَحُ وُجُوهَهُمُ النَّارُ وَهُمْ فِيهَا كَالِحُونَ ۝١٠٤
Talfahu wujoohahumun Naaru wa hum feehaa kaalihood
📖 हिंदी अर्थ
और (उनकी ये हालत होगी कि) जहन्नुम की आग उनके मुँह को झुलसा देगी और लोग मुँह बनाए हुए होगें
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • तल्फ़हु (تَلْفَحُ): जलाना, झुलसा देना।
  • कालिहून (كَالِحُونَ): ऐसे लोग जिनके होंठ सिकुड़ गए हों और दाँत खुले हुए निकल आए हों, अत्यधिक भय और पीड़ा की स्थिति में चेहरे की विकृत मुद्रा।

तफ़सीर:

यह आयत क़यामत के दिन उन अत्याचारियों और पापियों की भयानक स्थिति का वर्णन कर रही है, जिन्होंने दुनिया में अल्लाह के आदेशों को नकारा और अपने कर्मों में बुराई पर अड़े रहे। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि उस दिन आग उनके चेहरों को झुलसा देगी, और वे उस आग के भीतर इस हालत में होंगे कि उनके होंठ सिकुड़ जाएँगे, दाँत खुले निकल आएँगे, और उनके चेहरे अत्यधिक भय, शर्म और पीड़ा से विकृत हो जाएँगे। यह उनकी उस बुरी हालत का प्रतिफल होगा जो उन्होंने दुनिया में अल्लाह की नाफ़रमानी करके अपने लिए तैयार की थी।

यह दृश्य अत्यंत भयावह है — चेहरे जो इंसान की पहचान और इज़्ज़त का केंद्र होते हैं, वहीं सबसे पहले आग की लपटों का शिकार बनेंगे। जिस प्रकार दुनिया में वे अल्लाह की निशानियों से मुँह मोड़ते थे और सत्य को सुनने से कतराते थे, उसी प्रकार उस दिन उनके चेहरे ही उनकी रुसवाई का कारण बनेंगे।

नसीहत और दावत का पहलू:

यह आयत हर उस इंसान के लिए एक सख्त चेतावनी है जो अपनी ज़िंदगी में अल्लाह की याद से ग़ाफ़िल है और अपने कर्मों में उसकी परवाह नहीं करता। लेकिन साथ ही यह रहमत का पैग़ाम भी है — क्योंकि अल्लाह ने यह खबर हमें दुनिया में दी है ताकि हम आगाह हो जाएँ और अपने कर्म सुधार लें। अल्लाह की रहमत का दरवाज़ा अभी खुला है; जो कोई भी सच्चे दिल से तौबा करे, अपने गुनाहों से बाज़ आए, और अल्लाह के बताए रास्ते पर चले, उसके लिए जन्नत की खुशखबरी है। यह आयत हमें यह सिखाती है कि हम अपने चेहरों को सजदों से, अपनी ज़ुबान को ज़िक्र से, और अपने दिलों को अल्लाह की मुहब्बत से रोशन करें, ताकि उस दिन हमारे चेहरे नूरानी हों, न कि आग से झुलसे और विकृत। अल्लाह हम सबको उस दिन की भयावहता से बचाए और अपनी रहमत के साये में जगह दे। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 102-106 — अल-मोमिनुन

102فَمَن ثَقُلَتْ مَوَازِينُهُ فَأُولَٰئِكَ هُمُ الْمُفْلِحُونَ
फिर जिन (के नेकियों) के पल्लें भारी होगें तो यही लोग कामयाब होंगे
103وَمَنْ خَفَّتْ مَوَازِينُهُ فَأُولَٰئِكَ الَّذِينَ خَسِرُوا أَنفُسَهُمْ فِي جَهَنَّمَ خَالِدُونَ
और जिन (के नेकियों) के पल्लें हल्के होंगे तो यही लोग है जिन्होंने अपना नुक़सान किया कि हमेशा जहन्नुम में रहेंगे
104تَلْفَحُ وُجُوهَهُمُ النَّارُ وَهُمْ فِيهَا كَالِحُونَ
और (उनकी ये हालत होगी कि) जहन्नुम की आग उनके मुँह को झुलसा देगी और लोग मुँह बनाए हुए होगें
105أَلَمْ تَكُنْ آيَاتِي تُتْلَىٰ عَلَيْكُمْ فَكُنتُم بِهَا تُكَذِّبُونَ
(उस वक्त हम पूछेंगें) क्या तुम्हारे सामने मेरी आयतें न पढ़ी गयीं थीं (ज़रुर पढ़ी गयी थीं) तो तुम उन्हें झुठलाया करते थे
106قَالُوا رَبَّنَا غَلَبَتْ عَلَيْنَا شِقْوَتُنَا وَكُنَّا قَوْمًا ضَالِّينَ
वह जवाब देगें ऐ हमारे परवरदिगार हमको हमारी कम्बख्ती ने आज़माया और हम गुमराह लोग थे
अल-मोमिनुनकुरान सूची
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अनुवाद — अल-मोमिनुन 104

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Tuesday, August 18, 2026

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