अल-मोमिनुन · 75/118
अनुवाद उच्चारण — अल-मोमिनुन
۞ وَلَوْ رَحِمْنَاهُمْ وَكَشَفْنَا مَا بِهِم مِّن ضُرٍّ لَّلَجُّوا فِي طُغْيَانِهِمْ يَعْمَهُونَ ۝٧٥
Wa law rahimnaahum wa kashafnaa maa bihim min durril lalajjoo fee tughyaanihim ya`mahoon
📖 हिंदी अर्थ
और अगर हम उन पर तरस खायें और जो तकलीफें उनको (कुफ्र की वजह से) पहुँच रही हैं उन को दफा कर दें तो यक़ीनन ये लोग (और भी) अपनी सरकशी पर अड़ जाए और भटकते फिरें

🎧 सुनें
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • رَحِمْنَاهُمْ: हम उन पर दया करते।
  • كَشَفْنَا: हम दूर कर देते।
  • مَا بِهِم مِّن ضُرٍّ: जो कष्ट (भूख और सूखा) उन्हें पहुँचा है।
  • لَّلَجُّوا: वे हठ और ज़िद पर अड़ जाते।
  • طُغْيَانِهِمْ: अपनी सरकशी और कुफ़्र में।
  • يَعْمَهُونَ: भटकते और परेशान होते रहते।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला फ़रमाता है कि अगर हम उन (काफ़िरों) पर रहम करते और उन पर आई हुई मुसीबतों (जैसे क़हत और भूख) को दूर कर देते, तो भी वे अपनी सरकशी और कुफ़्र पर ही अड़े रहते। वे सीधे रास्ते से भटककर अपनी गुमराही में ही परेशान और सरासीमा रहते। यह उनके हठ और ज़िद की अंतिम हद है कि न तो मुसीबत उन्हें सबक़ सिखाती है और न ही राहत उन्हें ईमान की तरफ़ लाती है।

यह आयत हमें सिखाती है कि इंसान का दिल अगर सच्चाई को क़बूल करने से इनकार कर दे, तो न तो दुनिया की तकलीफ़ें उसे बदलती हैं और न ही आराम। अल्लाह तआला की रहमत और मेहरबानी के बावजूद, जब दिल में हठ और अहंकार हो, तो इंसान हक़ से दूर ही रहता है। यह हमारे लिए एक बड़ी नसीहत है कि हम अपने दिलों को नरम रखें, अल्लाह की नेमतों को पहचानें और उसकी तरफ़ लौटें। अल्लाह तआला की रहमत का दरवाज़ा हमेशा खुला है, लेकिन उसे क़बूल करने के लिए दिल का झुकाव और इख़लास ज़रूरी है। हमें चाहिए कि हम अल्लाह की हर नेमत पर शुक्र करें और उसकी रहमत को गुनाहों में बदलने से बचें। याद रखें, अल्लाह की रहमत उन्हीं को मिलती है जो उसकी तरफ़ रुजू करते हैं और अपने गुनाहों से तौबा करते हैं।



📜 आयत 73-77 — अल-मोमिनुन

73وَإِنَّكَ لَتَدْعُوهُمْ إِلَىٰ صِرَاطٍ مُّسْتَقِيمٍ
और तुम तो यक़ीनन उनको सीधी राह की तरफ बुलाते हो
74وَإِنَّ الَّذِينَ لَا يُؤْمِنُونَ بِالْآخِرَةِ عَنِ الصِّرَاطِ لَنَاكِبُونَ
और इसमें शक नहीं कि जो लोग आख़िरत पर ईमान नहीं रखते वह सीधी राह से हटे हुए हैं
75۞ وَلَوْ رَحِمْنَاهُمْ وَكَشَفْنَا مَا بِهِم مِّن ضُرٍّ لَّلَجُّوا فِي طُغْيَانِهِمْ يَعْمَهُونَ
और अगर हम उन पर तरस खायें और जो तकलीफें उनको (कुफ्र की वजह से) पहुँच रही हैं उन को दफा कर दें तो यक़ीनन ये लोग (और भी) अपनी सरकशी पर अड़ जाए और भटकते फिरें
76وَلَقَدْ أَخَذْنَاهُم بِالْعَذَابِ فَمَا اسْتَكَانُوا لِرَبِّهِمْ وَمَا يَتَضَرَّعُونَ
और हमने उनको अज़ाब में गिरफ्तार किया तो भी वे लोग न तो अपने परवरदिगार के सामने झुके और गिड़गिड़ाएँ
77حَتَّىٰ إِذَا فَتَحْنَا عَلَيْهِم بَابًا ذَا عَذَابٍ شَدِيدٍ إِذَا هُمْ فِيهِ مُبْلِسُونَ
यहाँ तक कि जब हमने उनके सामने एक सख्त अज़ाब का दरवाज़ा खोल दिया तो उस वक्त फ़ौरन ये लोग बेआस होकर बैठ रहे
अल-मोमिनुनकुरान सूची
118आयत
मक्कीRevelation
75आयत

अनुवाद — अल-मोमिनुन 75

सूरा अल-मोमिनुन आयत 75 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और अगर हम उन पर तरस खायें और जो तकलीफें…

सूरा आयत 75/118 — अल-मोमिनुन المؤمنون (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-मोमिनुन सुनें, अल-मोमिनुन अनुवाद, अल-मोमिनुन mp3, अल-मोमिनुन pdf. आयत 73–77. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए