अल-मोमिनुन · 103/118
अनुवाद उच्चारण — अल-मोमिनुन
وَمَنْ خَفَّتْ مَوَازِينُهُ فَأُولَٰئِكَ الَّذِينَ خَسِرُوا أَنفُسَهُمْ فِي جَهَنَّمَ خَالِدُونَ ۝١٠٣
Wa man khaffat mawaa zeenuhoo fa ulaaa`ikal lazeena khasiroon anfusahum fee Jahannnama khaalidoon
📖 हिंदी अर्थ
और जिन (के नेकियों) के पल्लें हल्के होंगे तो यही लोग है जिन्होंने अपना नुक़सान किया कि हमेशा जहन्नुम में रहेंगे

🎧 सुनें
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • خَفَّتْ مَوَازِينُهُ – उसके (नेकी के) पलड़े हल्के हो गए।
  • خَسِرُوا أَنْفُسَهُمْ – उन्होंने अपने आप को नुकसान में डाला।
  • خَالِدُونَ – हमेशा रहने वाले।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उस भयानक दिन का चित्रण करती है जब अल्लाह तआला अपने बंदों के कर्मों को तोलेगा। जिस व्यक्ति के नेकी के पलड़े हल्के होंगे और उसके गुनाह, विशेषकर शिर्क, उसकी नेकियों पर भारी पड़ जाएंगे, वही सच्चा घाटे में रहने वाला है। उसने अपनी जान को बर्बाद कर दिया—न तो उसने ईमान की रौशनी अपनाई और न ही अच्छे कर्मों का सामान इकट्ठा किया। उसका अंजाम जहन्नम की आग है, जहाँ वह हमेशा-हमेशा के लिए रहेगा, कभी बाहर निकलना उसके लिए संभव नहीं होगा।

यहाँ "तोल" का मतलब यह है कि अल्लाह तआला अपनी हिकमत से लोगों के सामने ऐसे ठोस और समझ में आने वाले तरीके से सबूत क़ायम करेगा, जैसे दुनिया में तराजू से चीज़ें तोली जाती हैं, ताकि हर शख्स अपने अंजाम को साफ देख सके।

दावत और नसीहत:

प्यारे भाइयो और बहनो! यह आयत हमें सोचने पर मजबूर करती है कि हमारी असली कामयाबी दुनिया के माल-दौलत, ओहदे या शोहरत में नहीं, बल्कि उस दिन के मीज़ान (तराजू) में है। आज हमारे पास मौका है कि अपने अमल-नामे को नेकियों से भर लें। एक रकअत नमाज़, एक सच्चा कलिमा, एक छोटा सा सदक़ा, माँ-बाप की एक मुस्कान—ये सब वो चीज़ें हैं जो उस दिन हमारे पलड़े को भारी कर देंगी। अल्लाह तआला ने अपनी रहमत से हमें रमज़ान, नमाज़, क़ुरआन और तौबा जैसे ज़रिए दिए हैं। आओ, आज ही अपनी ज़िंदगी को संवारें और उस आग से बचने की कोशिश करें जो हमेशा के लिए है। याद रखें, यह दुनिया कुछ दिनों की है, लेकिन आख़िरत हमेशा की है। अल्लाह हम सबको सीधी राह दिखाए और हमारे नेकी के पलड़े भारी करे। आमीन।



📜 आयत 101-105 — अल-मोमिनुन

101فَإِذَا نُفِخَ فِي الصُّورِ فَلَا أَنسَابَ بَيْنَهُمْ يَوْمَئِذٍ وَلَا يَتَسَاءَلُونَ
(जहाँ) क़ब्रों से उठाए जाएँगें (रहना होगा) फिर जिस वक्त सूर फूँका जाएगा तो उस दिन न लोगों में क़राबत दारियाँ रहेगी और न एक दूसरे की बात पूछेंगे
102فَمَن ثَقُلَتْ مَوَازِينُهُ فَأُولَٰئِكَ هُمُ الْمُفْلِحُونَ
फिर जिन (के नेकियों) के पल्लें भारी होगें तो यही लोग कामयाब होंगे
103وَمَنْ خَفَّتْ مَوَازِينُهُ فَأُولَٰئِكَ الَّذِينَ خَسِرُوا أَنفُسَهُمْ فِي جَهَنَّمَ خَالِدُونَ
और जिन (के नेकियों) के पल्लें हल्के होंगे तो यही लोग है जिन्होंने अपना नुक़सान किया कि हमेशा जहन्नुम में रहेंगे
104تَلْفَحُ وُجُوهَهُمُ النَّارُ وَهُمْ فِيهَا كَالِحُونَ
और (उनकी ये हालत होगी कि) जहन्नुम की आग उनके मुँह को झुलसा देगी और लोग मुँह बनाए हुए होगें
105أَلَمْ تَكُنْ آيَاتِي تُتْلَىٰ عَلَيْكُمْ فَكُنتُم بِهَا تُكَذِّبُونَ
(उस वक्त हम पूछेंगें) क्या तुम्हारे सामने मेरी आयतें न पढ़ी गयीं थीं (ज़रुर पढ़ी गयी थीं) तो तुम उन्हें झुठलाया करते थे
अल-मोमिनुनकुरान सूची
118आयत
मक्कीRevelation
103आयत

अनुवाद — अल-मोमिनुन 103

सूरा अल-मोमिनुन आयत 103 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जिन (के नेकियों) के पल्लें हल्के होंगे तो यही…

सूरा आयत 103/118 — अल-मोमिनुन المؤمنون (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-मोमिनुन सुनें, अल-मोमिनुन अनुवाद, अल-मोमिनुन mp3, अल-मोमिनुन pdf. आयत 101–105. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए