अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- अख़ज़ना: हमने पकड़ा, सज़ा दी
- अल-अज़ाब: यातना, मुसीबत, तकलीफ़
- इस्तक़ानू: झुके, विनम्र हुए, दबे
- यतदर्रऊ: गिड़गिड़ाते हैं, आजिज़ी से दुआ करते हैं
तफ़सीर:
अल्लाह तआला इस आयत में अपने बंदों की उस हालत का ज़िक्र कर रहे हैं जब उन्होंने सच्चाई को ठुकराया और नबी की दावत को नकारा। अल्लाह ने उन्हें तरह-तरह की मुसीबतों और यातनाओं में डाला — कभी क़हत (सूखा) और भूख से, कभी क़त्ल और तबाही से, कभी बीमारियों और दूसरी आफ़तों से — ताकि वे अपने रब की तरफ़ रुजू करें, उसके आगे झुकें और अपनी ग़लतियों से तौबा करें।
लेकिन अफ़सोस! इन सब सज़ाओं के बावजूद उनके दिल सख़्त रहे। उन्होंने न तो अपने रब के आगे विनम्रता दिखाई, न ही उसकी तरफ़ लौटे। जब मुसीबतें आईं तो उन्होंने अल्लाह से गिड़गिड़ाकर दुआ नहीं की, न ही उसकी दरगाह में आजिज़ी से हाथ फैलाए। वे अपनी सरकशी और ज़िद पर क़ायम रहे, जैसे मुसीबतें उनके लिए सबक़ बनने के बजाय सिर्फ़ एक गुज़रता हुआ हादसा हों।
यह आयत हमारे लिए एक बहुत बड़ी नसीहत है। अल्लाह तआला जब किसी बंदे पर मुसीबत डालता है तो उसका मक़सद उसे जागरूक करना होता है, उसे अपनी तरफ़ बुलाना होता है। यह रहमत का ज़रिया होता है, ग़ुस्से का नहीं। लेकिन जो बंदा इन संकेतों को नहीं समझता और अपनी हालत पर क़ायम रहता है, उसके लिए अंजाम बहुत बुरा होता है।
हमें चाहिए कि जब भी कोई मुसीबत आए, हम फ़ौरन अल्लाह की तरफ़ रुजू करें, उसके आगे सजदे में गिर जाएं, उससे दुआ करें और अपने गुनाहों से तौबा करें। यही वह रास्ता है जो हमें अल्लाह की रहमत के क़रीब लाता है। अल्लाह उन बंदों से बहुत प्यार करता है जो उसके आगे झुकते हैं, गिड़गिड़ाते हैं और उसी से उम्मीद रखते हैं। नबी करीम ﷺ ने फ़रमाया: "दुआ ही इबादत है।" तो आइए, हम अपनी हर ज़रूरत में अल्लाह से जुड़ें, उसी से माँगें और उसी के आगे अपनी आजिज़ी का इज़हार करें। यही हमारी कामयाबी की कुंजी है।
📜 आयत 74-78 — अल-मोमिनुन
अनुवाद — अल-मोमिनुन 76
सूरा अल-मोमिनुन आयत 76 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और हमने उनको अज़ाब में गिरफ्तार किया तो भी वे…सूरा आयत 76/118 — अल-मोमिनुन المؤمنون (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-मोमिनुन सुनें, अल-मोमिनुन अनुवाद, अल-मोमिनुन mp3, अल-मोमिनुन pdf. आयत 74–78. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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