अल-मोमिनुन · 105/118
अनुवाद उच्चारण — अल-मोमिनुन
أَلَمْ تَكُنْ آيَاتِي تُتْلَىٰ عَلَيْكُمْ فَكُنتُم بِهَا تُكَذِّبُونَ ۝١٠٥
Alam takun Aayaatee tutlaa `alaikum fakuntum bihaa tukazziboon
📖 हिंदी अर्थ
(उस वक्त हम पूछेंगें) क्या तुम्हारे सामने मेरी आयतें न पढ़ी गयीं थीं (ज़रुर पढ़ी गयी थीं) तो तुम उन्हें झुठलाया करते थे
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • آيَاتِي: मेरी आयतें, अर्थात अल्लाह की नाज़िल की हुई आयतें (क़ुरआन)।
  • تُتْلَى: पढ़ी जाती थीं, सुनाई जाती थीं।
  • تُكَذِّبُونَ: झुठलाते थे, अस्वीकार करते थे।

तफ़सीर (व्याख्या):

उस दिन जब अल्लाह के नेक बंदे जन्नत की नेअमतों में होंगे और काफ़िर व मुनाफ़िक़ीन जहन्नम की आग में जल रहे होंगे, तो उनसे पूछा जाएगा: "क्या मेरी आयतें तुम्हारे सामने नहीं पढ़ी जाती थीं? क्या तुम्हें क़ुरआन की आयतें नहीं सुनाई गई थीं?" यह प्रश्न उन्हें झिड़काने और उनके किए पर पछतावा दिलाने के लिए होगा। दुनिया में उनके पास अल्लाह की रहमत, हिदायत और नसीहत आई, लेकिन उन्होंने उसे झुठलाया और उसका मज़ाक उड़ाया। अब वहाँ कोई बहाना नहीं चलेगा, कोई तौबा क़बूल नहीं होगी, और न ही कोई सिफ़ारिश उनके काम आएगी। यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह तआला ने इंसान को आज़ाद छोड़ दिया है, लेकिन साथ ही उसे रास्ता भी दिखा दिया है। जिसने हिदायत की राह अपनाई, वह कामयाब हुआ, और जिसने अल्लाह की आयतों को झुठलाया, उसका अंजाम यही है।

दावती पहलू:

यह आयत हर उस इंसान के लिए एक ज़ोरदार चेतावनी है जो क़ुरआन की आयतों को सुनकर भी उनसे ग़ाफ़िल रहता है या उन्हें झुठलाता है। अल्लाह तआला ने अपनी रहमत से हमें क़ुरआन जैसी नेअमत दी है, जो हमारे लिए रौशनी, शिफ़ा और रहमत है। हमें चाहिए कि हम क़ुरआन को सिर्फ़ पढ़ें ही नहीं, बल्कि उस पर अमल करें और उसे अपनी ज़िंदगी का नक़्शा बनाएँ। याद रखें, आज जो आयतें हमारे सामने पढ़ी जाती हैं, वही कल हमारे लिए गवाह होंगी — या तो हमारे पक्ष में या हमारे विरुद्ध। आइए, हम क़ुरआन को अपना साथी बनाएँ, उस पर ग़ौर करें, और उसकी तालीमात पर चलकर उस दिन की शर्मिंदगी से बचें, जब कोई माफ़ी नहीं मिलेगी। अल्लाह हम सबको सीधी राह पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 103-107 — अल-मोमिनुन

103وَمَنْ خَفَّتْ مَوَازِينُهُ فَأُولَٰئِكَ الَّذِينَ خَسِرُوا أَنفُسَهُمْ فِي جَهَنَّمَ خَالِدُونَ
और जिन (के नेकियों) के पल्लें हल्के होंगे तो यही लोग है जिन्होंने अपना नुक़सान किया कि हमेशा जहन्नुम में रहेंगे
104تَلْفَحُ وُجُوهَهُمُ النَّارُ وَهُمْ فِيهَا كَالِحُونَ
और (उनकी ये हालत होगी कि) जहन्नुम की आग उनके मुँह को झुलसा देगी और लोग मुँह बनाए हुए होगें
105أَلَمْ تَكُنْ آيَاتِي تُتْلَىٰ عَلَيْكُمْ فَكُنتُم بِهَا تُكَذِّبُونَ
(उस वक्त हम पूछेंगें) क्या तुम्हारे सामने मेरी आयतें न पढ़ी गयीं थीं (ज़रुर पढ़ी गयी थीं) तो तुम उन्हें झुठलाया करते थे
106قَالُوا رَبَّنَا غَلَبَتْ عَلَيْنَا شِقْوَتُنَا وَكُنَّا قَوْمًا ضَالِّينَ
वह जवाब देगें ऐ हमारे परवरदिगार हमको हमारी कम्बख्ती ने आज़माया और हम गुमराह लोग थे
107رَبَّنَا أَخْرِجْنَا مِنْهَا فَإِنْ عُدْنَا فَإِنَّا ظَالِمُونَ
परवरदिगार हमको (अबकी दफा) किसी तरह इस जहन्नुम से निकाल दे फिर अगर दोबारा हम ऐसा करें तो अलबत्ता हम कुसूरवार हैं
अल-मोमिनुनकुरान सूची
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अनुवाद — अल-मोमिनुन 105

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Tuesday, August 18, 2026

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